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oi-Siddharth Purohit
Epstein Files: ब्रिटेन के अख़बार द टाइम्स में छपे एक लेख ने एक बार फिर जेफ्री एपस्टीन (Jeffrey Epstein) को लेकर पुराने और विवादित सवाल को चर्चा में ला दिया है। आर्टिकल का टाइटल था- “क्या जेफ्री एपस्टीन इजरायल के लिए एक जासूस था? मोसाद पर पूर्व CIA एजेंट के साथ बहस”। तब से ही यह आर्टिकल पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया है। कुख्यात यौन अपराधी और फाइनेंसर जेफ्री एपस्टीन का इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद से कोई गुप्त संबंध था, या यह सिर्फ साजिश के सिद्धांत हैं, इसी बात को इस रिपोर्ट में जानने की कोशिश की गई है।
फरवरी 2026 में जारी हुए लाखों दस्तावेज़
फरवरी 2026 में अमेरिका की FBI और न्याय विभाग (DOJ) द्वारा लाखों फाइलें सार्वजनिक किए जाने के बाद यह मुद्दा फिर गरमा गया। इन दस्तावेज़ों में कई पुराने बयान, ईमेल और खुफिया नोट्स शामिल थे, जिनके आधार पर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में एपस्टीन को लेकर नई अटकलें शुरू हो गईं।

“एपस्टीन इजरायल का जासूस था”
इन फाइलों में एक Confidential Human Source (CHS) यानी गोपनीय मानव सूत्र की गवाही भी शामिल है। इस मुखबिर का दावा था कि उसे पूरा भरोसा था कि जेफ्री एपस्टीन एक इजरायली जासूस था। सूत्र के मुताबिक, मशहूर अमेरिकी वकील एलन डर्शोविट्ज़ ने एक अमेरिकी अटॉर्नी को बताया था कि एपस्टीन “अमेरिकी और दूसरी एसोसिएटेड सहयोगी खुफिया एजेंसियों दोनों से जुड़ा हुआ था।”
“इजरायली प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में ट्रेनिंग”
इसी मुखबिर ने यह भी दावा किया कि एपस्टीन, इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री एहुद बराक के बेहद करीबी था। आरोप लगाया गया कि एपस्टीन को “उनके गाइडेंसे में एक जासूस के रूप में ट्रेनिंग दी गई थी।” यह भी कहा गया कि जब-जब एपस्टीन और एलन डर्शोविट्ज़ के बीच फोन कॉल होते थे, उसके बाद मोसाद, डर्शोविट्ज़ से संपर्क कर “डिब्रीफ” यानी जानकारी हासिल करता था।
बड़े आरोप, लेकिन सबूत नदारद
हालांकि, द टाइम्स की रिपोर्ट साफ कहती है कि इन विस्फोटक आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं। FBI रिकॉर्ड्स में मोसाद का ज़िक्र सिर्फ उन न्यूज़ आर्टिकल्स तक सीमित है, जो एपस्टीन को ईमेल के ज़रिए भेजे गए थे, या फिर थर्ड पार्टी क्वेरीजे के रूप में दर्ज हैं।
खुद एपस्टीन ने किया था इनकार
जेफ्री एपस्टीन ने 2018 में एहुद बराक को भेजे एक ईमेल में साफ लिखा था: “आपको यह स्पष्ट करना चाहिए कि मैं मोसाद के लिए काम नहीं करता।” दिलचस्प बात यह है कि इस लाइन के साथ एपस्टीन ने एक स्माइली फेस (🙂 ) भी लगाया था, जिसे कई लोग गंभीर इनकार के बजाय हल्के अंदाज़ में लिया गया जवाब मानते हैं।
इजरायली नेताओं ने किया खंडन
इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री नफ़्ताली बेनेट और मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, दोनों ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। नेतन्याहू ने टिप्पणी करते हुए कहा कि एपस्टीन का एहुद बराक से संबंध होना ही इस बात का संकेत है कि वह किसी भी तरह से इजरायल का एजेंट नहीं था, क्योंकि बराक उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं।
‘पेडोफिलिक ब्लैकमेल रिंग’ थ्योरी
रिपोर्ट में अमेरिकी टीवी होस्ट टकर कार्लसन जैसे लोगों द्वारा फैलाए गए उस सिद्धांत की भी चर्चा की गई है, जिसमें कहा जाता है कि एपस्टीन एक ‘पेडोफिलिक ब्लैकमेल रिंग’ चला रहा था। इस थ्योरी के मुताबिक, एपस्टीन ताकतवर लोगों को फंसाकर विदेशी खुफिया एजेंसियों के लिए ब्लैकमेल करता था।
FBI को नहीं मिले ऑपरेशन के सबूत
नवीनतम दस्तावेज़ों के अनुसार, FBI को बहुत ही कम ऐसे सबूत मिले हैं, जो यह साबित करें कि एपस्टीन किसी विदेशी सरकार या मोसाद की ओर से कोई औपचारिक यौन-तस्करी या ब्लैकमेल ऑपरेशन चला रहा था। जांच एजेंसियों का कहना है कि ज्यादातर दावे अनुमान और अटकलों पर आधारित हैं।
अफवाहों को यहां से मिली हवा
इस पूरी ‘खुफिया साजिश’ की जड़ें काफी हद तक एपस्टीन के रॉबर्ट मैक्सवेल से रिश्तों में खोजी जाती हैं। रॉबर्ट मैक्सवेल, घिसलेन मैक्सवेल (एपस्टीन की गर्लफ्रेंड) के पिता थे और उनके मोसाद से कथित संबंधों को लेकर दशकों से अफवाहें चलती रही हैं। इससे एपस्टीन-मोसाद थ्योरी को और हवा मिली।
शक बहुत पर सबूत नहीं
आखिर में द टाइम्स इस नतीजे पर पहुंचता है कि भले ही जेफ्री एपस्टीन हाई-प्रोफाइल इजरायली नेताओं और खुफिया दुनिया से जुड़े लोगों के आसपास रहा हो, लेकिन अमेरिकी सरकार द्वारा जारी “दस्तावेज़ों का अंबार” यह साबित नहीं कर पाया कि वह मोसाद का एजेंट था। ज्यादातर आरोप गुमनाम मुखबिरों के संदेह और साजिश सिद्धांतों पर टिके हैं, न कि ठोस दस्तावेज़ी सबूतों पर।
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