International
oi-Siddharth Purohit
Oi
Explainer:
पाकिस्तान
(Pakistan)
का
27वां
संवैधानिक
संशोधन
देश
के
नाजुक
लोकतंत्र
पर
सेना
की
पकड़
को
और
मजबूत
कर
रहा
है।
संसद
द्वारा
पारित
इस
संशोधन
ने
फील्ड
मार्शल
और
सेना
प्रमुख
सैयद
आसिम
मुनीर
को
असाधारण
शक्तियां
और
कानूनी
प्रतिरक्षा
प्रदान
की
है।
यह
स्पष्ट
दिखाता
है
कि
सेना
ने
एक
बार
फिर
नागरिक
नेतृत्व
को
मात
दे
दी
है।
लोकतांत्रिक
संस्थानों
पर
असर
यह
संशोधन
न
केवल
सरकार
बल्कि
न्यायपालिका
सहित
अन्य
लोकतांत्रिक
संस्थानों
को
कमजोर
करता
है।
यह
1973
के
संविधान
की
भावना
को
पलटने
और
शक्ति
संतुलन
को
पूरी
तरह
सशस्त्र
बलों
के
पक्ष
में
मोड़ने
की
कोशिश
है।
नागरिक
नेतृत्व
और
कमजोर
होगा,
जबकि
पहले
से
ही
शक्तिशाली
सेना
लगभग
असीमित
अधिकार
पाने
जा
रही
है।

आसिम
मुनीर
की
शक्तियों
पर
कोई
रोक
नहीं
सरकार
में
बदलाव
होने
पर
भी
आसिम
मुनीर
की
शक्तियां
प्रभावित
नहीं
होंगी।
कोई
कानून
उन्हें
चुनौती
नहीं
दे
सकता।
उन्हें
आधिकारिक
रूप
से
नौसेना
और
वायु
सेना
प्रमुखों
से
ऊपर
रखा
गया
है।
नए
सैन्य
स्ट्रक्चर
की
स्थापना
अनुच्छेद
243
में
बदलाव
के
तहत
‘चीफ
ऑफ
डिफेंस
फोर्सेज
(CDF)’
नामक
नया
सर्वोच्च
सैन्य
पद
बनाया
गया
है।
वर्तमान
सेना
प्रमुख
आसिम
मुनीर
इस
पद
को
भी
संभालेंगे।
इसके
साथ
ही
‘चेयरमैन
ज्वाइंट
चीफ्स
ऑफ
स्टाफ
कमेटी
(CJCSC)’
का
पद
समाप्त
हो
जाएगा।
27
नवंबर
2025
से
संभालेंगे
कमान
27
नवंबर
2025
को
CJCSC
की
सेवानिवृत्ति
के
बाद
मुनीर
एक
साथ
सेना
प्रमुख
और
CDF
बन
जाएंगे।
वे
सभी
सेवा
शाखाओं
की
औपचारिक
कमान
संभालेंगे।
यह
सत्ता
का
ऐसा
समेकन
है
जो
पाकिस्तान
के
इतिहास
में
पहले
कभी
नहीं
देखा
गया।
नौसेना
और
वायु
सेना
पर
आर्मी
का
कंट्रोल
यह
बदलाव
वायु
सेना
और
नौसेना
को
सेना
के
परिचालन
नियंत्रण
के
अधीन
कर
देगा।
इससे
अंतर-सेवा
मतभेद
बढ़
सकते
हैं।
संशोधन
साफ
कहता
है
कि
“आसिम
मुनीर
को
किसी
भी
कानून
से
छुआ
नहीं
जा
सकता।”
न्यूक्लियर
हथियारों
पर
लोकतंत्र
की
ढीली
पकड़
यह
संशोधन
पाकिस्तान
के
परमाणु
कमान
पर
भी
असर
डालता
है।
‘कमांडर
ऑफ
द
नेशनल
स्ट्रेटेजिक
कमांड
(CNSC)’
का
नया
पद
बनाया
जाएगा,
जो
सीधे
आसिम
मुनीर
को
रिपोर्ट
करेगा।
इससे
नेशनल
कमांड
अथॉरिटी
(NCA)
की
नागरिक
शक्ति
कमजोर
हो
जाती
है।
एनसीए
का
कमजोर
होना
पहले
NCA
के
तहत
प्रधानमंत्री
की
अध्यक्षता
में
सामूहिक
निर्णय
प्रक्रिया
होती
थी।
अब
यह
निर्णय
सेना
के
चुने
हुए
जनरल
के
पास
केंद्रित
होगा,
जिससे
नियंत्रण
रावलपिंडी
के
GHQ
में
केंद्रित
हो
जाएगा।
वरिष्ठ
सैन्य
अधिकारियों
को
आजीवन
कानूनी
प्रतिरक्षा
और
विशेष
दर्जा
दिया
गया
है।
एक
बार
पांच-सितारा
रैंक
मिलने
पर
वे
आजीवन
सुरक्षा,
पद
और
वर्दी
रख
सकते
हैं।
उन
पर
कोई
अदालत
मुकदमा
नहीं
चला
सकती।
संविधान
नीचे,
मुनीर
ऊपर?
