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World Hindu Population: धर्मांतरण के साये में कितनी बढ़ी हिन्दू आबादी? मुस्लिमों ने कैसे दुनिया को चौंकाया! | World Hindu Population: 13 Crore Increase in a Decade, Share Stable at 15%, Pew Report Indicates What?

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oi-Siddharth Purohit

World Hindu Population: एक समय था जब आज़ादी के बाद भारत की धीमी आर्थिक प्रगति को समझाने के लिए विदेशी अर्थशास्त्री ‘हिंदू विकास दर’ या ‘Hindu Growth Rate’ शब्द का इस्तेमाल करते थे। यह शब्द 1947 के बाद की कम आर्थिक वृद्धि दर को दिखाने के लिए व्यंग्य में बोला जाता था। उस दौर में इसे ठहराव और बहुत धीमी तरक्की का प्रतीक माना जाता था।

लेकिन 1990 में भारत ने उदारीकरण (Liberalization) की नीतियां अपनाईं और अर्थव्यवस्था को खोला, जिसके बाद यह नकारात्मक धारणा समय के साथ खत्म होती चली गई। लेकिन अब हिन्दू आबादी एक बार फिर चर्चा में आई है, कारण है Pew Research की एक रिपोर्ट।

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अब ‘हिंदू विकास दर’ का नया मतलब

आज यही शब्द एक अलग संदर्भ में चर्चा में है- जनसंख्या के संदर्भ में। हाल ही में Pew Research Center ने अपनी रिपोर्ट How the Global Religious Landscape Changed From 2010 to 2020 जारी की। इस रिपोर्ट के मुताबिक 2010 से 2020 के बीच हिंदू आबादी में बढ़ोतरी लगभग उसी रफ्तार से हुई, जिस रफ्तार से पूरी दुनिया की जनसंख्या बढ़ी। यानी न बहुत तेज उछाल और न गिरावट- बल्कि संतुलित और स्थिर ग्रोथ।

201 देशों का डेटा, 99.98% दुनिया शामिल

Pew Research Center ने अपनी इस स्टडी में 201 देशों की जनसंख्या का विश्लेषण किया, जिसमें दुनिया की लगभग 99.98% आबादी शामिल थी। रिपोर्ट में धार्मिक विविधता सूचकांक (Religious Diversity Index -RDI) भी तैयार किया गया। इसमें सात बड़े समूह शामिल थे- ईसाई, मुस्लिम, हिंदू, बौद्ध, यहूदी, अन्य धर्मों के अनुयायी और नास्तिक।

10 साल में कितनी बढ़ी हिन्दू आबादी?

रिपोर्ट के मुताबिक 2010 में वैश्विक हिंदू आबादी लगभग 1.07 अरब (107 करोड़) थी, जो 2020 तक बढ़कर लगभग 1.2 अरब (120 करोड़) हो गई। यानी एक दशक में करीब 12.6 से 13 करोड़ लोगों की बढ़ोतरी हुई। इसी अवधि में विश्व जनसंख्या में लगभग 12% की बढ़ोतरी हुई और हिंदू आबादी भी लगभग 12% की दर से बढ़ी। यह एक तरह से ‘डेमोग्राफिक अलाइनमेंट’ है- यानी दुनिया और हिंदू आबादी की बढ़ोतरी लगभग समान रफ्तार से हुई।

कितनी बढ़ी मुस्लिमों की आबादी?

मुस्लिमों की आबादी अभी भी लगभग दोगुनी (210 करोड़) है। 2010 से 2020 के बीच करीब 36.7 करोड़ की बढ़ोतरी हुई, जो दुनिया में हुई किसी भी धर्म की आबादी में सबसे तेज है। जो हिन्दू आबादी दर की तुलना में 8 प्रतिशत ज्यादा है। जिसमें मध्य-पूर्व और अफ्रीकी देशों में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी बढ़ी है।

15% हिस्सेदारी पर स्थिर हिंदू आबादी

इतनी बड़ी वृद्धि के बावजूद दुनिया की कुल आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी लगभग 15% पर स्थिर रही। यह दिलचस्प है क्योंकि इसी दौरान मुस्लिम आबादी की हिस्सेदारी बढ़ी और ईसाई आबादी के प्रतिशत में थोड़ी गिरावट आई। हिंदू एकमात्र प्रमुख धार्मिक समूह रहे जिनकी वैश्विक हिस्सेदारी में बड़ा बदलाव नहीं आया।

एशिया-प्रशांत में 99% हिंदू

हिंदू आबादी की सबसे खास बात उसकी भौगोलिक एकाग्रता है। दुनिया के 99% हिंदू एशिया-प्रशांत क्षेत्र में रहते हैं। इनमें से 95% से अधिक केवल भारत में निवास करते हैं। नेपाल का भी इसमें महत्वपूर्ण योगदान है। इस लिहाज से हिंदू धर्म दुनिया का सबसे ज्यादा भौगोलिक रूप से केंद्रित प्रमुख धर्म माना जाता है।

