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Viral Video: एक ऑटो में 22 बच्चों को बैठाकर चल दिया ऑटो ड्राइवर, पुलिस को दिखा भेड़ बकरी जैसा नजारा

एकसाथ 22 बच्चों को लेकर जाता दिखा ऑटो

तेलंगाना के नगरकुरनूल से आई एक घटना ने लोगों को गहरी चिंता में डाल दिया है. अक्सर हम सुनते हैं कि स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है, लेकिन जब वही बच्चे लापरवाही का शिकार होते दिखें तो मन विचलित हो उठता है. यहां एक स्कूल ऑटो में बच्चों को जिस हाल में ले जाया जा रहा था, उसे देखकर किसी का भी दिल दहल सकता है.

मामला उस समय सामने आया जब सड़क पर गश्त कर रहा एक पुलिसकर्मी को एक ऑटो में कहीं न कहीं कुछ असामान्य दिखाई दिया. आमतौर पर तीन या चार लोगों के बैठने की क्षमता वाले इस छोटे से वाहन में पूरे बाइस बच्चे बैठे हुए थे. यही नहीं, उनके बैग, टिफिन और पानी की बोतलें भी उसी तंग जगह में समेट दी गई थीं. दूर से देखने पर अंदाज़ा लगाना मुश्किल था कि ऑटो के अंदर क्या चल रहा है, लेकिन जैसे ही पुलिसकर्मी ने वाहन को रुकवाया, असलियत सामने आ गई.

बंदे ने ऑटो को बना लिया मिनी बस

वीडियो में दिखता है कि पुलिसकर्मी जैसे ही ऑटो के करीब जाता है, अंदर बैठे बच्चे मानो एक-दूसरे के ऊपर ढेर होते हुए दिखाई देते हैं. उन्हें निकालते समय वह खुद हैरान रह जाता है कि इतने छोटे वाहन में इतने बच्चे कैसे समा गए. बच्चे उतरते वक्त लड़खड़ाते भी दिखते हैं, क्योंकि अंदर पैरों को हिलाने तक की जगह नहीं थी. कुछ बच्चे तो सांस लेने तक में दिक्कत महसूस करते दिखे.

पुलिसकर्मी ने ड्राइवर को फटकारते हुए साफ कहा कि यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि बच्चों की जान जोखिम में डालने जैसा है. उसने ड्राइवर से सवाल किया कि आखिर किस सोच के साथ वह इतने मासूम बच्चों को इस तरह ठूंसकर लेकर जा रहा था. मौके पर मौजूद लोगों ने भी इस स्थिति को देखकर नाराज़गी जताई और कहा कि ऐसे ऑटोरिक्शा किसी बड़े हादसे की वजह बन सकते हैं.

यहां देखिए वीडियो

इस घटना के बाद एक और पहलू सामने आया. कई माता-पिता का कहना है कि निजी स्कूलों की बस या वैन की फीस इतनी ज्यादा होती है कि वे मजबूरी में ऐसे ऑटो वालों का सहारा लेते हैं. कम खर्च में बच्चे स्कूल पहुंच जाएं, यही सोचकर वे इन वाहनों पर निर्भर हो जाते हैं. लेकिन इस प्रक्रिया में बच्चों की सुरक्षा पीछे छूट जाती है. माता-पिता मानते हैं कि भीड़ भरे वाहनों में बच्चों को ले जाना अत्यंत जोखिम भरा है, पर विकल्प कम होने के कारण वे निगल जाना पड़ता है.



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