‘ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन तैयार है-India से 3000 साल पुराना रिश्ता’, US के साथ तनाव पर Iran के 11 जवाब | Iran US Tensions: Explore Interview India Iran Relations 3000-Year Ties-Chabahar Port News Updates Hindi

International

oi-Divyansh Rastogi


Iran
US
Tensions:

ईरान
में
हालात
को
लेकर
दुनिया
भर
में
चर्चा
तेज
है।
सोशल
मीडिया
से
लेकर
इंटरनेशनल
मीडिया
तक,
विरोध
प्रदर्शन,
इंटरनेट
बंदी
और
अमेरिका
के
साथ
बढ़ते
तनाव
की
खबरें
लगातार
सामने

रही
हैं।
इसी
बीच
इस्लामिक
रिपब्लिक
ऑफ
ईरान
के
सुप्रीम
लीडर
अयातुल्ला
अली
खामेनेई
के
भारत
में
स्थित
विशेष
प्रतिनिधि
डॉ.
अब्दुल
मजीद
हकीम
इलाही
(Dr.
Abdul
Majeed
Hakim
Ilahi
)
ने
तमाम
मुद्दों
पर
खुलकर
बात
की।
उन्होंने
भारत-ईरान
संबंधों
को
3000
साल
पुराना
बताया
और
कहा
कि
ईरान
के
स्कूलों-यूनिवर्सिटी
में
भारत
की
दर्शनशास्त्र,
गणित,
खगोल
विज्ञान
और
चिकित्सा
की
किताबें
पढ़ाई
जाती
रही
हैं।

डॉ.
इलाही
ने
चाबहार
बंदरगाह
(Chabahar
Port
)
पर
भारत
के
निवेश
को
सराहा
और
उम्मीद
जताई
कि
दोनों
देश
मिलकर
इसे
और
मजबूत
बनाएंगे।
उन्होंने
कहा,’सुप्रीम
लीडर
हमेशा
भारत
के
साथ
अच्छे
संबंध
और
सहयोग
पर
जोर
देते
हैं।
भारत
प्रतिबंधों
से
प्रभावित
नहीं
हुआ
है
और
चाबहार
में
अच्छा
काम
होगा।’

ANI
की
रिपोर्ट
के
मुताबिक,
पेश
है
बातचीत
के
अहम
सवाल-जवाब….

Iran India Relations

1-
सवाल:
ईरान
में
इस
वक्त
असली
स्थिति
क्या
है?
सोशल
मीडिया
और
खबरों
में
हालात
काफी
गंभीर
बताए
जा
रहे
हैं।

जवाब:
हमें
दो
चीजों
में
फर्क
करना
होगा।
एक
है
असल
सच्चाई
और
दूसरी
कल्पना,
जो
कुछ
मीडिया
और
ईरान
के
दुश्मनों
द्वारा
फैलाई
जा
रही
है।
यह
सच
है
कि
ईरान
को
आर्थिक
दिक्कतों
का
सामना
करना
पड़ा
है,
खासकर
गैर-कानूनी
प्रतिबंधों
की
वजह
से।
कुछ
लोगों
ने
आर्थिक
हालात
को
लेकर
विरोध
किया,
जो
उनका
अधिकार
है।
लेकिन
कुछ
दूसरे
लोगों
ने
इसी
मौके
का
गलत
फायदा
उठाया
और
हिंसा
फैलाई।

2-
सवाल:
स्वतंत्र
मानवाधिकार
संगठनों
का
दावा
है
कि
4
से
5
हजार
लोग
मारे
गए।
आप
इस
पर
क्या
कहेंगे?

जवाब:
ये
आंकड़े
बिल्कुल
सही
नहीं
हैं।
जिन
संगठनों
का
आप
जिक्र
कर
रहे
हैं,
उनका
संबंध
अमेरिका
और
कुछ
पश्चिमी
देशों
से
है।
उन्होंने
बहुत
बढ़ा-चढ़ाकर
और
नकली
आंकड़े
पेश
किए
हैं।
कुछ
लोगों
की
मौत
हुई
है,
लेकिन
संख्या
स्पष्ट
नहीं
है
और
जो
आंकड़े
बताए
जा
रहे
हैं,
वे
भरोसेमंद
नहीं
हैं।

3-
सवाल:
क्या
मारे
गए
लोग
आम
और
निर्दोष
प्रदर्शनकारी
नहीं
थे?

जवाब:
सच्चाई
यह
है
कि
ज़्यादातर
निर्दोष
लोग
वे
थे,
जो
अपनी
दुकान,
मस्जिद,
अस्पताल
या
काम
पर
थे
और
हिंसक
प्रदर्शनकारियों
ने
उन
पर
हमला
किया।
कुछ
प्रदर्शनकारियों
की
मौत
भी
हुई,
लेकिन
तब
जब
उन्होंने
पुलिस
और
आम
नागरिकों
पर
हमला
किया।

4-
सवाल:
क्या
ये
प्रदर्शनकारी
बाहर
से
आए
थे
या
ईरानी
नागरिक
थे?

