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oi-Siddharth Purohit
Israel-Gaza War: एक हालिया इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इज़राइल ने गाजा पट्टी में अपने सैन्य अभियानों के दौरान शक्तिशाली वैक्यूम और थर्मोबेरिक बमों का इस्तेमाल किया। इन बमों से इतनी ज्यादा गर्मी पैदा हुई कि कई शवों भाप बनकर गायब हो गए। अक्टूबर 2023 से जारी इस संघर्ष में पहले ही भारी संख्या में हताहत और बड़े पैमाने पर तबाही हो चुकी है।
Fuel-Air Explosive पर फोकस
इस जांच को कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया कंपनियों ने कवर किया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि ईंधन-हवा विस्फोटक (fuel-air explosive) गुणों वाले कुछ हथियार बहुत अधिक तापमान और बेहद तेज दबाव तरंगें पैदा कर सकते हैं। इनकी वजह से हमले की जगह पर कई बार कोई शव नहीं मिलता। सिर्फ छोटे-छोटे टुकड़े या थोड़े-बहुत खून के छींटे ही मिलते हैं। इसलिए इन बमों का इस्तेमाल पूरी तरह से बैन किया गया है।

आखिर क्या होते हैं वैक्यूम या थर्मोबेरिक बम?
वैक्यूम बम, जिन्हें थर्मोबेरिक या एयरोसोल हथियार भी कहा जाता है, दो चरणों में काम करते हैं। पहले चरण में ये हवा में ईंधन या महीन कणों का एक बड़ा बादल छोड़ते हैं। दूसरे चरण में उस बादल को प्रज्वलित किया जाता है। इससे एक विशाल आग का गोला (फायरबॉल) बनता है और एक वैक्यूम प्रभाव पैदा होता है, जो आसपास की हवा को अपनी ओर खींचता है।
3,500 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है तापमान
विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे विस्फोट से 3,500 डिग्री सेल्सियस तक तापमान पैदा हो सकता है। यह बाकी सभी बमों से कहीं ज्यादा गर्म होता है। जिससे हड्डी और मांस से बना इंसान भी कुछ सेकेंड्स में गायब हो जाता है। इन बमों में अक्सर एल्यूमीनियम, मैग्नीशियम और टाइटेनियम जैसी धातुएं मिलाई जाती हैं, ताकि गर्मी और दबाव का असर और बढ़ सके। ऐसी स्थिति में मानव शरीर और इमारतें इस तरह नष्ट हो सकती हैं कि पहचान या दफनाने के लिए कुछ भी बाकी न बचे।
स्कूलों और घनी आबादी वाले आश्रयों में इस्तेमाल का संकेत
जांच में यह भी संकेत मिला है कि इन हथियारों का इस्तेमाल स्कूलों और घनी आबादी वाले ठिकानों पर किया गया। गाजा सिविल डिफेंस के दस्तावेजों के अनुसार, संघर्ष की शुरुआत के बाद से कम से कम 2,800 लोगों को ‘वाष्पित’ (evaporated) कैटेगरी में रखा गया है। ये वो लोग हैं जो वैक्यूम बम के इस्तेमाल के बाद गायब हो गए।
‘इवेपोरेट’ कैटेगरी का क्या मतलब है?
वाष्पित’ का मतलब यह है कि मलबे और मुर्दाघरों की गहन तलाशी के बावजूद कोई पूरा शव नहीं मिला। सिर्फ खून के छींटे या शरीर के छोटे जैविक अवशेष ही पाए गए। सिविल डिफेंस के प्रवक्ता महमूद बसाल ने बताया कि बचाव दल ‘निष्कासन विधि’ (method of elimination) अपनाते हैं। अगर परिवार पुष्टि करता है कि व्यक्ति हमले से पहले इमारत में था, लेकिन बाद में शव नहीं मिलता, तो उसे ‘वाष्पित’ माना जाता है।
अल-ताबीन स्कूल का दर्दनाक उदाहरण
रिपोर्ट में गाजा शहर के अल-ताबीन स्कूल पर हुए हमले का जिक्र है। वहां कई परिवार अपने प्रियजनों की तलाश में पहुंचे, लेकिन दफनाने के लिए कोई शव नहीं मिला। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के महानिदेशक डॉ. मुनीर अल-बुर्श ने बताया कि मानव शरीर मुख्य रूप से पानी से बना होता है।
बंकर बस्टर और स्मॉल डायमीटर बम का जिक्र
इसके अलावा बीएलयू-109 बंकर बस्टर का नाम भी सामने आया है, जिसे मजबूत और ताकतवर बिलडिंग्स में घुसकर अंदर विस्फोट करने के लिए डिजाइन किया गया है। वहीं, जीबीयू-39 स्मॉल डायमीटर बम एक सटीक-निर्देशित बम है, जो इमारतों के अंदर तीव्र गर्मी फैला सकता है। गाजा में सिविल डिफेंस टीमों ने कथित तौर पर उन स्थानों से जीबीयू-39 के टुकड़े बरामद किए, जहां हमलों के बाद लोग लापता हो गए थे।
अमेरिकी हथियारों का भरपूर इस्तेमाल
रिपोर्ट में गाजा में इस्तेमाल किए गए कुछ खास हथियारों का भी जिक्र है, जिनकी आपूर्ति कथित तौर पर संयुक्त राज्य अमेरिका करता है। इनमें एमके-84 ‘हैमर’ बम शामिल है। यह ट्राइटोनल विस्फोटक मिश्रण से भरा एक बड़ा बम है, जो बहुत उच्च तापमान पैदा कर सकता है।
ICJ और ICC में भी गरमाया मुद्दा
इन दावों के बाद अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बहस तेज हो गई है। अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) और अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने इस क्षेत्र में हुई कार्रवाइयों को लेकर निर्देश जारी किए हैं। इनमें इजरायली अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट और नरसंहार के कथित कृत्यों से जुड़े अंतरिम उपाय शामिल हैं।
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