International
oi-Bhavna Pandey
Chinese
embassy
secret
room
in
London:
ब्रिटेन
की
राजधानी
लंदन
में
चीन
के
प्रस्तावित
“सुपर-एंबेसी”
को
लेकर
अंतरराष्ट्रीय
स्तर
पर
खलबली
मच
गई
है।
ऐतिहासिक
रॉयल
मिंट
कोर्ट
में
बनने
जा
रही
इस
तथाकथित
‘सुपर-एंबेसी’
को
लेकर
ऐसे
सनसनीखेज
खुलासे
हुए
हैं
जिसने
न
सिर्फ
ब्रिटेन
बल्कि
अमेरिका
तक
की
सुरक्षा
एजेंसियों
को
चिंता
में
डाल
दिया
है।
208
गुप्त
कमरे
और
अंडरग्राउंड
नेटवर्क
बता
दें
चीन
ने
साल
2018
में
टावर
ऑफ
लंदन
के
पास
स्थित
रॉयल
मिंट
कोर्ट
साइट
खरीदी
थी।
यहां
बनने
वाला
दूतावास
यूरोप
का
सबसे
बड़ा
चीनी
राजनयिक
परिसर
हो
सकता
है,
जो
करीब
22,000
वर्ग
मीटर
में
फैला
होगा।
इस
परिसर
में
कार्यालयों
के
साथ-साथ
कर्मचारियों
के
आवास
और
अत्याधुनिक
सुविधाएं
प्रस्तावित
हैं।
वहीं
अब
ब्रिटिश
अख़बार
द
टेलीग्राफ
के
बड़े
खुलासे
के
अनुसार,
इस
विशाल
परिसर
के
नीचे
208
गुप्त
कमरों
का
एक
अंडरग्राउंड
नेटवर्क
बनाया
जा
रहा
है।
अख़बार
ने
उस
गुप्त
भूमिगत
कैंपस
का
नक्शा
भी
जारी
किया
है,
जिसे
कथित
तौर
पर
बीजिंग
सार्वजनिक
जांच
से
दूर
रखना
चाहता
था।

लंदन
में
चाइना
का
दूतावास
Photo:
Wikipedia
ब्रिटेन
की
सबसे
संवेदनशील
केबलों
के
बेहद
करीब
‘सीक्रेट
रूम’
सबसे
गंभीर
चिंता
इस
बात
को
लेकर
है
कि
दूतावास
के
बेसमेंट
में
मौजूद
एक
छिपा
हुआ
कमरा,
लंदन
की
अत्यंत
संवेदनशील
फाइबर-ऑप्टिक
केबलों
से
महज़
कुछ
मीटर
की
दूरी
पर
स्थित
होगा।
यही
केबलें
सिटी
ऑफ
लंदन
के
वित्तीय
डेटा
के
साथ-साथ
लाखों
लोगों
के
ईमेल
और
मैसेजिंग
ट्रैफिक
को
संभालती
हैं।सुरक्षा
विशेषज्ञों
विशेषज्ञों
का
कहना
है
कि
इस
ढांचे
का
इस्तेमाल
न
सिर्फ
ब्रिटेन
बल्कि
पूरे
यूरोप
की
जासूसी
के
लिए
किया
जा
सकता
है।
“यह
पूरी
तरह
पागलपन
होगा”
बकिंघम
विश्वविद्यालय
के
खुफिया
और
सुरक्षा
मामलों
के
प्रोफेसर
एंथनी
ग्लीस
ने
इस
परियोजना
को
आगे
बढ़ाने
को
लेकर
कड़ा
विरोध
जताया
है।
उन्होंने
एलबीसी
से
कहा,
“योजनाओं
में
साफ
दिखता
है
कि
कमरे
केबलों
के
कितने
करीब
हैं-इन्हें
आसानी
से
टैप
किया
जा
सकता
है।”
ये
केबल
सिटी
ऑफ
लंदन
और
कैनरी
वार्फ
से
जुड़ा
अत्यंत
महत्वपूर्ण
वित्तीय
डेटा
प्रसारित
करती
हैं।
सर्वर
और
गर्मी
निकालने
की
व्यवस्था
ने
बढ़ाया
शक,
जासूसी
की
आशंका
नक्शों
में
दिखाया
गया
है
कि
इस
सीक्रेट
रूम
में
हॉट
एयर
वेंटिंग
सिस्टम
लगाया
गया
है।यह
व्यवस्था
आम
तौर
पर
ऐसे
स्थानों
पर
होती
है,
जहां
उच्च
क्षमता
वाले
कंप्यूटर
या
सर्विलांस
उपकरण
लगाए
जाते
हैं।
इसी
बिंदु
ने
ब्रिटेन
और
अमेरिका,
दोनों
को
सबसे
ज्यादा
सतर्क
कर
दिया
है।
प्रोफेसर
ग्लीस
के
मुताबिक,
दूतावास
