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न पैसे खर्च किए, न कोई जुगाड़! शख्स ने बताया कैसे एयर इंडिया एक्सप्रेस में दो बार अपग्रेड हो गई उसकी सीट

फ्लाइट में फ्री सीट अपग्रेड चाहिए?Image Credit source: X/@narayananh

चेन्नई के रहने वाले एक शख्स ने अपने सफर का ऐसा अनुभव सोशल मीडिया पर शेयर किया है, जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया. उनका दावा है कि सिर्फ अच्छे व्यवहार और विनम्रता के दम पर उन्हें एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट में दो बार बेहतर सीट मिल गई और इसके लिए उन्हें कोई अतिरिक्त पैसे भी नहीं देने पड़े. उनकी पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर लोग इस बात पर चर्चा करने लगे कि क्या एयरलाइन स्टाफ से अच्छे से बात करना वाकई सीट अपग्रेड पाने में मदद कर सकता है.

X यूजर नारायणन हरिहरन ने अपने अनुभव को एक तरह का ‘फ्री ट्रैवल हैक’ बताया. उन्होंने बताया कि शुरुआत में उन्हें फ्लाइट में 27B सीट मिली थी. इसके बाद उन्होंने चेक-इन काउंटर पर मौजूद महिला स्टाफ से मुस्कुराकर बात की, उन्हें नाम से संबोधित किया और उनके दिन के बारे में पूछा. इसके बाद उन्होंने बेहद सामान्य और विनम्र तरीके से बेहतर सीट के लिए अनुरोध किया.

चेन्नई के शख्स का ‘फ्री ट्रैवल हैक’

नारायणन के मुताबिक, उनकी बात मान ली गई और उन्हें 14F यानी इमरजेंसी एग्जिट रो वाली सीट मिल गई. आम सीट के मुकाबले यह सीट ज्यादा आरामदायक मानी जाती है, क्योंकि यहां पैरों के लिए अधिक जगह होती है, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. नारायणन ने बताया कि उन्होंने एयरपोर्ट पर बोर्डिंग गेट के पास भी एक बार फिर इसी तरीके को आजमाने का फैसला किया. उन्होंने वहां मौजूद स्टाफ से भी उसी तरह विनम्रता से बात की और सीट बदलने का अनुरोध किया. इस बार भी उन्हें निराश नहीं होना पड़ा. उन्हें 1F सीट दे दी गई.

अपने पोस्ट में उन्होंने बताया कि उन्हें क्यों लगता है कि यह तरीका काम कर गया. उनके मुताबिक, एयरलाइन स्टाफ को पूरे दिन अलग-अलग यात्रियों से डील करना पड़ता है और कई बार उन्हें परेशान या नाराज यात्रियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में अगर कोई यात्री शांति से और अच्छे व्यवहार के साथ बात करे, तो उसकी मदद करना स्टाफ के लिए आसान हो सकता है.

नारायणन की पोस्ट पर कई लोगों ने अपने अनुभव भी शेयर किए. एक यूजर ने बताया कि सेफ्टी चेक्स के दौरान CISF जवान से नॉर्मल बातचीत करने पर उसका मूड भी अच्छा हो गया. यूजर ने कहा कि यात्रियों से उन्हें अक्सर सिर्फ सामान निकालने या जांच से जुड़ी बातें ही सुनने को मिलती हैं, इसलिए किसी का सामान्य तरीके से बातचीत करना उन्हें अच्छा लगा.

एक अन्य यूजर ने दावा किया कि अगर फ्लाइट में सीट उपलब्ध हो, तो चेक-इन स्टाफ पोलाइट तरीके से रिक्वेस्ट करते हुए मुफ्त में सीट अपग्रेड कर सकता है. उसने बताया कि एक बार लाइन में उसके पीछे करीब 15 लोग होने के बावजूद उसे बेहतर सीट मिल गई थी. कुछ लोगों ने कहा कि वे भी अलग-अलग एयरलाइंस में इसी तरह का एक्सपीरियंस कर चुके हैं.

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एक यूजर ने लिखा कि वह इंडिगो में भी स्टाफ से हमेशा अच्छे से बात करता है और उसका अनुभव अच्छा रहा है. वहीं, एक अन्य व्यक्ति ने पूछा कि क्या यही तरीका इंडिगो में भी काम करता है, क्योंकि उसका अनुभव कुछ अलग रहा था. हालांकि, इस पूरी चर्चा के बीच एक जरूरी बात भी सामने आई. एक यूजर ने कहा कि यह तरीका तभी काम कर सकता है, जब फ्लाइट में सीट उपलब्ध हो और विमान पूरी तरह भरा हुआ न हो. यानी सिर्फ विनम्रता से बात करने भर से सीट अपग्रेड की कोई गारंटी नहीं है.

यहां देखिए पोस्ट

आयुष कुमार

आयुष कुमार

आयुष कुमार, टीवी9 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं. अशोक और चाणक्य की धरती बिहार से हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की तालीम हासिल की है. पत्रकारिता में तीन साल से तिल को बिना ताड़ बनाए किसी भी सोशल मुद्दे को 360 डिग्री समझाने की कोशिश करते हैं. अमर उजाला, फिरकी डॉट इन से अपने पत्रकारीय सफर की शुरुआत की है. पाठकों तक सरल शब्दों में खबरें पहुंचाना उद्देश्य रहा है. लेखन की इस दुनिया में दिलचस्पी इसलिए बढ़ गई, क्योंकि बचपन से ही काफी ज्यादा बातूनी रहे हैं. फिलहाल, टीवी9 में फीचर राइटिंग करते हुए सोशल मीडिया की नब्ज पकड़ने में माहिर हो गए है. अजीबोगरीब खबरों को गजब तरीके से लिखकर आप सबके सामने पेश करते हैं.

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