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oi-Siddharth Purohit
Afghanistan: अगर आप अपने घर में पत्नी को पीटते हैं, बच्चों को भी मारते हैं, उन्हें सजा देते हैं तो आप पर कोई कार्रवाई नहीं होगी- बशर्ते आप अफगानिस्तानी नागरिक हों और वहीं रहते हों। दरअसल अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार ने अब घरेलू हिंसा को हरी झंडी दे दी जो महिलाओं के खिलाफ होने वाली यातनाओं का अगला कदम हो सकता है।
90 पन्नों के कानून में क्या-क्या?
मानवाधिकार समूहों ने तालिबान के नए महिला विरोधी और बच्चों को मारने-पीटने वाले नए कानून को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि यह कानून महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा को प्रभावी रूप से वैध बना देता है। 15 फरवरी को ‘द डेली मिरर’ में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, 90 पन्नों की इस नए चार्टर में शारीरिक हिंसा को अपराध तभी माना जाएगा जब उससे ‘हड्डी टूटे या खुला घाव’ हो।

हड्डी न टूटे- जख्म न हो
इसका मतलब यह है कि अगर किसी महिला या बच्चे को मारा जाए लेकिन चोट इतनी गंभीर न हो कि हड्डी टूटे या खून निकले। अब, अगर महिला या बच्चे के शरीर पर निशान भी पड़ जाएं तब भी उसे अपराध नहीं माना जाएगा। इसी बिंदु पर मानवाधिकार संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है, जिससे तालिबान को कोई फर्क नहीं पड़ता।
घर के मुखिया को पूरी छूट
नई कानून के मुताबिक, पति या घर के मुखिया द्वारा पत्नी या बच्चों को दिया गया अन्य शारीरिक दंड मुकदमे के दायरे में नहीं आएगा। यानी घरेलू हिंसा के कई रूप कानूनी कार्रवाई से बाहर रह सकते हैं। इतना ही नहीं, यदि ‘अवांछित बल’ (Unwanted Force) का इस्तेमाल करके किसी महिला या बच्चे को फ्रैक्चर जैसी दिखाई देने वाली चोट पहुंचाई जाती है, तो भी अधिकतम 15 दिन की जेल का प्रावधान है। आलोचकों का कहना है कि इतनी कम सज़ा से हिंसा को रोकना मुश्किल होगा।
कोर्ट में हिंसा साबित करना लगभग असंभव?
कानून में एक और शर्त यह है कि महिला को अदालत में हिंसा साबित करनी होगी। लेकिन मौजूदा प्रतिबंधों, कानूनों और सामाजिक हालात को देखते हुए महिला अधिकार कार्यकर्ता कहते हैं कि न्याय तक पहुंचना लगभग असंभव हो चुका है।
कई क्षेत्रों में महिलाओं की आवाजाही और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी पर पहले से ही पाबंदियां हैं। ऐसे में अदालत में जाकर सबूत पेश करना और कानूनी प्रक्रिया पूरी करना बेहद कठिन माना जा रहा है।
पति की अनुमति के बिना रिश्तेदारों से मिलने पर जेल
नए कानून का एक और विवादित प्रावधान कहता है कि यदि कोई विवाहित महिला अपने पति की स्पष्ट अनुमति के बिना अपने परिवार से मिलने जाती है, तो उसे अधिकतम तीन महीने की जेल हो सकती है। इस प्रावधान को लेकर सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। आलोचकों का कहना है कि यह महिलाओं की स्वतंत्रता और बुनियादी अधिकारों पर सीधा हमला है।
2021 के बाद बदला कानूनी ढांचा
2021 में अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद पिछली सरकार का ‘ईवीएडब्ल्यू कानून’ (Ending Violence Against Women) रद्द कर दिया गया था। इसके साथ ही इस कानून को लागू करने वाले संस्थानों को भी भंग कर दिया गया।
अब रावदारी का कहना है कि नई आपराधिक संहिता महिलाओं और बच्चों के ‘दुर्व्यवहार, उत्पीड़न और दंड को वैध बनाती है।’ संगठन के मुताबिक, इससे महिलाएं और बच्चे लगातार घरेलू हिंसा के जोखिम में रहेंगे।
इंटरनेशनल कम्युनिटी से लगाई गुहार
रावदारी ने तालिबान से अपील की है कि इस संहिता को तुरंत लागू न किया जाए। साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय और यूनाइटेड नेशन्स से भी आग्रह किया गया है कि वे कानूनी तंत्रों का इस्तेमाल कर इसे प्रभावी होने से रोकें।
महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा पर यूनाइटेड नेशन्स की स्पेशल रिपोर्टर रीम अलसलेम ने इस कानून के संभावित परिणामों को ‘भयानक’ बताया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस कानून को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएगा।
आगे क्या होगा?
नई आपराधिक संहिता को लेकर बहस तेज हो गई है। एक ओर तालिबान का नया कानूनी ढांचा है, तो दूसरी ओर मानवाधिकार संगठनों और यूनाइटेड नेशन्स की चिंताएं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस कानून को लागू होने से पहले रोका जा सकेगा, या फिर यह अफगानिस्तान में महिलाओं और बच्चों के लिए और अधिक मुश्किल हालात पैदा करेगा।
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