International
oi-Siddharth Purohit
Mother
Of
All
Deal:
दावोस(Davos)
में
हुए
वर्ल्ड
इकोनॉमिक
फोरम
(WEF)
के
दौरान
यूरोपियन
यूनियन
की
अध्यक्ष
उर्सुला
वॉन
डेर
लेयन
(Ursula
Von
Der
Leyen)
ने
भारत
को
यूरोपीय
स्वतंत्रता
और
रणनीतिक
सोच
के
केंद्र
में
रखा।
उन्होंने
साफ
संकेत
दिया
कि
यूरोप
अब
भारत
के
साथ
रिश्तों
को
नई
ऊंचाई
पर
ले
जाना
चाहता
है।
इसी
मकसद
से
वह
नई
दिल्ली
आ
रही
हैं,
ताकि
भारत-यूरोपियन
यूनियन
संबंधों
को
मज़बूत
किया
जा
सके
और
दशकों
से
अटके
विशाल
मुक्त
व्यापार
समझौते
(FTA)
की
बाधाओं
को
दूर
किया
जा
सके।
“सभी
समझौतों
की
जननी”
क्यों
है
यह
FTA
उर्सुला
वॉन
डेर
लेयन
इस
FTA
को
“सभी
समझौतों
की
जननी”
कहती
हैं।
उनका
मानना
है
कि
प्रधानमंत्री
नरेंद्र
मोदी
को
इस
सप्ताह
उनकी
भारत
यात्रा
के
दौरान
इस
समझौते
को
अंतिम
रूप
दे
देना
चाहिए।
यह
समझौता
सिर्फ
भारत
या
यूरोप
के
लिए
नहीं,
बल्कि
अमेरिकी
राष्ट्रपति
डोनाल्ड
ट्रंप
की
नीतियों
पर
इसके
रणनीतिक
असर
के
कारण
भी
बेहद
अहम
है।

