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Bangladesh Election: 12 फरवरी को जनता लोकतंत्र चुनेगी या कट्टरपंथ? कैसे होता है चुनाव, प्‍वाइंट में समझें | Bangladesh Election 2026: Will voters elect a new government on February 12? Election process, understand in points

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oi-Bhavna Pandey

Bangladesh Election: हिंसा, विद्रोह और सत्ता परिवर्तन के 18 महीने बाद बांग्लादेश फिर एक ऐतिहासिक दहलीज पर खड़ा है। जुलाई-अगस्त 2024 की ‘छात्र क्रांति’ ने जिस राजनीतिक भूचाल को जन्म दिया था, उसका निर्णायक पड़ाव अब 12 फरवरी के चुनाव में दिखेगा। यह सिर्फ सत्ता चुनने का दिन नहीं है, बल्कि यह तय करने का क्षण है कि बांग्लादेश लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती की ओर लौटेगा या कट्टरपंथी राजनीति उसकी दिशा तय करेगी। भारत के इस अहम पड़ोसी देश में हो रहा यह चुनाव पूरे दक्षिण एशिया के लिए भी मायने रखता है।

बांग्लादेश का चुनाव क्यों अहम हैं?

यह 13वां संसदीय चुनाव है, लेकिन इसकी अहमियत इसलिए अधिक है क्योंकि यह शेख हसीना की 15 साल पुरानी सरकार के पतन के बाद पहला आम चुनाव है। अगस्त 2024 में छात्रों के नेतृत्व वाले आंदोलन ने सत्ता परिवर्तन की पटकथा लिखी थी। व्यापक हिंसा में 1,400 से अधिक लोगों की मौत हुई और देश महीनों तक अस्थिरता से जूझता रहा। अब यह चुनाव तय करेगा कि बांग्लादेश राजनीतिक स्थिरता की ओर लौटेगा या अस्थिरता और ध्रुवीकरण जारी रहेगा।

Bangladesh Election

बांग्लादेश में पिछले 18 महीनों में क्या-क्‍या हुआ?

अप्रैल 2024 के चुनाव के बाद हालात तेजी से बदले। अगस्त में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए और अंततः शेख हसीना को पद छोड़कर भारत जाना पड़ा। इसके बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी, जिसे विपक्ष ने “दूसरी आज़ादी” बताया।

हालांकि, इसके बाद भी राजनीतिक हिंसा, मॉब लिंचिंग और धार्मिक कट्टरता की घटनाएँ बढ़ती रहीं। ‘ऑपरेशन डेविल हंट’ जैसे अभियानों में आवामी लीग से जुड़े हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया।

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति कैसी रही?

अल्पसंख्यक समुदाय, विशेषकर हिंदू समाज, पर हिंसा की घटनाओं ने चिंता बढ़ाई है। अल्पसंख्यक संगठनों के अनुसार अगस्त 2024 से 2025 के बीच सांप्रदायिक हिंसा में कम से कम 61 हिंदुओं की मौत हुई और 2,000 से अधिक हमले दर्ज किए गए। महिलाओं और धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर भी दबाव बढ़ा है।

बांग्लादेश चुनाव में मुख्य मुकाबला किसके बीच है?

इस बार मुख्य मुकाबला बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन के बीच है।

BNP की अगुवाई तारिक रहमान कर रहे हैं, जो 17 साल के निर्वासन के बाद लौटे हैं। वे लोकतांत्रिक संस्थाओं की बहाली और अर्थव्यवस्था सुधारने का वादा कर रहे हैं।

दूसरी ओर, जमात-ए-इस्लामी, जिस पर हसीना शासन में प्रतिबंध था, अब नए गठबंधन के साथ मजबूत वापसी की कोशिश में है। छात्र आंदोलन से उभरी नेशनल सिटीजन पार्टी भी इस गठबंधन का हिस्सा है।

बांग्लादेश में कितने मतदाता और उम्मीदवार मैदान में हैं?

  • कुल मतदाता: लगभग 12.7 करोड़
  • कुल उम्मीदवार: 1,755 (50 राजनीतिक दलों से)
  • निर्दलीय प्रत्याशी: 273
  • प्रवासी मतदाता: करीब 8 लाख (पहली बार मतदान का अवसर)
  • BNP ने सबसे अधिक 291 उम्मीदवार उतारे हैं, जिनमें 83 महिलाएं शामिल हैं।

बांग्लादेश में सुरक्षा के क्‍या किए गए हैं इंतजाम?

देशभर में लगभग 10 लाख सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है।
42,659 मतदान केंद्रों में से करीब 24,000 को संवेदनशील या मध्यम जोखिम वाला माना गया है।

पहली बार ड्रोन और 25,000 बॉडी-वॉर्न कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। 90% से अधिक केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। 500 विदेशी पर्यवेक्षक चुनाव की निगरानी करेंगे।

भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में चुनाव कैसे होता है?

बांग्लादेश की चुनाव प्रणाली भारत से काफी मिलती-जुलता है, लेकिन कुछ खास अंतर भी हैं लेकिनयहां बैलेट पेपर से मतदान होता है भारत के जैसे वहां ईवीएम मशीन का उपयोग वोटिंग के लिए नहीं होता है।

बांग्लादेश का संसदीय ढांचा कैसा है?

  • कुल 350 सांसद
  • 300 सीधे जनता द्वारा चुने जाते हैं
  • 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित

बांग्लादेश में कितने साल का होता है कार्यकाल?

  • ‘फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट’ प्रणाली लागू
  • जिस उम्मीदवार को सबसे अधिक वोट मिलते हैं, वही विजेता होता है
  • संसद का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है

बांग्‍लादेश के चुनाव में हर वोटर क्‍यों दो वोट डालेगा?

इस बार बांग्लादेश में प्रत्येक मतदाता को दो वोट डालने होंगे, जो एक अनूठी व्यवस्था है। यह पहली बार है जब एक ही दिन दो अलग-अलग मतदान हो रहे हैं। पहला वोट संसदीय चुनाव के लिए होगा, जिसे सफेद बैलेट पेपर पर डाला जाएगा।

जबकि दूसरा वोट संवैधानिक जनमत संग्रह का होगा। 84-सूत्रीय संवैधानिक सुधार पैकेज पर जनमत संग्रह के लिए गुलाबी बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया जाएगा। यह जनमत संग्रह छात्र आंदोलन के बाद बने सुधारों के पैकेज पर आधारित है, जहां मतदाताओं को ‘हाँ’ या ‘नहीं’ का विकल्प चुनना होगा। यह पहली बार है जब संसदीय चुनाव और संवैधानिक जनमत संग्रह एक साथ हो रहे हैं।

बांग्लादेश का चुनाव भारत के लिए भी क्‍यों है अहम?

यह चुनाव केवल सरकार बदलने का अवसर नहीं है। यह बांग्लादेश के लोकतांत्रिक ढांचे, धार्मिक सहिष्णुता, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय संतुलन की कसौटी है भारत के लिए भी यह चुनाव रणनीतिक रूप से अहम है-चाहे वह सीमा सुरक्षा का सवाल हो, व्यापारिक रिश्ते हों या पूर्वोत्तर भारत की स्थिरता। अब फैसला 12.7 करोड़ मतदाताओं के हाथ में है-क्या वे स्थिर लोकतंत्र चुनेंगे या एक नया राजनीतिक प्रयोग?

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