की
योजनाओं
में
बड़े
सर्वरों
के
अनुकूल
हीटिंग
और
वेंटिंग
सिस्टम
लगे
हैं
उन्होंने
चेताया
कि
यह
महज
ब्रिटेन
तक
सीमित
नहीं
रहेगा,
बल्कि
यह
दूतावास
यूरोप
के
लिए
एक
चीनी
खुफिया
केंद्र
के
रूप
में
काम
कर
सकता
है।
डराने-धमकाने
का
केंद्र
बनने
का
खतरा
दूतावास
के
विशाल
आकार
को
लेकर
भी
चिंता
जताई
गई
है।
प्रोफेसर
ग्लीस
ने
आशंका
व्यक्त
की
कि
इसका
इस्तेमाल
आलोचकों
को
डराने,
दबाव
बनाने
या
हिरासत
में
लेने
के
लिए
किया
जा
सकता
है।
उन्होंने
2022
में
मैनचेस्टर
स्थित
चीनी
वाणिज्य
दूतावास
में
हांगकांग
समर्थक
प्रदर्शनकारी
पर
हुए
हमले
का
हवाला
दिया।
व्हाइट
हाउस
की
चिंता,
वॉशिंगटन
अलर्ट
एक
अमेरिकी
अधिकारी
के
हवाले
से
दावा
किया
गया
है
कि
व्हाइट
हाउस
इस
दूतावास
को
मंजूरी
दिए
जाने
को
लेकर
“बेहद
चिंतित”
है।
अमेरिका
को
डर
है
कि
इससे
न
सिर्फ
ब्रिटेन
बल्कि
UK-US
इंटेलिजेंस
साझेदारी
और
साझा
संचार
नेटवर्क
की
सुरक्षा
भी
खतरे
में
पड़
सकती
है।
ब्रिटेन
में
राजनीतिक
भूचाल
- लंदन
में
इस
दूतावास
के
खिलाफ
पहले
से
ही
भारी
विरोध
चल
रहा
है। - टावर
हैमलेट्स
काउंसिल
ने
2022
में
इस
योजना
को
खारिज
कर
दिया
था। - स्थानीय
निवासियों
और
सांसदों
ने
ट्रैफिक,
सुरक्षा
और
जासूसी
को
लेकर
कड़ी
आपत्तियां
जताई
हैं। - हालांकि,
लेबर
सरकार
2025
में
इसे
“राष्ट्रीय
महत्व
का
प्रोजेक्ट”
बताकर
मंजूरी
देने
पर
विचार
कर
रही
है।
संसद
में
चीन
पर
तीखा
हमला
मंगलवार
को
ब्रिटिश
संसद
में
यह
मुद्दा
गरमाया।
लेबर
सांसद
सारा
चैंपियन
ने
चीन
को
खुलकर
“दुश्मन
देश”
बताया।
उन्होंने
कहा,
“मेरी
हर
सुरक्षा
ब्रीफिंग
में
चीन
को
ब्रिटेन
के
लिए
खतरा
बताया
गया
है।”
उन्होंने
चीन
पर
हांगकांग
और
ताइवान
में
लोगों
को
डराने
और
UK
में
भी
दबाव
की
राजनीति
करने
का
आरोप
लगाया।
चीन
ने
साधी
चुप्पी
चीन
के
सरकारी
अख़बार
ग्लोबल
टाइम्स
ने
इन
रिपोर्ट्स
को
प्रधानमंत्री
कीर
स्टारमर
की
चीन
यात्रा
से
पहले
राजनीतिक
दबाव
बनाने
की
कोशिश
बताया
है।
हालांकि,
208
गुप्त
कमरों
और
सीक्रेट
रूम
के
आरोपों
पर
चीनी
सरकार
ने
अब
तक
न
कोई
खंडन
किया
है,
न
कोई
आधिकारिक
बयान
दिया
है।
कीर
स्टारमर
की
चीन
यात्रा
से
पहले
बढ़ा
सस्पेंस
खास
बात
यह
है
कि
यह
पूरा
विवाद
ऐसे
समय
पर
सामने
आया
है,
जब
ब्रिटिश
प्रधानमंत्री
कीर
स्टारमर
इसी
महीने
चीन
जाने
वाले
हैं
और
राष्ट्रपति
शी
जिनपिंग
से
मुलाकात
प्रस्तावित
है।
ऐसे
में
सवाल
उठ
रहा
है-
क्या
ब्रिटेन
सुरक्षा
चिंताओं
को
नज़रअंदाज़
कर
चीन
को
‘मेगा
दूतावास’
की
मंजूरी
देगा,
या
फिर
अमेरिका
और
संसद
के
दबाव
में
कदम
पीछे
खींचेगा?

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