ऐतिहासिक
रूप
से
पाकिस्तान
ने
पांच-सितारा
रैंक
का
कम
उपयोग
किया,
लेकिन
मई
2025
के
भारत-पाक
संघर्ष
के
बाद
मुनीर
को
फील्ड
मार्शल
बना
दिया
गया।
संशोधन
उनके
पद
की
संवैधानिक
स्थिरता
सुनिश्चित
करता
है।
अन्य
सैन्य
प्रमुखों
को
भी
ताकत
मई
2025
के
ऑपरेशन
बनयान
अल
मार्सस
में
भूमिका
के
लिए
नौसेना
और
वायु
सेना
प्रमुखों
को
भी
आजीवन
वर्दी
पहनने
और
कानूनी
प्रतिरक्षा
का
अधिकार
दिया
गया
है।
27वें
संशोधन
का
एक
चिंताजनक
पहलू
न्यायिक
स्वतंत्रता
पर
इसका
सीधा
प्रभाव
है।
एक
नई
‘फेडरल
कॉन्स्टिट्यूशनल
कोर्ट
(FCC)’
बनाई
जा
रही
है,
जिससे
सर्वोच्च
न्यायालय
की
सर्वोच्चता
घट
जाएगी।
FCC
के
मुख्य
न्यायाधीश
68
वर्ष
तक
सेवा
कर
पाएंगे,
जबकि
सुप्रीम
कोर्ट
की
सीमा
65
वर्ष
है।
26वें
संशोधन
से
शुरू
हुई
न्यायिक
कमजोरी
26वें
संशोधन
(2024)
ने
न्यायिक
नियुक्तियों
और
स्वतः
संज्ञान
शक्तियों
को
सीमित
किया।
जो
अदालतें
कभी
जनरल
मुशर्रफ
को
हटाने
में
महत्वपूर्ण
थीं,
अब
कार्यपालिका
और
सेना
के
अधीन
हो
रही
हैं।
पाकिस्तान
में
राजनीतिक
नेतृत्व
का
सरेंडर
शहबाज
शरीफ
सरकार
ने
विपक्ष
की
कमजोर
प्रतिक्रिया
और
राजनीतिक
दलों
की
चुप्पी
के
बीच
यह
संशोधन
पारित
किया।
PML-N
और
PPP
दोनों
ने
इसे
समर्थन
दिया,
जबकि
PPP
का
सैन्य
शासन
विरोध
का
लंबा
इतिहास
रहा
है।
PPP
की
भूमिका
और
बिलावल
भुट्टो
की
मंशा
पर
सवाल
PPP
ने
तकनीकी
और
राष्ट्रवादी
तर्कों
से
इस
संशोधन
को
सही
ठहराया।
विशेषज्ञों
के
अनुसार
बिलावल
भुट्टो,
लोकतंत्र
से
अधिक
मुनीर
की
सद्भावना
बनाए
रखने
पर
ध्यान
दे
रहे
हैं।
पाकिस्तान
की
“हाइब्रिड”
व्यवस्था
अब
ऐसी
स्थिति
में
है
जहां
नागरिक
भूमिका
लगभग
गायब
हो
चुकी
है।
मुनीर
ने
जिया-उल-हक
और
मुशर्रफ
की
तरह
सत्ता
मजबूत
की
है,
लेकिन
बिना
मार्शल
लॉ
लागू
किए।
पर्दे
के
पीछे
की
असल
कहानी
मुनीर
खुद
को
पर्दे
के
पीछे
रखकर
शासन
कर
रहे
हैं।
वे
नागरिक
फैसलों
को
पलटने
की
शक्ति
रखते
हैं,
जबकि
खुद
सीधे
राजनीतिक
पद
नहीं
लेते।
यह
उन्हें
अंतरराष्ट्रीय
आलोचना
से
बचाता
है।
मुनीर
का
सत्ता
का
केंद्रीकरण
तीन
सालों
में
मुनीर
ने
दमन,
हेरफेर
और
अवसरवाद
के
माध्यम
से
शक्ति
मजबूत
की।
विपक्ष
विशेषकर
PTI
को
कमजोर
किया
गया।
सरकार
ने
भी
बदले
में
न्यायपालिका
पर
अंकुश
लगाकर
सेना
को
और
मजबूत
किया।
लिहाजा
यह
बिना
टैंक
और
बिना
ब्रिगेड-एक
“साइलेंट
कूप”
है।
पाकिस्तान
की
लोकतांत्रिक
संरचना
तीन
सालों
में
गंभीर
रूप
से
क्षतिग्रस्त
हुई
है।
कौन
है
असल
कर्ता-धर्ता?
