ताबूत ने बनाया करोड़पति Image Credit source: Social Media
चीन के शेडोंग प्रांत के हेज़े शहर की 29 वर्षीय लिसा लियू इन दिनों इंटरनेट पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं. उनकी कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने समाज की परंपरागत सोच को चुनौती देते हुए एक ऐसे व्यवसाय को अपनाया, जिसे अक्सर अशुभ माना जाता है. जहां लोग इस काम के बारे में सोचकर भी असहज हो जाते हैं, वहीं लिसा ने इसे अपनी ताकत और सफलता का आधार बना लिया.
कुछ साल पहले तक लिसा लियू एक सामान्य स्कूल टीचर थीं. वे बच्चों को पढ़ाती थीं और उनकी जिंदगी साधारण लेकिन बैलेंस ढंग से चल रही थी. हालांकि, समय के साथ नौकरी का दबाव बढ़ने लगा. लिमिटेड सैलरी, बढ़ती जिम्मेदारियां और भविष्य को लेकर असुरक्षा ने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया. उन्हें महसूस हुआ कि अगर वे जीवन में कुछ बड़ा हासिल करना चाहती हैं, तो जोखिम उठाना होगा. आखिरकार, साल 2023 में उन्होंने अपनी स्थायी नौकरी छोड़ने का साहसिक निर्णय लिया.
ताबूत ने चमका दी किस्मत
नौकरी छोड़ने के बाद लिसा के सामने सबसे बड़ा सवाल था—अब आगे क्या? इसी दौरान उन्होंने ताबूत (कॉफिन) के व्यवसाय में कदम रखने का फैसला किया. ये निर्णय आसान नहीं था. परिवार और रिश्तेदारों ने उनके फैसले पर हैरानी जताई. कई लोगों ने इसे अपशकुन बताया और समझाने की कोशिश की कि यह काम उनके लिए ठीक नहीं है. लेकिन लिसा ने दूसरों की नकारात्मक बातों को अपनी राह का रोड़ा नहीं बनने दिया. उन्होंने ठान लिया कि वे अपने फैसले को सही साबित करके दिखाएंगी.
शुरुआत में उन्हें खुद भी इस काम से डर लगता था. ताबूत बनाने की प्रक्रिया से वे अपरिचित थीं और मन में एक अजीब-सी घबराहट थी. लेकिन जब उन्होंने फैक्ट्री का दौरा किया और पूरे निर्माण कार्य को करीब से देखा, तो उनका नजरिया बदल गया. उन्हें समझ आया कि यह भी लकड़ी से तैयार किया जाने वाला एक नॉर्मल उत्पाद है, जिसे लोग एक आवश्यकता के रूप में खरीदते हैं. धीरे-धीरे उनका डर खत्म हो गया और उन्होंने इस व्यवसाय को पूरी लगन से अपनाने का निश्चय किया.
कैसे चमकी किस्मत
लिसा ने अपने कारोबार को पारंपरिक तरीके से नहीं, बल्कि आधुनिक सोच के साथ आगे बढ़ाया. उन्होंने बेहतर गुणवत्ता की लकड़ी का उपयोग किया, आकर्षक और साफ-सुथरे डिजाइन तैयार करवाए और धार्मिक प्रतीकों को भी ध्यान में रखा, ताकि अलग-अलग देशों के ग्राहकों की जरूरतें पूरी हो सकें. साथ ही, उन्होंने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का सहारा लिया, जिससे उनके उत्पाद सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने लगे. डिजिटल मार्केटिंग और ई-कॉमर्स की मदद से उन्होंने अपने ब्रांड को नई पहचान दी.
हेजे में तैयार किए जाने वाले ताबूत खासतौर पर यूरोपीय बाजार को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं. इन ताबूतों की सबसे बड़ी खासियत उनका हल्का वजन और मजबूत बनावट है. इन्हें पॉलोनिया नामक लकड़ी से तैयार किया जाता है, जो हल्की होने के साथ-साथ टिकाऊ भी होती है. इस वजह से इन्हें आसानी से ट्रांसपोर्ट किया जा सकता है और ये लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं. यूरोप में इस तरह के हल्के और सुंदर डिज़ाइन वाले ताबूतों की मांग लगातार बढ़ रही है.
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लागत के मामले में भी लिसा का व्यवसाय काफी प्रतिस्पर्धी है. चीन में तैयार एक ताबूत की कीमत लगभग 90 से 150 डॉलर के बीच होती है, जो भारतीय मुद्रा में करीब 7,000 से 12,000 रुपये तक बैठती है. वहीं, यही ताबूत यूरोपीय देशों में 1,100 से 2,100 डॉलर तक में बेचे जाते हैं. कम उत्पादन लागत, बेहतर गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय मांग ने लिसा के कारोबार को तेजी से ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है.
आज लिसा लियू का यह अनोखा व्यवसाय सालाना लगभग 50 करोड़ रुपये का टर्नओवर हासिल कर चुका है. जो काम कभी लोगों को अशुभ लगता था, वही उनके लिए सफलता का माध्यम बन गया. उन्होंने यह साबित कर दिया कि कोई भी काम छोटा या बुरा नहीं होता, बल्कि हमारे नजरिए पर निर्भर करता है कि हम उसे किस रूप में देखते हैं.

























