दिल्ली पुलिस ने साइबर ठगों पर नकेल कसने के लिए ‘डी4सी’ बनाने का फैसला लिया है। इसकी मदद ने केवल साइबर अपराधियों के सिंडिकेट को ध्वस्त करने में मदद मिलेगी, बल्कि ठगी गई रकम को भी महज चंद मिनटों में फ्रीज किया जा सकेगा।
रमेश त्रिपाठी, नई दिल्ली
राजधानी दिल्ली में साइबर अपराधियों, ऑनलाइन ठगों और डेटा चोरों के सिंडिकेट को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए दिल्ली पुलिस देश का सबसे आधुनिक डिजिटल सुरक्षा तंत्र स्थापित करने जा रही है। इसके तहत ‘डी4सी’ (दिल्ली डिजिटल अपराध और साइबर समन्वय केंद्र) को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इसके बाद ठगी की रकम को मिनटों में फ्रीज किया जा सकेगा।
वर्तमान व्यवस्था में किसी व्यक्ति के साथ साइबर फ्रॉड होने पर जब वह 1930 साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करता है, तो जानकारी को वेरिफाई करने और बैंक तक संदेश भेजने में काफी समय लग जाता है। इस देरी का फायदा उठाकर साइबर ठग पैसों को कई अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर देते हैं। सी4आई (कमांड, कंट्रोल, कम्यूनिकेशन, कंप्यूटिंग और इंटेलिजेंस) से डी4सी के जुड़ने के बाद यह पूरी प्रक्रिया बदल जाएगी। इस तकनीकी जुगलबंदी के कारण ठगी गई रकम को होल्ड या फ्रीज करने का रिस्पांस टाइम घटकर मात्र कुछ मिनटों का रह जाएगा। 1930 पर शिकायत मिलने के बाद वित्तीय लेन-देन को रोकने और नुकसान कम करने के लिए बैंकों के अलावा अन्य वित्तीय संस्थानों के साथ तत्काल तालमेल किया जाएगा। इससे ठगों को पैसे निकालने या ट्रांसफर करने मौका ही नहीं मिलेगा।
ऐसे काम करेगा यह नया डिजिटल चक्रव्यूह
1. डिजिटल डेटा फ्यूजन : सड़कों पर लगे 17,000 से अधिक कैमरों का लाइव विजुअल फीड और साइबर अपराधियों के डिजिटल फुटप्रिंट्स को एक ही स्क्रीन पर मैच किया जा सकेगा।
2. त्रि-स्तरीय विंग्स : डी4सी के तहत समर्पित प्रशासनिक विंग, जटिल अपराधों के लिए साइबर जांच विंग और साइबर इंटेलिजेंस के लिए ऑपरेशन्स विंग एक साथ काम करेंगी।
3. होक्स ईमेल सेल : वीपीएन या स्पूफिंग के जरिये स्कूलों/दफ्तरों को मिलने वाले फर्जी बम ईमेल की जांच के लिए इसमें एक विशेष ‘होक्स बम ईमेल इन्वेस्टिगेशन सेल’ भी सक्रिय किया जा रहा है।
4. स्मार्ट रिस्पांस ग्रिड : यह सिस्टम केंद्रीय गृह मंत्रालय के आई4सी (भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र) और देश के सभी प्रमुख बैंकों के सर्वरों से सीधे संवाद करेगा।
देश में अपनी तरह का पहला प्रोजेक्ट
इस मेगा प्रोजेक्ट का सबसे क्रांतिकारी कदम यह है कि इसे सड़कों की निगरानी करने वाले अत्याधुनिक सी4आई नर्व सेंटर के साथ सीधे बैकएंड पर लिंक किया जा रहा है। इस एकीकरण के बाद जमीनी सुरक्षा और साइबर जासूसी की ताकतें एक साथ मिलकर काम करेंगी। इस अभेद्य डिजिटल चक्रव्यूह के लागू होते ही दिल्ली पुलिस तकनीकी स्तर पर संभवत: देश की पहली पुलिस बन जाएगी, जिसके पास फिजिकल और डिजिटल स्पेस को एक साथ कंट्रोल करने की लाइव क्षमता होगी। इस प्रोजेक्ट का मूल आधार यह है कि अब पुलिस की साइबर विंग अलग-थलग काम नहीं करेगी।
