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पहली कॉर्पोरेट नौकरी में Gen Z लड़की के छूटे पसीने, बोली- ‘मैंने ये सब झेलने के लिए जॉइन नहीं किया था’

ऑफिस के सख्त नियम?Image Credit source: pixabay

आजकल Gen Z की सोच, काम करने के तरीके और जिंदगी को लेकर उनकी उम्मीदों पर अक्सर चर्चा होती रहती है. इसी बीच एक Gen Z लड़की का अपनी पहली कॉर्पोरेट नौकरी को लेकर रिएक्शन सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है. लड़की को ऑफिस के सख्त नियम, लंच का तय समय, कम छुट्टियां और मैनेजर का रवैया कुछ ऐसा लगा कि वह नौकरी के शुरुआती दिनों में ही परेशान हो गई. उसकी परेशानी सुनकर उसकी कजिन भी अपनी हंसी नहीं रोक पाई.

यह पूरा मामला शीतल नाम की एक महिला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किया है. उन्होंने बताया कि उनकी कजिन ने हाल ही में कॉर्पोरेट नौकरी शुरू की है. नई नौकरी से उसे काफी उम्मीदें थीं, लेकिन ऑफिस के तौर-तरीकों को समझने के बाद उसका नजरिया बदलने लगा. उसे सबसे ज्यादा हैरानी इस बात पर हुई कि ऑफिस में लंच करने का भी एक तय समय है.

कॉर्पोरेट नौकरी की हकीकत देख घबराई Gen Z?

शीतल के मुताबिक, उनकी कजिन ने फोन करके बताया कि ऑफिस में सभी कर्मचारियों को एक निश्चित समय पर ही खाना खाने की इजाजत है. उसने सवाल किया कि अगर उसे तय समय से पहले भूख लग जाए तो वह क्या करेगी. इतना ही नहीं, लंच के लिए सिर्फ 45 मिनट मिलते हैं. यानी खाना खाने से लेकर थोड़ा आराम करने तक, हर चीज के लिए समय का हिसाब रखना पड़ता है.

लड़की की शिकायत सिर्फ लंच ब्रेक तक ही सीमित नहीं थी. उसे हर महीने केवल तीन पेड लीव मिलती हैं. इसके अलावा, ऑफिस पहुंचने में अधिकतम 10 मिनट की देरी की ही छूट है. उसकी शिफ्ट नौ घंटे की है और उसे पूरे दिन काम करना पड़ता है. नई नौकरी में इन नियमों के बीच तालमेल बैठाना उसके लिए मुश्किल हो रहा था. उसे लगने लगा कि ऑफिस की जिंदगी उतनी आसान नहीं है, जितनी उसने सोची थी. इसी बीच मैनेजर के साथ हुई एक बातचीत ने उसकी परेशानी और बढ़ा दी.

शीतल ने बताया कि उनकी कजिन के मैनेजर ने उससे कहा था कि अगर उसे कोई काम समझ नहीं आता है, तो वह मदद मांग सकती है. लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि काम में गलतियों से बचना होगा, क्योंकि प्रोजेक्ट काफी अहम है. मैनेजर की इस बात के बाद लड़की ने अपनी परेशानी जाहिर करते हुए कहा कि आखिर वह इस माहौल में कैसे टिक पाएगी.

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उसने मजाकिया अंदाज में कहा कि उसकी मेंटल हेल्थ की हालत खराब हो रही है, चेहरे की चमक जा रही है और जल्द ही आंखों के नीचे डार्क सर्कल भी आ जाएंगे. उसका कहना था कि उसने नौकरी के लिए इन सब चीजों को झेलने के बारे में नहीं सोचा था. शीतल ने बताया कि अपनी कजिन की बातें सुनकर वह हंसते-हंसते परेशान हो गईं. हालांकि, सोशल मीडिया पर इस पोस्ट को लेकर लोगों की अलग-अलग राय सामने आई.

यहां देखिए पोस्ट

आयुष कुमार

आयुष कुमार

आयुष कुमार, टीवी9 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं. अशोक और चाणक्य की धरती बिहार से हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की तालीम हासिल की है. पत्रकारिता में तीन साल से तिल को बिना ताड़ बनाए किसी भी सोशल मुद्दे को 360 डिग्री समझाने की कोशिश करते हैं. अमर उजाला, फिरकी डॉट इन से अपने पत्रकारीय सफर की शुरुआत की है. पाठकों तक सरल शब्दों में खबरें पहुंचाना उद्देश्य रहा है. लेखन की इस दुनिया में दिलचस्पी इसलिए बढ़ गई, क्योंकि बचपन से ही काफी ज्यादा बातूनी रहे हैं. फिलहाल, टीवी9 में फीचर राइटिंग करते हुए सोशल मीडिया की नब्ज पकड़ने में माहिर हो गए है. अजीबोगरीब खबरों को गजब तरीके से लिखकर आप सबके सामने पेश करते हैं.

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