International
oi-Siddharth Purohit
Iran
Vs
America:
सऊदी
अरब
ने
अमेरिका
को
स्पष्ट
रूप
से
बता
दिया
है
कि
वह
ईरान
के
खिलाफ
किसी
भी
सैन्य
कार्रवाई
के
लिए
अपने
हवाई
क्षेत्र
का
इस्तेमाल
करने
की
परमीशन
नहीं
देगा।
यह
फैसला
ऐसे
समय
लिया
गया
है
जब
खाड़ी
क्षेत्र
के
देश
किसी
भी
बड़े
युद्ध
को
रोकने
के
लिए
कूटनीतिक
कोशिशें
तेज
कर
रहे
हैं।
सऊदी
अरब
का
यह
रुख
बताता
है
कि
वह
खुद
को
किसी
नए
क्षेत्रीय
टकराव
से
दूर
रखना
चाहता
है।
क्यों
किया
ट्रंप
को
मना?
इस
फैसले
के
पीछे
खाड़ी
देशों
की
बढ़ती
चिंता
है,
जिसमें
आर्थिक
नुकसान,
सुरक्षा
खतरे
और
राजनीतिक
अस्थिरता
शामिल
हैं।
खास
तौर
पर
स्ट्रेट
ऑफ
होर्मुज
(जलडमरूमध्य)
को
लेकर
डर
है,
क्योंकि
यही
रास्ता
खाड़ी
से
दुनिया
तक
तेल
सप्लाई
का
सबसे
बड़ा
जरिया
है।
अगर
यहां
तनाव
बढ़ता
है,
तो
इसका
असर
सीधे
वैश्विक
अर्थव्यवस्था
पर
पड़ेगा।

खामेनेई
की
हत्या
होती
है
तो…?
द
वॉल
स्ट्रीट
जर्नल
की
रिपोर्ट
के
मुताबिक,
सऊदी
अरब,
कतर
और
ओमान
मिलकर
व्हाइट
हाउस
को
ईरान
पर
हमला
न
करने
के
लिए
एक
शांत
लेकिन
मजबूत
पहल
चला
रहे
हैं।
रियाद
को
डर
है
कि
अगर
ईरान
के
सर्वोच्च
नेता
अली
खामेनेई
की
हत्या
जैसी
कोई
बड़ी
घटना
होती
है,
तो
इससे
न
सिर्फ
क्षेत्र
में
युद्ध
भड़केगा
बल्कि
सऊदी
अरब
की
अर्थव्यवस्था
और
आंतरिक
स्थिरता
भी
खतरे
में
पड़
जाएगी।
ईरान
नहीं
इस
बात
की
चिंता
खाड़ी
देशों
के
नेताओं
का
मानना
है
कि
किसी
भी
सैन्य
टकराव
के
नतीजे
उनके
लिए
बेहद
अनिश्चित
और
खतरनाक
हो
सकते
हैं।
इसलिए
इस
पूरे
क्षेत्र
में
संयम
को
सबसे
बड़ी
रणनीतिक
प्राथमिकता
माना
जा
रहा
है।
साथ
ही,
सभी
देश
वैश्विक
ऊर्जा
आपूर्ति
पर
पड़ने
वाले
असर
को
लेकर
भी
गंभीर
रूप
से
चिंतित
हैं।
क्या
है
स्ट्रेट
ऑफ
होर्मूज?
ईरान
पर
हमला
होने
की
स्थिति
में
स्ट्रेट
ऑफ
होर्मूज
से
गुजरने
वाले
तेल
टैंकरों
की
आवाजाही
बाधित
हो
सकती
है।
यह
समुद्री
रास्ता
दुनिया
की
लगभग
20
प्रतिशत
तेल
शिपिंग
को
संभालता
है।
अधिकारियों
को
डर
है
कि
युद्ध
से
ऊर्जा
बाजार
अस्थिर
होंगे,
शिपिंग
बीमा
महंगा
होगा
और
पूरे
खाड़ी
क्षेत्र
का
अहम
बुनियादी
ढांचा
खतरे
में
आ
जाएगा।
एक्शन
के
लिए
तैयार
रहें-
ट्रंप
स्थिति
तब
और
गंभीर
हो
गई
जब
अमेरिका
ने
कथित
तौर
पर
अपने
खाड़ी
साझेदारों
से
कहा
कि
वे
संभावित
सैन्य
तनाव
के
लिए
तैयार
रहें।
इस
संदेश
से
खाड़ी
देशों
की
राजधानियों
में
चिंता
बढ़
गई।
ऊर्जा
सुरक्षा,
अहम
ठिकानों
की
रक्षा
और
अपने-अपने
देशों
पर
युद्ध
के
दूरगामी
असर
को
लेकर
डर
और
गहरा
गया।
तेल
बाजार
और
अमेरिकी
अर्थव्यवस्था
पर
असर
की
चेतावनी
सऊदी
अरब,
कतर
और
ओमान
ने
वाशिंगटन
को
यह
भी
समझाया
है
कि
ईरानी
शासन
को
गिराने
की
कोई
भी
कोशिश
तेल
बाजारों
को
हिला
देगी।
इन
देशों
का
कहना
है
कि
इसका
नुकसान
सिर्फ
खाड़ी
तक
सीमित
नहीं
रहेगा,
बल्कि
अंत
में
अमेरिकी
अर्थव्यवस्था
को
भी
इसकी
कीमत
चुकानी
पड़ेगी।
खामेनेई
से
क्या
बोला
सऊदी?
द
वॉल
स्ट्रीट
जर्नल
के
मुताबिक,
सऊदी
अधिकारियों
ने
बताया
है
कि
रियाद
ने
तेहरान
को
साफ
संदेश
दिया
है
कि
वह
“किसी
भी
संभावित
संघर्ष
से
दूर
रहेगा”
और
“अमेरिका
को
अपना
हवाई
क्षेत्र
इस्तेमाल
नहीं
करने
देगा।”
यह
संकेत
है
कि
सऊदी
अरब
अमेरिका
के
नेतृत्व
वाले
किसी
भी
सैन्य
टकराव
में
फंसना
नहीं
चाहता।
सत्ता
परिवर्तन
के
खिलाफ
खाड़ी
देशों
की
चेतावनी
खाड़ी
देशों
ने
अमेरिका
को
ईरान
में
सत्ता
परिवर्तन
की
कोशिशों
के
खिलाफ
भी
आगाह
किया
है।
सऊदी
अरब,
संयुक्त
अरब
अमीरात
और
कतर
का
कहना
है
कि
ईरान
पर
हमला
होने
पर
खाड़ी
के
ऊर्जा
ढांचे,
शिपिंग
रूट्स
और
वहां
मौजूद
अमेरिकी
सैन्य
ठिकानों
पर
जवाबी
कार्रवाई
हो
सकती
है।
इससे
पूरे
क्षेत्र
में
बड़े
और
खतरनाक
युद्ध
का
जोखिम
कई
गुना
बढ़
जाएगा।
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