International
oi-Sumit Jha
Tarique Rahman Swearing-in Ceremony: बांग्लादेश के राजनीतिक परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। बीएनपी (BNP) नेता तारिक रहमान 17 फरवरी 2026 की शाम को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। इस ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह को एक भव्य अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक कार्यक्रम के रूप में तैयार किया जा रहा है।
अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस ने भारत, चीन और पाकिस्तान सहित 13 देशों के राष्ट्राध्यक्षों को निमंत्रण भेजा है। यह कदम न केवल नई सरकार की स्वीकार्यता को दर्शाता है, बल्कि दक्षिण और पश्चिम एशिया के साथ बांग्लादेश के भविष्य के संबंधों और क्षेत्रीय संतुलन की एक नई दिशा की ओर इशारा करता है।

शपथ ग्रहण: बंगभवन नहीं, संसद बनेगा गवाह
इस बार शपथ ग्रहण समारोह की जगह का चुनाव काफी चर्चा में है। परंपरा को तोड़ते हुए यह कार्यक्रम राष्ट्रपति भवन के बजाय जातीयो संसद (National Parliament) परिसर में होगा। इसे नई सरकार के उस विजन से जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें वे संसद और जनता की ताकत को सबसे ऊपर दिखाना चाहते हैं। ढाका में होने वाला यह भव्य आयोजन न केवल आंतरिक स्थिरता बल्कि दुनिया को अपनी ताकत दिखाने का एक अंतरराष्ट्रीय मंच भी बनेगा।
ये भी पढे़ं: Tarique Rahman PM Modi Talk: पीएम मोदी ने तारिक रहमान को फोन कर दी बधाई, और क्या हुई बात?
इन 13 देशों को मिला कूटनीतिक न्योता
प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस ने इस समारोह को ‘ग्लोबल’ बनाने के लिए 13 अहम देशों को आमंत्रित किया है। इसमें भारत, चीन, पाकिस्तान और सऊदी अरब जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इसके अलावा तुर्किये, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, मलेशिया, ब्रुनेई, श्रीलंका, नेपाल, मालदीव और भूटान को भी बुलावा भेजा गया है। दक्षिण एशिया से लेकर खाड़ी देशों तक को एक साथ बुलाना यह दर्शाता है कि रहमान प्रशासन क्षेत्रीय संतुलन और आर्थिक निवेश को अपनी प्राथमिकता पर रख रहा है।
लोकसभा स्पीकर ओम ओम बिरला भारत का करेंगे प्रतिनिधित्व
भारत की ओर से इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में लोकसभा स्पीकर Om Birla शिरकत करेंगे। वे भारत का आधिकारिक प्रतिनिधित्व करते हुए शपथ-ग्रहण समारोह में शामिल हो सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, उनके साथ विदेश सचिव Vikram Misri भी मौजूद रहेंगे। इस भागीदारी को भारत और बांग्लादेश के बीच मजबूत होते कूटनीतिक संबंधों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
तारिक रहमान: विरासत, संघर्ष और सत्ता
60 वर्षीय तारिक रहमान एक बेहद ताकतवर राजनीतिक घराने (जिया परिवार) से आते हैं। उनके पिता जियाउर रहमान स्वतंत्रता सेनानी और राष्ट्रपति थे, जबकि मां खालिदा जिया देश की पहली महिला प्रधानमंत्री रहीं। किशोरावस्था में पिता की हत्या और सालों तक निर्वासन झेलने के बाद रहमान का प्रधानमंत्री बनना किसी फ़िल्मी कहानी से कम नहीं है। उन पर कई आरोप भी लगे, लेकिन अपनी मां के निधन के बाद पार्टी की कमान संभालते हुए उन्होंने शानदार जीत हासिल की।
ये भी पढ़ें: भारत-बांग्लादेश संबंध पर क्या बोले तारिक रहमान? जल्द ही संभालने जा रहे प्रधानमंत्री की कुर्सी
नई सरकार के सामने चुनौतियों का पहाड़
भारी बहुमत (209 सीटें) मिलने के बावजूद तारिक रहमान की राह आसान नहीं है। सबसे बड़ी चुनौती बांग्लादेश की डगमगाती अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना और घरेलू राजनीति में स्थिरता पैदा करना है। इसके अलावा, भारत और चीन जैसी महाशक्तियों के बीच कूटनीतिक संतुलन बनाना उनके कौशल की परीक्षा होगी। जहां जमात गठबंधन (68 सीटें) के साथ तालमेल बिठाना जरूरी है, वहीं अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह भरोसा दिलाना होगा कि उनकी सरकार समावेशी और पारदर्शी है।

























