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Viral Video: घर आई ग्रोसरी और बच गए रिक्शे के पैसे, बंदे ने दिमाग लगाकर 1 तीर से किए दो शिकार

शख्स ने घर पहुंचने के लिए लगाया तगड़ा दिमाग Image Credit source: Social Media

एक तीर से दो निशाने वाली कहावत आपने जरूर सुनी होगी. जिसका सीधा सा मतलब है कि एक ही कोशिश से दो काम पूरे हो जाएं. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में यही कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है. इस वीडियो में एक युवक ने ऐसा तरीका निकाला कि न सिर्फ उसका काम हो गया, बल्कि लोग उसकी चालाकी देखकर हैरान भी रह गए.

इस कहानी के केंद्र में हैं प्रीतम नाम के एक इंस्टाग्राम यूजर. प्रीतम को अपने घर वापस जाना था, लेकिन शायद वह दो अलग अलग चीजों पर पैसे खर्च नहीं करना चाहते थे. आमतौर पर ऐसी स्थिति में कोई या तो खुद किराने की दुकान से सामान खरीदकर किसी बाइक या ऑटो से घर चला जाता है, या फिर घर जाने के लिए अलग से राइड बुक करता है और ग्रोसरी ऑनलाइन मंगा लेता है. लेकिन प्रीतम ने इन दोनों आम रास्तों से हटकर कुछ अलग सोचने का फैसला किया.

उन्होंने जियोमार्ट ऐप खोला और ऑनलाइन किराने का सामान ऑर्डर कर दिया. ऑर्डर करने के बाद वह शांति से इंतजार करने लगे कि कोई डिलीवरी पार्टनर उनके ऑर्डर को पिक करे. वीडियो में वह खुद कैमरे पर कहते नजर आते हैं कि अब जैसे ही ऑर्डर आएगा और कोई इसे डिलीवर करने आएगा, वह उसी के साथ घर चले जाएंगे. यानी सामान भी पहुंचेगा और उनकी सवारी का इंतजाम भी हो जाएगा.

कैसे किया ये काम

प्रीतम के ऑर्डर में प्याज और रोजमर्रा की दूसरी जरूरी चीजें शामिल थीं. जैसे ही जियोमार्ट स्टोर से डिलीवरी बॉय असाइन होता है, प्रीतम उससे बात करते हैं और बताते हैं कि वह भी उसी दिशा में जा रहे हैं, जहां सामान डिलीवर होना है. हैरानी की बात यह है कि डिलीवरी बॉय भी ज्यादा सोच विचार किए बिना उन्हें अपनी बाइक पर पीछे बैठने के लिए तैयार हो जाता है.

वीडियो में दिखता है कि प्रीतम अपने दोस्तों को स्टोर के पास ही छोड़ देते हैं और खुद डिलीवरी वाले के साथ उसकी बाइक पर बैठ जाते हैं. रास्ते में वह मुस्कुराते हुए पूछते हैं, क्यों भैया, आइडिया सही था न? इस पर डिलीवरी बॉय भी सिर हिलाकर हामी भर देता है. कुछ ही देर में प्रीतम का घर आ जाता है. वह बाइक से उतरते हैं और मजाकिया अंदाज में कहते हैं, सामान भी आ गया और हम भी आ गए.

इस पूरे वीडियो को देखने के बाद ज्यादातर लोग प्रीतम की सोच को एक स्मार्ट चाल मान रहे हैं. वाकई, एक ही काम से उन्होंने दो जरूरतें पूरी कर लीं. न अलग से सवारी का खर्च और न ही किसी और झंझट की जरूरत. सोशल मीडिया पर लोग इसे जुगाड़, दिमागी खेल और देसी आइडिया जैसे नाम दे रहे हैं.

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लेकिन इस कहानी का एक दूसरा पहलू भी है, जिस पर ध्यान देना जरूरी है. डिलीवरी बॉय का काम सिर्फ सामान पहुंचाना होता है, न कि किसी को मुफ्त में घर छोड़ना. जब बाइक या स्कूटी पर एक की बजाय दो लोग बैठते हैं, तो ईंधन ज्यादा खर्च होता है और वाहन पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ता है. आसान भाषा में कहें तो माइलेज कम हो जाता है.

ऐसे में अगर कोई इस तरह का तरीका अपनाता है, तो इंसानियत और समझदारी यही कहती है कि डिलीवरी बॉय को कुछ अतिरिक्त पैसे जरूर देने चाहिए. आखिर उसने सिर्फ ऑर्डर नहीं पहुंचाया, बल्कि आपको सुरक्षित तरीके से घर तक छोड़ने में भी मदद की है. यह उसकी जिम्मेदारी का हिस्सा नहीं था, फिर भी उसने सहयोग किया.

यहां देखिए वीडियो



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