यूरोप
क्यों
है
बेचैन?
भारत
से
क्या
उम्मीद?
यूरोपियन
यूनियन
इस
समय
कई
दबावों
से
घिरा
हुआ
है।
रूस
की
आक्रामकता,
चीन
का
बढ़ता
दबाव
और
यूरोप
की
अपनी
आंतरिक
कमजोरियां
उसे
असुरक्षित
महसूस
करा
रही
हैं।
इसके
अलावा,
अमेरिका
जैसे
पारंपरिक
सहयोगी
पर
भरोसा
भी
अब
कमजोर
पड़
रहा
है।
वॉशिंगटन
से
आ
रही
धमकियों
ने
यूरोप
की
चिंता
को
डर
में
बदल
दिया
है।
भारत:
स्थिरता,
भरोसा
और
बड़ा
बाज़ार
इसके
उलट,
भारत
यूरोप
को
स्थिरता
का
प्रतीक
दिखता
है।
भारत
एक
तेज़ी
से
बढ़ता
हुआ
बड़ा
बाज़ार
है
और
किसी
के
लिए
खतरा
नहीं
है।
भले
ही
जलवायु
नीति
या
यूक्रेन
युद्ध
जैसे
मुद्दों
पर
भारत
और
यूरोप
की
राय
पूरी
तरह
एक
जैसी
न
हो,
लेकिन
भारत
कभी
यूरोप
को
डराने,
दबाने
या
नीचा
दिखाने
की
कोशिश
नहीं
करता।
गणतंत्र
दिवस
और
बड़ा
मौका
गणतंत्र
दिवस
पर
मुख्य
अतिथि
के
रूप
में
वॉन
डेर
लेयन
का
भारत
आना
सिर्फ
एक
औपचारिक
यात्रा
नहीं
है।
प्रधानमंत्री
मोदी
उनका
भव्य
स्वागत
तो
करेंगे
ही,
लेकिन
साथ
ही
उन्हें
भारत-EU
FTA
से
जुड़ी
औपचारिक
और
राजनीतिक
बाधाओं
को
भी
जल्द
खत्म
करना
चाहिए।
क्यों
अब
तक
रुकी
रही
FTA
बातचीत?
इस
FTA
की
बातचीत
2025
के
अंत
तक
पूरी
होनी
थी,
लेकिन
पिछले
कुछ
महीनों
से
नई
दिल्ली
की
नजर
व्हाइट
हाउस
पर
टिकी
थी।
भारत
को
डर
था
कि
अगर
वह
यूरोपियन
यूनियन
को
ज्यादा
रियायतें
देता
है,
तो
‘अमेरिका
फर्स्ट’
सोच
रखने
वाले
लोग
वही
मांगें
भारत
से
भी
करने
लगेंगे।
उस
वक्त
अमेरिका
के
साथ
रिश्ते
संभालना
ज्यादा
जरूरी
लग
रहा
था।
अमेरिका
के
साथ
समझौते
की
उम्मीदें
टूटीं
अब
हालात
बदल
चुके
हैं।
अमेरिका
के
साथ
किसी
भरोसेमंद
समझौते
की
संभावना
कमजोर
पड़
गई
है।
ट्रंप
चाहते
हैं
कि
भारत
उनके
सामने
झुके,
उन्हें
न
सिर्फ
व्यापार
में
बल्कि
उपमहाद्वीप
में
शांति
लाने
का
श्रेय
भी
दे।
प्रधानमंत्री
मोदी
का
राष्ट्रवादी
समर्थक
वर्ग
ऐसी
बातों
को
स्वीकार
नहीं
करेगा।
ट्रंप
की
सोच
और
भारत
की
सीमाएं
हकीकत
यह
भी
है
कि
भारत
की
कोई
भी
रियायत
ट्रंप
को
50%
टैरिफ
हटाने
या
यह
सोच
बदलने
पर
मजबूर
नहीं
कर
सकती
कि
भारत
को
“बिना
हक”
फायदा
मिल
रहा
है।
भारत-अमेरिका
रिश्तों
को
आगे
बढ़ाने
के
लिए
सिर्फ
सौदेबाज़ी
काफी
नहीं
है।
व्हाइट
हाउस
की
नाराज़गी
का
डर
भारत
को
यह
चिंता
होना
स्वाभाविक
है
कि
अगर
वह
यूरोपियन
यूनियन
के
साथ
बड़ा
व्यापार
समझौता
करता
है,
तो
व्हाइट
हाउस
की
प्रतिक्रिया
क्या
होगी।
अमेरिकी
संरक्षणवादी
सोच
यह
मानती
है
कि
जो
समझौता
उनके
साथ
नहीं
होता,
वह
उनके
खिलाफ़
होता
है।
ट्रंप
इसे
कैसे
देख
सकते
हैं
ट्रंप
इसे
खुली
चुनौती
के
तौर
पर
देख
सकते
हैं-एक
ऐसा
यूरोप
जिसे
उन्होंने
धमकाया,
वह
अब
एक
ऐसे
भारत
के
साथ
खड़ा
हो
रहा
है
जिसे
वह
घेरना
चाहते
हैं।
उनकी
प्रतिक्रिया
तेज़
और
अप्रत्याशित
हो
सकती
है।
डरने
की
नहीं,
आगे
बढ़ने
की
जरूरत
प्रधानमंत्री
मोदी
को
ट्रंप
की
संभावित
नाराज़गी
से
डरने
की
जरूरत
नहीं
है।
बल्कि
उन्हें
इसी
दबाव
की
वजह
से
इस
समझौते
को
आगे
बढ़ाना
चाहिए।
ताकत
दिखाना
ही
इस
समय
सबसे
सही
रणनीति
हो
सकती
है।
ट्रंप
और
ताकत
की
भाषा
ट्रंप
ताकत
या
कम
से
कम
उसके
प्रदर्शन
का
सम्मान
करते
हैं।
यूरोप
और
ब्राज़ील
झुकते
हैं,
लेकिन
चीन
और
रूस
नहीं।
अमेरिका
के
दबाव
में
भारत
के
पास
विकल्प
सीमित
हैं,
इसलिए
यह
समझौता
दिखाएगा
कि
भारत
झुकने
वाला
नहीं
है।
घरेलू
राजनीति
में
भी
मजबूत
संदेश
प्रधानमंत्री
मोदी
के
समर्थक
भी
मजबूत
नेतृत्व
देखना
चाहते
हैं।
भले
ही
वे
फाइटोसैनिटरी
नियमों
या
डेटा
प्राइवेसी
जैसी
तकनीकी
बातों
में
रुचि
न
लें,
लेकिन
ट्रंप
के
दबाव
के
बावजूद
यूरोप
के
साथ
खड़ा
होना
उन्हें
पसंद
आएगा।
यह
संदेश
जाएगा
कि
भारत
अपनी
शर्तों
पर
फैसले
ले
सकता
है।
समझौता
परफेक्ट
नहीं
होगा,
लेकिन
जरूरी
है
यह
प्रस्तावित
FTA
पूरी
तरह
आदर्श
नहीं
होगा।
कुछ
कृषि
उत्पाद
बाहर
रह
सकते
हैं,
भारतीय
कार
कंपनियों
को
पूरी
सुरक्षा
न
मिले,
और
यूरोपीय
श्रमिक
संगठन
श्रम
व
पर्यावरण
शर्तों
पर
चिंता
जता
सकते
हैं।
देर
हुई
तो
मौका
हाथ
से
निकल
सकता
है
लेकिन
जितनी
देर
इस
समझौते
में
होगी,
उतना
ही
बड़ा
मौका
हाथ
से
निकलने
का
खतरा
रहेगा।
जितना
ज्यादा
व्यापक
समझौता
होगा,
उतना
ही
यूरोपीय
संसद
के
कानूनी
अड़चनों
में
फंसने
का
जोखिम
बढ़ेगा,
जैसा
उसने
लैटिन
अमेरिका
डील
के
साथ
किया
था।
अमेरिका
को
भी
मिलेगा
साफ
संदेश
यूरोप
के
साथ
समझौता
अमेरिका
को
यह
साफ
संकेत
देगा
कि
भारत
के
पास
विकल्प
हैं
और
वह
उन
पर
अमल
भी
कर
सकता
है।
साथ
ही
यह
भारतीय
अर्थव्यवस्था
को
नई
दिशा
देगा,
जो
चीन
के
खिलाफ़
अमेरिका
की
व्यापार
नीतियों
की
वजह
से
प्रभावित
हो
रही
है।
अब
इतिहास
को
हकीकत
में
बदलने
का
समय
एक
दशक
से
ज्यादा
समय
से
प्रेस
रिलीज़
इस
समझौते
को
“ऐतिहासिक”
बताती
आ
रही
हैं।
अगर
यह
सच
में
ऐतिहासिक
है,
तो
अब
इसे
सिर्फ
बयान
नहीं,
बल्कि
वास्तविकता
में
बदलने
का
समय
आ
गया
है।
इस
खबर
पर
आपकी
क्या
राय
है,
हमें
कमेंट
में
बताएं।

