जांचकर्ताओं ने बताया कि पैसे को सबसे पहले महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के चार बैंक खातों में भेजा गया था और हर खाते में एक से दो करोड़ रुपये हस्तांतरित किए गए थे। उन्होंने बताया कि बाद में लगभग 30 से 40 खातों में धनराशि भेजी गई। जांचकर्ताओं ने बताया कि वे मामले की हर पहलू से जांच में जुटे हैं।
नरेश गुजराल ने मामले पर कहा कि धोखाधड़ी की तुरंत रिपोर्ट करने से अधिकारियों को ठगी हुई रकम के एक बड़ा हिस्से के लेन-देन पर रोक लगाने में मदद मिली। उन्होंने कहा, ‘‘मेरी कंपनी और हमारे सीएफओ इस धोखाधड़ी का शिकार हुए थे। मैं शहर से बाहर था और अब भी बाहर हूं। हालांकि, इस बात का उल्लेख करना जरूरी है कि चूंकि हमने साइबर अपराध शाखा को तुरंत इस अपराध की सूचना दी, इसलिए उन्होंने हमें 70 प्रतिशत से ज्यादा रकम वापस पाने में मदद की। अधिकारियों को और भी रकम वापस मिलने की उम्मीद है।’’

























