अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य की मौत के मामले में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती। हालांकि, पीड़िता का पक्ष है कि यह सजा अपराध की गंभीरता के अनुरूप नहीं है और इसे बढ़ाया जाना चाहिए।
इससे पहले सेंगर ने हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। बाद में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
जिस पर 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा था कि कुलदीप सिंह सेंगर के मामले की सुनवाई तीन महीने में पूरी करें।

























