viral

प्रकृति का अद्भुत करिश्मा है ये हेवन लेक, जहां ज्वालामुखी, बर्फ और रहस्य एक साथ नजर आते हैं

हेवन लेक का रहस्यImage Credit source: Getty Images

दुनिया में ऐसी कई जगहें हैं जो अपनी खूबसूरती के साथ-साथ रहस्यों के लिए भी मशहूर हैं. इन्हीं में से एक है हेवन लेक, जिसे चीन में तियांची कहा जाता है. यह झील चीन और उत्तर कोरिया की सीमा पर स्थित है और अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ वैज्ञानिकों और पर्यटकों, दोनों को अट्रैक्ट करती है. खास बात यह है कि यह कोई साधारण झील नहीं, बल्कि एक विशाल ज्वालामुखी के मुहाने पर बनी क्रेटर लेक है. हेवन लेक माउंट चांगबाईशान की चोटी पर करीब 7,200 फीट की ऊंचाई पर मौजूद है. यह ज्वालामुखी लाखों साल पहले हुए कई बड़े विस्फोटों के बाद बना था. यूनेस्को के अनुसार, यह उत्तर-पूर्व एशिया की सबसे ऊंची और सबसे बड़ी क्रेटर लेक मानी जाती है. हाल ही में मार्च में प्रकाशित एक साइंटिफिक रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि यह चीन की सबसे गहरी झील है. इसकी अधिकतम गहराई करीब 1,224 फीट दर्ज की गई है, जबकि इसका टोटल एरिया लगभग 9.2 वर्ग किलोमीटर है.

इस झील की सबसे खास बात इसका प्राकृतिक नजारा है. चारों ओर फैली 16 पहाड़ियां इसे एक प्राकृतिक कटोरे जैसा रूप देती हैं. साल के अलग-अलग मौसमों में इसका रंग और आसपास का सीन बदलता रहता है. सर्दियों में यह इलाका बर्फ की सफेद चादर से ढक जाता है, जबकि गर्मियों में यहां हरियाली और साफ नीला पानी देखने वालों का मन मोह लेता है. हेवन लेक जिस जगह पर बनी है, वह एक काल्डेरा है. काल्डेरा उस बड़े गड्ढे को कहा जाता है जो किसी ज्वालामुखी के भीषण विस्फोट के बाद बनता है. माना जाता है कि माउंट चांगबाईशान में सबसे विनाशकारी विस्फोट वर्ष 946 ईस्वी में हुआ था. इस घटना को “मिलेनियम इरप्शन” के नाम से जाना जाता है और इसे आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े ज्वालामुखीय विस्फोटों में गिना जाता है. इस विस्फोट ने पूरे इलाके की geographical बनावट बदल दी थी.

प्राकृतिक बनावट सिर्फ नहीं है कारण

वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे भी पहले, करीब 70 हजार से 40 हजार साल पहले हुए एक प्राचीन विस्फोट के बाद इस पर्वत की चोटी पर पानी जमा होना शुरू हुआ था. धीरे-धीरे यहां एक विशाल झील का निर्माण हुआ. समय के साथ कई बार इसका जलस्तर घटा और बढ़ा. बारिश, बर्फ के पिघलने और अन्य प्राकृतिक प्रक्रियाओं ने इस झील को लगातार नया रूप दिया. इस क्षेत्र के नीचे आज भी एक एक्टिव जियोथर्मल सिस्टम मौजूद है. यानी धरती के भीतर गर्मी और दबाव लगातार काम कर रहे हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार, फॉल्ट लाइनों के जरिए भूमिगत पानी ऊपर की ओर आता रहता है, जिससे झील के जलस्तर पर भी असर पड़ता है. यही वजह है कि यह इलाका भूवैज्ञानिकों के लिए शोध का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है.

हेवन लेक सिर्फ अपनी प्राकृतिक बनावट के कारण ही नहीं, बल्कि इससे जुड़ी रहस्यमयी कहानियों के कारण भी चर्चा में रहती है. साल 2000 के शुरुआती वर्षों में इस झील को लेकर कई चौंकाने वाले दावे सामने आए थे. कई लोगों ने दावा किया कि उन्होंने झील के भीतर एक विशाल और अजीब जीव देखा है. कुछ प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि उस जीव का सिर घोड़े जैसा दिखाई देता था और उसका शरीर पानी में तेजी से तैरता था. इन दावों ने दुनिया भर के लोगों का ध्यान खींचा और झील को रहस्यमयी जगहों की सूची में शामिल कर दिया.

हालांकि वैज्ञानिक इन दावों से सहमत नहीं हैं. उनका कहना है कि इतनी ऊंचाई पर स्थित और बेहद ठंडे पानी वाली झील में किसी बड़े जीव का लंबे समय तक जीवित रह पाना लगभग असंभव है. अब तक ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है जो इन रहस्यमयी जीवों की मौजूदगी की पुष्टि करता हो. इसलिए ज्यादातर विशेषज्ञ इन्हें लोककथाओं या लोगों की कल्पना का हिस्सा मानते हैं. यूनेस्को का कहना है कि माउंट चांगबाईशान दुनिया के सबसे अच्छी तरह सुरक्षित स्ट्रैटोवोल्केनो में से एक है. यहां ज्वालामुखी के विकास और उसके अलग-अलग विस्फोटों के स्पष्ट प्रमाण आज भी मौजूद हैं. इसी वजह से इसे कई बार “ओपन एयर क्लासरूम” भी कहा जाता है. यहां आने वाले वैज्ञानिक धरती के इतिहास और ज्वालामुखीय गतिविधियों को समझने के लिए लगातार स्टडी करते रहते हैं.

यह भी पढ़ें: OMG! शिकार खाते समय मगरमच्छ क्यों बहाता है आंसू? जानें आंखों से पानी आने का असली कारण

इस पर्वत का महत्व सिर्फ विज्ञान तक सीमित नहीं है. उत्तर कोरिया में इसे माउंट पेक्टू कहा जाता है, जिसका अर्थ है “सफेद चोटी वाला पहाड़”. वहीं चीन में इसे चांगबाईशान कहा जाता है, जिसका मतलब है “हमेशा सफेद रहने वाला पहाड़”. दोनों देशों की संस्कृति और इतिहास में इस पर्वत का खास स्थान है. यही वजह है कि अतीत में इस इलाके को लेकर चीन, उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच कई बार मतभेद भी सामने आए.

आयुष कुमार

आयुष कुमार

आयुष कुमार, टीवी9 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं. अशोक और चाणक्य की धरती बिहार से हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की तालीम हासिल की है. पत्रकारिता में तीन साल से तिल को बिना ताड़ बनाए किसी भी सोशल मुद्दे को 360 डिग्री समझाने की कोशिश करते हैं.

अमर उजाला, फिरकी डॉट इन से अपने पत्रकारीय सफर की शुरुआत की है. पाठकों तक सरल शब्दों में खबरें पहुंचाना उद्देश्य रहा है. लेखन की इस दुनिया में दिलचस्पी इसलिए बढ़ गई, क्योंकि बचपन से ही काफी ज्यादा बातूनी रहे हैं. फिलहाल, टीवी9 में फीचर राइटिंग करते हुए सोशल मीडिया की नब्ज पकड़ने में माहिर हो गए है. अजीबोगरीब खबरों को गजब तरीके से लिखकर आप सबके सामने पेश करते हैं.Read More

What's your reaction?

Leave A Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Posts