सिनेमाघर में कोरियाई महिला का ‘मजेदार’ कल्चर शॉकImage Credit source: Instagram/@wonny_brothers
हाल ही में चेन्नई में अपने परिवार के साथ रह रही एक दक्षिण कोरियाई महिला को एक सिनेमाघर में ऐसा ‘कल्चर शॉक’ (Culture Shock) लगा, जिसकी उसने सपने में भी उम्मीद नहीं की थी. सोशल मीडिया पर इस विदेशी महिला का अनुभव अब तेजी से वायरल हो रहा है.
क्या है पूरा मामला?
दक्षिण कोरियाई व्लॉगर जंग ऐ (Jung Ae) हाल ही में अपने दोनों बेटों के साथ एक मल्टीप्लेक्स में फिल्म देखने गईं. शुरुआत में उन्हें सब कुछ सामान्य लगा. टिकट काउंटर, फिल्म के बड़े-बड़े पोस्टर और पॉपकॉर्न की खुशबू बिल्कुल वैसी ही थी जैसी उनके देश साउथ कोरिया में होती है. एंट्री के समय हुई सुरक्षा जांच को छोड़कर उन्हें कोई बड़ा फर्क महसूस नहीं हुआ. लेकिन असली ट्विस्ट तो फिल्म के बीच में आया.
अचानक बत्तियां जलीं, तो लगा कि कोई इमरजेंसी आ गई!
जंग ऐ ने बताया कि फिल्म देखते-देखते अचानक स्क्रीन पूरी तरह काली हो गई और थिएटर की सारी लाइटें जल उठीं. इतना ही नहीं, थिएटर में बैठे लोग अचानक अपनी सीटों से उठकर बाहर भागने लगे. यह देखकर जंग ऐ बुरी तरह घबरा गईं. कोरियाई सिनेमाघरों में ऐसा कभी नहीं होता, इसलिए उन्हें लगा कि शायद थिएटर में कोई बड़ी गड़बड़ी हो गई है या फिर कोई इमरजेंसी की स्थिति आ गई है. लेकिन कुछ ही पलों में जब उन्हें माजरा समझ आया, तो वह अपनी हंसी नहीं रोक पाईं. दरअसल, वह कोई खतरा नहीं, बल्कि फिल्म का ‘इंटरवल’ था.
साउथ कोरिया और भारत के सिनेमा में क्या अंतर है?
जंग ऐ ने अपने वीडियो में समझाया कि दक्षिण कोरिया में चाहे फिल्म कितनी भी लंबी क्यों न हो, उसे बिना किसी ब्रेक के लगातार दिखाया जाता है. अगर किसी को वॉशरूम जाना हो, तो वह चुपचाप उठता है और स्क्रीन को डिस्टर्ब किए बिना निकल जाता है.
इसके उलट, भारत में फिल्म के दो हिस्सों के बीच एक खास ब्रेक दिया जाता है ताकि दर्शक आराम कर सकें, वॉशरूम जा सकें या फिर से पॉपकॉर्न और स्नैक्स खरीद सकें. जंग ऐ ने माना कि शुरुआत में उन्हें यह तरीका थोड़ा अजीब लगा, लेकिन अब वह भारतीय सिनेमाघर की इस इंटरवल सिस्टम की मुरीद हो चुकी हैं और इसे बेहतर मानती हैं.
इंटरनेट पर छिड़ गई बहस: आराम या सिर्फ बिजनेस?
सोशल मीडिया पर जंग ऐ का यह वीडियो शेयर होते ही वायरल हो गया और इस पर एक दिलचस्प बहस छिड़ गई है. एक पक्ष का कहना है कि 3 घंटे की फिल्म के बीच में ब्रेक मिलना दर्शकों के लिए बहुत जरूरी है ताकि वे आराम से स्ट्रेच कर सकें. दूसरा पक्ष इसे सिनेमाघरों का एक बिजनेस मॉडल मानता है. उनका कहना है कि इंटरवल सिर्फ इसलिए रखा जाता है ताकि महंगे पॉपकॉर्न, कोल्ड ड्रिंक्स और स्नैक्स की बिक्री बढ़ाई जा सके. यह भी पढ़ें:भारत आने से पहले डरी हुई थी ये विदेशी महिला, फिर ऐसा क्या हुआ जो कह दिया- भारतीयों के लिए इस बात पर जान भी दे सकती हूं
यहां देखिए वीडियो



























