International
oi-Siddharth Purohit
China
Vs
America:
पेंटागन
की
एक
नई
रिपोर्ट
ने
चीन
की
तेजी
से
बढ़ती
नेवी
की
ताकत
पर
बड़ा
खुलासा
किया
है।
रिपोर्ट
के
मुताबिक,
चीन
के
पास
फिलहाल
दुनिया
का
सबसे
बड़ा
समुद्री
लड़ाकू
बल
है।
चीन
के
पास
कुल
234
युद्धपोत
हैं,
जबकि
अमेरिकी
नौसेना
के
पास
219
युद्धपोत
मौजूद
हैं।
यह
आंकड़ा
बताता
है
कि
संख्या
के
मामले
में
चीन
अब
अमेरिका
से
आगे
निकल
चुका
है।
किन
जहाजों
को
युद्धपोत
माना
गया?
इस
रिपोर्ट
में
केवल
वही
चीनी
जहाज
गिने
गए
हैं
जो
1,000
मीट्रिक
टन
से
ज्यादा
की
क्षमता
वाले
हैं
और
जो
सक्रिय
रूप
से
इस्तेमाल
में
हैं।
इनमें
मिसाइल
या
टॉरपीडो
से
लैस
जहाज
और
पनडुब्बियां
शामिल
हैं।
रिपोर्ट
में
हाल
ही
में
चीनी
तटरक्षक
बल
को
सौंपे
गए
22
मिसाइल-सशस्त्र
कार्वेट
भी
शामिल
किए
गए
हैं।
हालांकि,
PLA
Navy
द्वारा
संचालित
लगभग
80
छोटे
मिसाइल-सशस्त्र
गश्ती
जहाजों
को
इस
गिनती
में
शामिल
नहीं
किया
गया
है।

फिर
भी
दो
मोर्चों
पर
अमेरिका
से
पीछे
है
चीन
इतनी
बड़ी
संख्या
के
बावजूद,
चीनी
नौसेना
अभी
भी
दो
अहम
क्षेत्रों
में
अमेरिकी
नौसेना
से
पीछे
है।
ये
दो
क्षेत्र
हैं-पनडुब्बियां
और
एयरक्राफ्ट
करियर
(जिस
जहाज
से
फाइटर
जेट
उड़ान
और
लैंडिंग
दोनों
को
अंजाम
दे
सके)।
इन
दोनों
क्षेत्रों
में
अमेरिका
के
पास
संख्या
और
तकनीक,
दोनों
में
बढ़त
है।
लेकिन
पेंटागन
की
रिपोर्ट
बताती
है
कि
चीन
इस
अंतर
को
खत्म
करने
की
रणनीति
पर
तेजी
से
काम
कर
रहा
है।
एयरक्राफ्ट
करियर
शिप
में
चीन
बना
रहा
है
बड़ा
प्लान
पेंटागन
के
विश्लेषण
के
मुताबिक,
चीन
खास
तौर
पर
एयरक्राफ्ट
करियर
के
क्षेत्र
में
अमेरिका
को
टक्कर
देने
की
तैयारी
में
है।
रिपोर्ट
का
दावा
है
कि
चीन
2035
तक
इस
अंतर
को
पाट
सकता
है।
यानी
अगले
एक
दशक
में
अमेरिका
और
चीन
के
पास
लगभग
बराबर
संख्या
में
एयरक्राफ्ट
करियर
हो
सकते
हैं।
अभी
क्या
है
अमेरिका
की
स्थिति?
वर्तमान
में
अमेरिकी
नौसेना
दुनिया
के
कुल
एयरक्राफ्ट
करियर
का
आधा
हिस्सा
संचालित
करती
है।
अमेरिका
के
पास
कुल
11
एयरक्राफ्ट
करियर
हैं,
जबकि
पूरी
दुनिया
में
कुल
22
एयरक्राफ्ट
करियर
मौजूद
हैं।
कुछ
साल
पहले
तक
माना
जाता
था
कि
चीन
को
इस
स्तर
तक
पहुंचने
में
कई
दशक
लगेंगे।
लेकिन
अब
ये
समय
काफी
कम
कर
रह
गया
है।
रिपोर्ट
की
मानें
तो
2035
तक
चीन
इसमें
टॉप
पर
होगा।
अमेरिका
का
शक्तिशाली
एयरक्राफ्ट
करियर
बेड़ा
अमेरिकी
नौसेना
के
11
एयरक्राफ्ट
करियर
में
10
निमित्ज़-क्लास
और
एक
अत्याधुनिक
यूएसएस
गेराल्ड
आर.