Trump Peace Board: गाजा पीस बोर्ड में भारत क्यों नहीं हुआ शामिल? अब आई असली वजह सामने

US Tariff on India: अमेरिका का गेम प्लान फेल! भारत ने चला ऐसा दांव कि आधे टैरिफ हटाने को मजबूर हुए ट्रंप

UAE के प्रेसिंडेंट ने भारत से लौटते ही Pakistan को दिखाया ठेंगा, आखिरी मिनट में कैंसिल कर दी ये बड़ी डील

UP Gold Silver Rate Today: यूपी के बड़े शहरों में आज क्या है गोल्ड-सिल्वर का रेट? लखनऊ-अयोध्या में तेज उछाल?

Pakistan suicide Attack Today: पाकिस्तान में शांति समिति के अध्यक्ष के घर आत्मघाती हमला, 5 की मौत

Weather Delhi NCR: दिल्ली-एनसीआर में बारिश के साथ आ रहा है बड़ा खतरा! 26 जनवरी से पहले IMD ने जारी किया अलर्ट

‘ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन तैयार है-India से 3000 साल पुराना रिश्ता’, US के साथ तनाव पर Iran के 11 जवाब

Bengaluru में शुरू हुई Double Decker Bus हॉप-ऑन, हॉप-ऑफ सर्विस, लंदन-स्टाइल में शहर टूर, जानें रूट और किराया

Guwahati Ring Road Project: गुवाहाटी देगा चेन्नई को टक्कर, जानें 121 KM के मेगा प्रोजेक्ट की लागत और खासियत

Shweta Tiwari Caste: शरीर पर 2 शादियों का दर्द झेल चुकीं श्वेता तिवारी की क्या है जाति? कौन सा धर्म मानती हैं?

‘मोदी के रहते सवर्ण जाति के बच्चों को कोई भी नुकसान नहीं होगा’, UGC कानून क्या है? नियम को लेकर क्यों मचा बवाल

Shweta Tiwari दो तलाक के बाद आपत्तिजनक हालत में Salman Khan संग Honeymoon पर? चौंकाने वाला Viral Photos का सच

‘हिजाब वाली’पार्षद क्यों बन गई हिंदू संगठनों का निशाना? शिंदे ने भी लिया आड़े हाथ! जानें सहर शेख की पूरी कहानी

‘2 मर्दों ने कमर छुआ, अश्लील वीडियो बनाया’, मौनी रॉय के साथ सरेआम हुई ऐसी छेड़छाड़, जानकर हो जाएंगे सुन्न

आखिर अनुपम खेर को क्यों करनी पड़ीं दो शादियां, कौन हैं पहली पत्नी? क्या सच में बेटे सिकंदर ने पिता को जड़ा तमाचा

