दुनिया
पाकिस्तान
के
लोकतांत्रिक
पतन
पर
चुप
है।
पश्चिमी
देश
सिर्फ
हल्की
आलोचना
तक
सीमित
रहे
हैं।
अमेरिका
खुलकर
मुनीर
का
समर्थन
कर
रहा
है।
अमेरिकी
राष्ट्रपति
डोनाल्ड
ट्रम्प
reportedly
मुनीर
को
अपना
“पसंदीदा
फील्ड
मार्शल”
कहते
हैं,
जो
बताता
है
कि
वाशिंगटन
अभी
भी
सैन्य
नेतृत्व
को
प्राथमिकता
देता
है।
अमेरिकी
समर्थन
से
सैन्य
आक्रामकता
में
बढ़ोतरी
की
आशंका
विशेषज्ञों
का
मानना
है
कि
अमेरिकी
समर्थन
से
मुनीर
घरेलू
और
विदेशी
मामलों
में
और
कठोर
रुख
अपना
सकते
हैं,
विशेषकर
भारत
और
अफगानिस्तान
के
खिलाफ।
जिसका
सीधा
असर
अब
पाकिस्तान
की
जनता
पर
पड़
सकता
है।
साथ
ही
भारत
और
पाकिस्तान
के
संबंध
पहले
से
और
ज्यादा
तल्ख
हो
सकते
हैं।
भारत-पाक
संबंध
और
बढ़ता
तनाव
मई
2025
के
संघर्ष
के
बाद
संबंध
पहले
से
ही
तनावपूर्ण
हैं।
12
नवंबर
2025
को
दिल्ली
में
हुए
आतंकवादी
हमले
ने
स्थिति
और
खराब
कर
दी।
भारत
पाकिस्तान
के
प्रति
अपनी
कठोर
नीति
जारी
रखेगा।
सिकुड़ता
हुआ
कमजोर
लोकतंत्र
सुप्रीम
कोर्ट
के
अधिकार
सीमित
कर
दिए
गए
हैं।
संसद
ने
सेना
के
दबाव
में
अपनी
शक्ति
खो
दी
है।
राजनीतिक
दलों
ने
संस्थागत
अखंडता
की
अनदेखी
की
है।
कानूनी
रूप
से
लोकतंत्र
मौजूद
है,
लेकिन
व्यावहारिक
रूप
से
नहीं।
आम
नागरिक
“संवैधानिक
मार्शल
लॉ”
जैसी
स्थिति
का
अनुभव
कर
रहे
हैं।
राजनीतिक
सौदेबाजी
PML-N
ने
लाहौर
में
और
केंद्र
में
अपनी
सरकार
बचाई।
PPP
ने
आसिफ
अली
जरदारी
के
लिए
कानूनी
प्रतिरक्षा
सुनिश्चित
की।
PTI
लगातार
दमन
का
सामना
कर
रही
है।
इमरान
खान
लोकप्रिय
हैं,
लेकिन
उनकी
पार्टी
पर
प्रतिबंधात्मक
नीतियां
लागू
हैं।
लोग
मानते
हैं
कि
सेना
उनकी
गिरफ्तारी
की
जिम्मेदार
है।
क्षेत्रीय
स्थिरता
पर
असर
पाकिस्तान
का
सैन्य
केंद्रीकरण
दक्षिण
एशिया
की
स्थिरता
के
लिए
खतरा
है।
इस्लामाबाद
में
सेना
का
बढ़ता
नियंत्रण
तनाव
बढ़ाएगा।
27वां
संशोधन
पाकिस्तान
के
आधुनिक
इतिहास
का
निर्णायक
और
खतरनाक
मोड़
है।
यह
सेना
को
पूरी
शक्ति
देता
है,
नागरिक
शासन
को
दरकिनार
करता
है
और
आसिम
मुनीर
को
देश
का
सबसे
शक्तिशाली
व्यक्ति
बना
देता
है।
इस
एनालिसिस
पर
आपकी
क्या
राय
है,
हमें
कमेंट
में
बताएं।

