भारत तय करता है वैश्विक हिंदू ट्रेंड

ईसाई और इस्लाम धर्म कई महाद्वीपों और संस्कृतियों में फैले हुए हैं, जबकि हिंदू धर्म मुख्य रूप से एक ही सभ्यतागत (सांसकृतिक, वैचारिक और सामाजिक विरासत) भूगोल से जुड़ा है। अकेले भारत लगभग एक अरब से भी ज्यादा लोगों की जनसंख्या दिशा तय करता है। इसलिए भारत की डेमोग्राफिक स्थिति सीधे वैश्विक हिंदू आबादी को प्रभावित करती है।

धर्मांतरण नहीं, नैचुरल ग्रोथ मुख्य

रिपोर्ट बताती है कि हिंदू आबादी में बदलाव का मुख्य कारण जन्म और मृत्यु का अंतर है, न कि बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन। वैश्विक स्तर पर हिंदू धर्म में धर्मांतरण या धर्म छोड़ने की दर अन्य प्रमुख धर्मों की तुलना में कम है। अधिकांश लोग उसी धर्म में बने रहते हैं जिसमें उनका जन्म और पालन-पोषण हुआ। इस वजह से हिंदू धर्म को जनसांख्यिकीय रूप से कम गतिशील धार्मिक पहचान माना जाता है।

बहुसंख्यक देशों में 97% हिंदू

दुनिया के 97% हिंदू ऐसे देशों में रहते हैं जहां वे बहुसंख्यक हैं- मुख्य रूप से भारत और नेपाल। यह अनुपात सभी प्रमुख धर्मों में सबसे अधिक है। इसके विपरीत, ईसाई और मुस्लिम आबादी कई देशों में अल्पसंख्यक के रूप में भी बड़ी संख्या में रहती है, जिससे उनका भौगोलिक फैलाव ज्यादा विविध दिखाई देता है।

युवा आबादी है ग्रोथ का इंजन

भारत की औसत आयु लगभग 28 वर्ष है, जबकि यूरोप की औसत आयु लगभग 40 वर्ष है। चूंकि 95% वैश्विक हिंदू भारत में रहते हैं, इसलिए पूरी हिंदू आबादी का औसत भी अपेक्षाकृत युवा है। यह युवा आबादी भविष्य में जनसंख्या वृद्धि को बनाए रखने में मदद करती है।

घटती प्रजनन दर चिंता का विषय?

पिछले 50 सालों में भारत की कुल प्रजनन दर में गिरावट आई है, यानी प्रति परिवार बच्चों की संख्या कम हुई है। फिर भी बड़ी युवा आबादी के कारण कुल जनसंख्या में वृद्धि जारी है। इसे डेमोग्राफिक मोमेंटम कहा जाता है- यानी युवा आबादी आगे आने वाले सालों में कुल संख्या को बढ़ाती रहती है।

बाकी धर्मों की क्या है स्थिति?

Pew Report के मुताबिक ईसाई धर्म अभी भी दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक समूह है। वहीं 2010 से 2020 के बीच मुस्लिम आबादी में सबसे तेज उछाल दर्ज किया गया। दूसरी ओर बौद्ध धर्म के अनुयायियों की संख्या में कमी आई। इन बदलावों के बीच हिंदू धर्म 100 करोड़ से अधिक अनुयायियों के साथ दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा धार्मिक समूह बना रहा और 15% हिस्सेदारी पर स्थिर रहा।

ऐतिहासिक चुनौतियों के बावजूद स्थिरता

इतिहास में भारत ने कई बाहरी आक्रमणों का सामना किया। 636 ईस्वी और 711 ईस्वी के शुरुआती अरब आक्रमण असफल रहे, लेकिन 712 ईस्वी में मुहम्मद बिन कासिम का आक्रमण सफल हुआ, जिसने सिंध में इस्लामी शासन की नींव रखी। बाद में तुर्क, अफगान और मंगोल शासक आए। 1526 से 1857 तक मुगलों का शासन रहा, जिसमें ‘जजिया’ जैसे कर लगाए गए। धर्मांतरण और मंदिर तोड़ने की घटनाओं के बावजूद, सनातन धर्म अपनी जड़ों को बनाए रखने में सफल रहा।

ग्लोबल लेवल पर बढ़ती मौजूदगी

आज हिंदू समुदाय सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिका की ‘टेक वैली’ जैसी जगहों पर भी हिंदू पेशेवर बड़ी संख्या में मौजूद हैं और वैश्विक संस्थानों में नेतृत्व की भूमिका निभा रहे हैं, (उदाहरण- सुंदर पिचई और सत्या नडेला)। इससे साफ है कि हिंदू पहचान अब सिर्फ एक क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक भी बन चुकी है।

‘हिंदू विकास दर’ का नया दौर

आज के दौर में ‘हिंदू विकास दर’ ठहराव का प्रतीक नहीं है। यह एक ऐसे धर्म की कहानी है जिसके एक अरब से ज्यादा अनुयायी हैं और जिसकी जनसंख्या दुनिया की कुल वृद्धि दर के साथ तालमेल में बढ़ रही है। धार्मिक बदलावों के इस दौर में यह स्थिरता अपने आप में एक बड़ी और अलग कहानी बनकर सामने आती है।

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