फोर्ड
(CVN-78)
शामिल
है।
ये
सभी
एयरक्राफ्ट
करियर
न्यूक्लियर
पावर्ड
हैं,
जिससे
उन्हें
समुद्र
में
लगभग
असीमित
दूरी
तय
करने
की
क्षमता
मिलती
है।
चीन
अभी
तीन
एयरक्राफ्ट
करियर
तक
सीमित
चीन
के
पास
फिलहाल
तीन
एयरक्राफ्ट
करियर
हैं,
जिससे
वह
अमेरिका
से
काफी
पीछे
है।
चीन
का
सबसे
नया
एयरक्राफ्ट
करियर
‘फुजियान’
पिछले
महीने
ही
सेवा
में
शामिल
हुआ
है।
यह
चीन
का
पहला
पूरी
तरह
स्वदेशी
रूप
से
डिजाइन
किया
गया
एयरक्राफ्ट
करियर
है।
भारत,
ब्रिटेन
और
इटली
की
स्थिति
भारत,
ब्रिटेन
और
इटली-इन
तीनों
देशों
के
पास
दो-दो
एयरक्राफ्ट
करियर
हैं।
तकनीक
के
मामले
में
अमेरिकी
बेड़ा
सबसे
आगे
है।
अमेरिका
के
अलावा
केवल
फ्रांस
ही
एक
न्यूक्लियर
पावर्ड
एयरक्राफ्ट
करियर
‘चार्ल्स
डी
गॉल’
का
संचालन
करता
है।
चीन
के
पास
अभी
कोई
भी
न्यूक्लियर
पावर्ड
एयरक्राफ्ट
करियर
नहीं
है।
क्या
चीन
बना
रहा
है
न्यूक्लियर
एयरक्राफ्ट
करियर?
हालांकि,
कुछ
अपुष्ट
मीडिया
रिपोर्टों
में
दावा
किया
गया
है
कि
चीन
टाइप-004
नाम
के
न्यूक्लियर
पावर्ड
एयरक्राफ्ट
करियर
पर
काम
कर
रहा
है।
बीजिंग
ने
अब
तक
इसकी
आधिकारिक
पुष्टि
नहीं
की
है।
खास
बात
यह
भी
है
कि
अभी
तक
केवल
अमेरिका
और
चीन
ही
ऐसे
देश
हैं
जिनके
एयरक्राफ्ट
करियर
EMALS
यानी
इलेक्ट्रोमैग्नेटिक
एयरक्राफ्ट
लॉन्च
सिस्टम
से
लैस
हैं।
अमेरिकी
एयरक्राफ्ट
करियरों
में
देरी
की
कहानी
अमेरिकी
नौसेना
का
सबसे
पुराना
एयरक्राफ्ट
करियर
यूएसएस
निमित्ज़
मई
2026
में
रिटायर
होने
वाला
है।
इसके
बाद
फोर्ड-क्लास
एयरक्राफ्ट
करियर
निमित्ज़-क्लास
की
जगह
लेंगे।
लेकिन
यूएसएस
जॉन
एफ.
कैनेडी
(CVN-79)
की
डिलीवरी
में
देरी
हो
रही
है
और
अब
इसके
2027
में
शामिल
होने
की
उम्मीद
है।
2030
तक
और
देरी
की
आशंका
तीसरा
फोर्ड-क्लास
एयरक्राफ्ट
करियर
यूएसएस
एंटरप्राइज
(CVN-80)
अब
2030
में
मिलने
की
संभावना
है।
अमेरिकी
नौसेना
के
मुताबिक,
सप्लाई
चेन
और
कच्चे
माल
की
दिक्कतें
इसकी
बड़ी
वजह
हैं।
इसके
बावजूद
अमेरिका
2035
तक
11
एयरक्राफ्ट
करियरों
का
बेड़ा
बनाए
रखना
चाहता
है।
कानून
ने
तय
की
है
11
एयरक्राफ्ट
करियरों
की
सीमा
अमेरिकी
कानून
टाइटल
10,
यू.एस.
