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Ajab Gajab: जिस जगह हुआ था भयानक हादसा, वहां रहस्यमय तरीके से नीले पड़ने लगे कुत्ते, कर्मचारियों के उड़े होश

यहां अचानक कुत्ते पड़ने लगे नीलेImage Credit source: Pixabay/Jam Press/@dogsofchernobyl

दुनिया में ऐसी कई जगहें हैं, जहां जाना तो छोड़िए, उनका नाम सुनते ही शरीर में सिहरन पैदा हो जाती है. चेर्नोबिल भी ऐसी ही एक जगह है, जहां आज से करीब 39 साल पहले एक ऐसा भयानक हादसा हुआ था, जिसकी वजह से पूरा का पूरा शहर तबाह हो गया. अब इतने साल बीत गए हैं, लेकिन ये जगह आज भी उतनी ही डरावनी है कि कोई जाने की भी नहीं सोचता. अब ये जगह एक अजीबोगरीब वजह से अचानक चर्चा में आ गई है. यहां कुत्ते रहस्यमय तरीके से अचानक नीले पड़ने लगे हैं, जिससे उनकी देखभाल करने वाले कर्मचारी हैरान हैं.

दरअसल, चेर्नोबिल परमाणु ऊर्जा संयंत्र के पास कई ऐसे कुत्ते दिखाई दिए हैं, जो नीले पड़ गए हैं. न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, खतरनाक दिखने वाले ये कुत्ते, जो लगभग 39 साल पहले परमाणु आपदा के बाद छोड़े गए पालतू जानवरों के वंशज हैं, इस महीने तबाह हो चुके परमाणु ऊर्जा संयंत्र के आसपास घूमते पाए गए हैं. ये चौंका देने वाली जानकारी गैर-लाभकारी क्लीन फ्यूचर्स फंड से संबद्ध संस्था डॉग्स ऑफ चेर्नोबिल ने दी है, जो वहां कुत्तों की देखभाल करती है. संस्था ने इंस्टाग्राम पर शेयर किए एक पोस्ट में कहा, ‘हम अभी नसबंदी के लिए कुत्तों को पकड़ रहे हैं और हमें तीन ऐसे कुत्ते मिले जो पूरी तरह से नीले थे. हमें ठीक से पता नहीं है कि क्या हो रहा है’.

रहस्यमय हादसे की वजह पता नहीं

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्थानीय लोगों ने बताया कि एक हफ्ते पहले तक कुत्तों का फर सामान्य था, लेकिन अब नीले हो गए हैं. संस्था के प्रवक्ता ने कहा, ‘हमें कारण नहीं पता है और हम उन्हें पकड़ने का प्रयास कर रहे हैं ताकि पता चल सके कि क्या हो रहा है. सबसे अधिक संभावना है कि वो किसी प्रकार के केमिकल में प्रवेश कर रहे हैं’. संगठन ने कहा कि हालांकि वो नीले हैं, लेकिन वो ‘बहुत एक्टिव और स्वस्थ’ लग रहे हैं.

इतिहास का सबसे भयानक परमाणु आपदा

साल 2017 में शुरू हुआ डॉग्स ऑफ चेर्नोबिल हर साल 18 वर्ग मील के निषिद्ध क्षेत्र में रहने वाले अनुमानित 700 कुत्तों को मेडिकल केयर और भोजन देता है. बताया जाता है कि ये कुत्ते उन पालतू कुत्तों के वंशज हैं, जिन्हें 1986 में चेर्नोबिल परमाणु ऊर्जा संयंत्र के रिएक्टर में विस्फोट के बाद लोगों को वहां से निकलने के लिए मजबूर होने पर छोड़ दिया गया था. यह घटना इतिहास की सबसे बुरी परमाणु आपदाओं में से एक थी. इस भयानक हादसे में ज्यादा लोगों की तो मौत नहीं हुई थी, लेकिन उसका असर इतना भयानक था कि आज भी लोग वहां रहने से डरते हैं.

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