जवाब:
वे
ईरानी
नागरिक
ही
थे,
लेकिन
उन्हें
बाहर
से
ट्रेनिंग
दी
गई।
सोशल
मीडिया
के
ज़रिए
उन्हें
सिखाया
गया
कि
कैसे
हिंसा
फैलानी
है,
कैसे
मस्जिद,
लाइब्रेरी
और
अस्पताल
जलाने
हैं।

5-
सवाल:
अगर
सरकार
को
इसकी
जानकारी
थी
तो
पहले
से
कदम
क्यों
नहीं
उठाए
गए?

जवाब:
सोशल
मीडिया
को
पूरी
तरह
कंट्रोल
करना
किसी
भी
देश
के
लिए
आसान
नहीं
है।
ईरान
के
खिलाफ
250
से
ज्यादा
चैनल
दिन-रात
प्रोपेगेंडा
चला
रहे
हैं
और
युवाओं
को
भड़काने
की
कोशिश
कर
रहे
हैं।

6-
सवाल:
इंटरनेट
बंद
करने
का
फैसला
क्यों
लिया
गया?

जवाब:
इंटरनेशनल
इंटरनेट
इसलिए
बंद
किया
गया,
ताकि
बाहर
से
होने
वाली
उकसावे
की
कोशिशों
को
रोका
जा
सके
और
समाज
में
शांति
बनी
रहे।
हालांकि
ईरान
में
लोकल
इंटरनेट
पूरी
तरह
काम
कर
रहा
है।

7-
सवाल:
अमेरिका
के
युद्धपोत
मिडिल
ईस्ट
की
ओर
बढ़
रहे
हैं
और
धमकी
भरे
बयान

रहे
हैं।
क्या
हालात
और
बिगड़
सकते
हैं?

जवाब:
हम
शांति
चाहते
हैं
और
युद्ध
के
खिलाफ
हैं।
लेकिन
अगर
कोई
हमला
करना
चाहता
है
तो
ईरान
पूरी
तरह
तैयार
है।
ये
धमकियां
नई
नहीं
हैं,
पिछले
चार
दशकों
से
ऐसे
बयान
दिए
जा
रहे
हैं।

8-
सवाल:
क्या
ईरान
जवाबी
कार्रवाई
में
अपने
सहयोगियों
को
भी
शामिल
करेगा?

जवाब:
हमें
उम्मीद
है
कि
ऐसा
कुछ
नहीं
होगा।
युद्ध
इस
पूरे
क्षेत्र
और
इंसानियत
के
लिए
बेहद
खतरनाक
होगा।

9-
सवाल:
ईरान
के
न्यूक्लियर
प्रोग्राम
को
लेकर
दुनिया
में
संदेह
बना
रहता
है।
सच्चाई
क्या
है?

जवाब:
सुप्रीम
लीडर
के
फतवे
के
मुताबिक
ईरान
कभी
भी
न्यूक्लियर
हथियार
नहीं
बनाएगा,
क्योंकि
यह
हराम
है।
ईरान
सिर्फ
शांतिपूर्ण
और
मानवीय
उद्देश्यों
के
लिए
न्यूक्लियर
एनर्जी
चाहता
है।

10-
सवाल:
क्या
अब
ईरान
में
हालात
पूरी
तरह
सामान्य
हैं?

जवाब:
हां,
हालात
तेजी
से
बेहतर
हो
रहे
हैं।
बड़ी
संख्या
में
ईरानी
लोग
सड़कों
पर
आकर
सरकार
के
साथ
एकजुटता
दिखा
रहे
हैं।

11-
सवाल:
भारत-ईरान
रिश्तों
और
चाबहार
पोर्ट
का
भविष्य
क्या
है?

जवाब:
सुप्रीम
लीडर
हमेशा
भारत
और
ईरान
के
मजबूत
रिश्तों
पर
ज़ोर
देते
हैं।
भारत
ने
अब
तक
दूसरे
देशों
के
दबाव
में
आकर
अपने
कदम
पीछे
नहीं
खींचे
हैं।
हमें
पूरा
भरोसा
है
कि
चाबहार
प्रोजेक्ट
पर
अच्छा
काम
होगा।
भारत
और
ईरान
के
रिश्ते
इस्लाम
से
भी
3000
साल
पुराने
हैं
और
दोनों
सभ्यताओं
ने
हमेशा
एक-दूसरे
से
सीख
लिया
है।

यह
बातचीत
ऐसे
वक्त
आई
है
जब
मिडिल
ईस्ट
से
लेकर
भारत
तक
ईरान
की
स्थिति
को
लेकर
चिंताएं
हैं।
डॉ.
हकीम
इलाही
के
बयान
ईरान
का
आधिकारिक
पक्ष
साफ
तौर
पर
सामने
रखते
हैं
और
भारत-ईरान
संबंधों
की
मजबूती
का
भी
भरोसा
दिलाते
हैं।

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English summary

Iran-India Relations Amid US Tensions: 3000-Year Ties-Chabahar Port News Updates Hindi

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