कोड
सेक्शन
8062
के
तहत
नौसेना
को
कम
से
कम
11
एयरक्राफ्ट
करियर
रखना
जरूरी
है।
इसका
मकसद
यह
है
कि
अमेरिका
दुनिया
के
अहम
समुद्री
इलाकों
में
अपनी
मौजूदगी
बनाए
रख
सके।
चीन
का
डबल
कैरियर
अभ्यास
और
ताइवान
संकेत
पेंटागन
रिपोर्ट
में
यह
भी
बताया
गया
है
कि
चीन
ने
पहली
बार
लियाओनिंग
और
शेडोंग
एयरक्राफ्ट
करियरों
के
साथ
डबल
कैरियर
अभ्यास
किया।
इसके
अलावा
2024
में
‘JOINT
SWORD-2024B’
अभ्यास
के
दौरान
चीन
ने
ताइवान
की
नाकाबंदी
का
भी
अभ्यास
किया
था।
चीन
को
क्यों
चाहिए
ज्यादा
एयरक्राफ्ट
करियर?
रिपोर्ट
के
मुताबिक,
किसी
भी
समय
लगभग
आधे
एयरक्राफ्ट
करियर
मरम्मत
या
मेंटेनेंस
में
रहते
हैं।
ऐसे
में
चीन
के
पास
सक्रिय
तैनाती
के
लिए
सिर्फ
दो
एयरक्राफ्ट
करियर
ही
बचते
हैं,
जो
उसकी
वैश्विक
महत्वाकांक्षाओं
के
लिए
पर्याप्त
नहीं
हैं।
2035
तक
नौ
एयरक्राफ्ट
करियरों
का
लक्ष्य
पेंटागन
का
दावा
है
कि
चीन
2035
तक
छह
और
एयरक्राफ्ट
करियर
बनाना
चाहता
है,
जिससे
उसका
कुल
बेड़ा
नौ
एयरक्राफ्ट
करियरों
का
हो
जाएगा।
इसका
मतलब
है
कि
चीन
को
हर
20
महीने
में
एक
नया
एयरक्राफ्ट
करियर
जोड़ना
होगा।
क्या
यह
लक्ष्य
वाकई
संभव
है?
ऑस्ट्रेलियाई
नौसेना
विश्लेषक
एलेक्स
लक
ने
इस
लक्ष्य
पर
सवाल
उठाए
हैं।
उन्होंने
सोशल
मीडिया
प्लेटफॉर्म
X
पर
लिखा
कि
इतनी
तेजी
से
एयरक्राफ्ट
करियर
बनाना
बेहद
मुश्किल
है,
भले
ही
चीन
की
जहाज
निर्माण
क्षमता
बहुत
मजबूत
क्यों
न
हो।
सबमरीन्स
में
भी
चीन
तेजी
से
आगे
सबमरीन्स
के
मामले
में
अमेरिका
के
पास
71
न्यूक्लियर
पावर्ड
पनडुब्बियां
हैं,
जबकि
चीन
के
पास
60
पनडुब्बियां
हैं,
जिनमें
सिर्फ
12
न्यूक्लियर
पावर्ड
हैं।
लेकिन
चीन
तेजी
से
अपनी
सबमरीन
क्षमता
बढ़ा
रहा
है।
2035
तक
सबमरीन्स
में
अमेरिका
से
आगे
निकल
सकता
है
चीन
अमेरिकी
रक्षा
विभाग
के
अनुसार,
चीन
2035
तक
अपनी
सबमरीन
संख्या
80
तक
पहुंचा
सकता
है।
इनमें
से
करीब
20
न्यूक्लियर
पावर्ड
हो
सकती
हैं।
हाल
के
वर्षों
में
चीन
ने
बड़ी
संख्या
में
नई
पनडुब्बियां
लॉन्च
की
हैं।
अनुभव
और
गठबंधन
अभी
भी
अमेरिका
के
पक्ष
में
हालांकि
संख्या
में
चीन
तेजी
से
बढ़
रहा
है,
लेकिन
अमेरिका
के
पास
दो
सदियों
से
ज्यादा
का
समुद्री
युद्ध
अनुभव
है।
इसके
अलावा,
अमेरिका
के
पास
जापान,
ऑस्ट्रेलिया,
भारत,
ताइवान
और
दक्षिण
कोरिया
जैसे
मजबूत
सहयोगी
भी
हैं।
इस
खबर
पर
आपकी
क्या
राय
है,
हमें
कमेंट
में
बताएं।

























