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डॉलर वाले देश में खाली बोतलों का भी है मोल, भारतीय महिला ने बताया अमेरिका के कबाड़ी सिस्टम का सच

अमेरिका में ऐसे काम करते हैं कबाड़़ीवाले?Image Credit source: Instagram/Chillout_1588_usa

भारत में कबाड़ी की आवाज शायद ही किसी ने न सुनी हो. गली-मोहल्लों में लोहा ले लो, रद्दी-पेपर दे दो की आवाज लगाते हुए कबाड़ी घर-घर पहुंचते हैं. लोग पुराने अखबार, प्लास्टिक की बोतलें और बेकार सामान देकर कुछ पैसे कमा लेते हैं. लेकिन अमेरिका में कबाड़ इकट्ठा करने का तरीका थोड़ा अलग है. यहां खाली बोतलों से पैसे कमाने का सिस्टम काफी व्यवस्थित है. इसी अंतर को दिखाने वाला एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में है.

इंस्टाग्राम अकाउंट @chillout_1588_usa पर शेयर किए गए इस वीडियो में भारतीय मूल की कंटेंट क्रिएटर स्वाति अग्रवाल गुप्ता अमेरिका में कबाड़ इकट्ठा करने के तरीके के बारे में बताती हैं. यह अकाउंट अमेरिका में रहने वाले भारतीयों और वहां जाने की तैयारी कर रहे लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी जानकारी देता है. वीडियो में स्वाति बताती हैं कि भारत की तरह अमेरिका में कबाड़ी गली-गली घूमकर आवाज नहीं लगाते, बल्कि वहां बोतलें इकट्ठा करने वाले लोगों को कैनर्स कहा जाता है.

अमेरिका में कूड़े से भी होती है कमाई!

स्वाति के मुताबिक, अमेरिका में कुछ लोग घरों के बाहर रखे कूड़े से इस्तेमाल लायक सामान चुनते हैं. खासतौर पर वे पानी और सोडा की खाली प्लास्टिक बोतलें और कैन इकट्ठा करते हैं. न्यूयॉर्क में पात्र बोतल या कैन लौटाने पर 5 सेंट यानी 0.05 डॉलर मिलते हैं. ऐसे में जो लोग दिनभर बड़ी संख्या में बोतलें जमा करते हैं, वे इन्हें लौटाकर कुछ कमाई कर सकते हैं.

स्वाति अपने इलाके में आने वाली एक बुजुर्ग महिला और एक अन्य व्यक्ति का भी जिक्र करती हैं. उनके मुताबिक, महिला नियमित रूप से बोतलें इकट्ठा करती हैं और उन्हें अपनी ट्रॉली में रखती जाती हैं. दिनभर मेहनत करने के बाद वह शाम को इन बोतलों को जमा करके पैसे हासिल करती हैं. अमेरिका में इस प्रक्रिया की खास बात यह है कि बोतलों को कबाड़ की तरह तौला नहीं जाता. पात्र बोतलों और कैन को सुपरमार्केट के पास लगी रिवर्स वेंडिंग मशीन में डाला जाता है. मशीन उन्हें एक-एक करके स्वीकार करती है और बदले में एक पर्ची देती है. इसके बाद पर्ची को तय काउंटर पर जमा करके पैसे लिए जा सकते हैं. इससे बोतलें लौटाने का काम आसान और व्यवस्थित हो जाता है.

स्वाति बताती हैं कि वह भी अपने इलाके में बोतलें इकट्ठा करने वाली महिला की मदद करती हैं और उन्हें खाली बोतलें दे देती हैं. वीडियो में वह मजाकिया अंदाज में कहती हैं कि अमेरिका में कबाड़ बेचने का तरीका देखकर फुल डिजिटल इंडिया से आगे वाली फीलिंग आती है. साथ ही वह यह भी कहती हैं कि डॉलर की दुनिया में रहने के बावजूद देशी अंदाज में मिलने वाली दुआओं की अहमियत अलग है.

वीडियो सामने आने के बाद कई यूजर्स अमेरिका के इस सिस्टम की तारीफ कर रहे हैं. कुछ लोगों को मशीन के जरिए बोतलें लौटाने का तरीका काफी सुविधाजनक लगा, तो कुछ ने भारत और अमेरिका के कबाड़ी सिस्टम की तुलना की. भारत में जहां कबाड़ी आवाज लगाकर लोगों तक पहुंचते हैं, वहीं अमेरिका में बोतलों को लौटाने के लिए मशीनों और तय नियमों की मदद ली जाती है.

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दरअसल, अमेरिका के कई राज्यों में बोतल डिपॉजिट सिस्टम लागू है. इसके तहत कुछ पात्र बोतलों और कैन पर जमा राशि ली जाती है, जिसे वापस करने पर उपभोक्ता पैसे हासिल कर सकते हैं. हालांकि, नियम और रकम राज्य के हिसाब से अलग-अलग हो सकते हैं. यही व्यवस्था उन लोगों के लिए कमाई का जरिया बन सकती है, जो खाली बोतलें इकट्ठा करके लौटाते हैं. ये वीडियो दिखाता है कि रोजमर्रा में बेकार समझी जाने वाली चीजें भी सही व्यवस्था के जरिए कमाई का साधन बन सकती हैं. साथ ही, यह भारत और अमेरिका में रीसाइक्लिंग के तरीकों के बीच का दिलचस्प अंतर भी सामने लाता है.

यहां देखिए वीडियो

आयुष कुमार

आयुष कुमार

आयुष कुमार, टीवी9 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं. अशोक और चाणक्य की धरती बिहार से हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की तालीम हासिल की है. पत्रकारिता में तीन साल से तिल को बिना ताड़ बनाए किसी भी सोशल मुद्दे को 360 डिग्री समझाने की कोशिश करते हैं. अमर उजाला, फिरकी डॉट इन से अपने पत्रकारीय सफर की शुरुआत की है. पाठकों तक सरल शब्दों में खबरें पहुंचाना उद्देश्य रहा है. लेखन की इस दुनिया में दिलचस्पी इसलिए बढ़ गई, क्योंकि बचपन से ही काफी ज्यादा बातूनी रहे हैं. फिलहाल, टीवी9 में फीचर राइटिंग करते हुए सोशल मीडिया की नब्ज पकड़ने में माहिर हो गए है. अजीबोगरीब खबरों को गजब तरीके से लिखकर आप सबके सामने पेश करते हैं.

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