International
oi-Sumit Jha
Pakistani
Paramilitary
Attack:
बलूचिस्तान
लिबरेशन
फ्रंट
(BLF)
ने
सोमवार
(20
अक्टूबर)
को
बलूचिस्तान
के
अशांत
मंड
इलाके
में
एक
सुनियोजित
घात
लगाकर
(Ambush)
हमला
किया,
जिसमें
पाकिस्तानी
अर्धसैनिक
बल
(Pakistani
Paramilitary
Force)
के
पांच
जवान
मौके
पर
ही
मारे
गए,
जबकि
दो
अन्य
गंभीर
रूप
से
घायल
हो
गए।
यह
हमला
दोपहर
करीब
1:00
बजे
मंड
क्षेत्र
में
माहिर
और
रुदिग
नामक
स्थानों
के
बीच
हुआ।
यह
घटना
बलूचिस्तान
में
सक्रिय
अलगाववादी
समूहों
द्वारा
सुरक्षा
बलों
पर
बढ़ते
हमलों
की
श्रृंखला
का
नवीनतम
उदाहरण
है,
जिसने
इस्लामाबाद
की
आंतरिक
सुरक्षा
चुनौतियों
को
बढ़ा
दिया
है।
बीएलएफ
ने
इस
घातक
हमले
की
जिम्मेदारी
ली
है।

मंड
इलाके
में
घात
लगाकर
हमला
सोमवार
दोपहर
को
बलूचिस्तान
के
मंड
इलाके
में
माहिर
और
रुदिग
के
बीच
पाकिस्तानी
अर्धसैनिक
बल
का
एक
वाहन
गुजर
रहा
था,
जिसे
बलूचिस्तान
लिबरेशन
फ्रंट
के
आतंकवादियों
ने
निशाना
बनाया।
आतंकवादियों
ने
पहले
से
ही
योजनाबद्ध
तरीके
से
घात
लगाकर
हमला
किया,
जिससे
जवानों
को
संभलने
का
मौका
नहीं
मिला।
अचानक
हुए
इस
हमले
में
पांच
जवान
तुरंत
मारे
गए,
जबकि
दो
जवान
गंभीर
रूप
से
घायल
हो
गए,
जिन्हें
इलाज
के
लिए
ले
जाया
गया
है।
इस
हमले
ने
क्षेत्र
में
सक्रिय
अलगाववादी
समूहों
की
बढ़ती
सैन्य
क्षमता
और
दुस्साहस
को
दर्शाया
है।
पाक
सुरक्षा
बलों
पर
कई
बार
हो
चुका
है
हमला
यह
हमला
बलूचिस्तान
लिबरेशन
आर्मी
(BLA)
और
बलूचिस्तान
लिबरेशन
फ्रंट
(BLF)
जैसे
अलगाववादी
संगठनों
द्वारा
किए
गए
पिछले
हमलों
की
याद
दिलाता
है.
पिछले
कुछ
महीनों
में,
इन
समूहों
ने
रेलवे
ट्रैक
और
सुरक्षा
बलों
को
निशाना
बनाया
है।
- सितंबर:
बलूचिस्तान
के
मस्तुंग
के
दश्त
इलाके
में
रेलवे
ट्रैक
पर
हुए
विस्फोट
ने
जाफ़र
एक्सप्रेस
के
एक
डिब्बे
को
नष्ट
कर
दिया,
जिससे
12
यात्री
घायल
हो
गए।
- 10
अगस्त:
मस्तुंग
ज़िले
में
एक
आईईडी
विस्फोट
के
कारण
ट्रेन
के
छह
डिब्बों
के
पटरी
से
उतरने
से
चार
लोग
घायल
हुए
थे।
- 4
अगस्त:
कोलपुर
के
पास
क्लीयरेंस
के
लिए
भेजे
गए
पायलट
इंजन
पर
भी
गोलीबारी
हुई
थी।
इनमें
से
कई
बाद
के
हमलों
की
ज़िम्मेदारी
प्रमुख
अलगाववादी
समूह
बलूच
लिबरेशन
आर्मी
(बीएलए)
ने
ली
थी,
जो
इस
क्षेत्र
में
पाकिस्तान
के
खिलाफ
एक
हिंसक
अभियान
चला
रहा
है।
क्षेत्र
में
बढ़ते
तनाव
का
कारण
बलूचिस्तान
लंबे
समय
से
अलगाववादी
आंदोलनों
का
केंद्र
रहा
है।
यहां
के
स्थानीय
समूह
संसाधनों
पर
नियंत्रण
और
बेहतर
राजनीतिक
प्रतिनिधित्व
की
मांग
को
लेकर
हथियारबंद
संघर्ष
कर
रहे
हैं।
चीन-पाकिस्तान
आर्थिक
गलियारे
(CPEC)
परियोजनाओं
की
उपस्थिति
ने
भी
इन
अलगाववादी
समूहों
के
हमले
तेज
कर
दिए
हैं,
जो
इन
परियोजनाओं
को
बलूच
लोगों
के
शोषण
के
रूप
में
देखते
हैं।
यह
नवीनतम
हमला
इस
अस्थिर
क्षेत्र
में
सुरक्षा
स्थिति
को
नियंत्रित
करने
में
पाकिस्तानी
सरकार
के
सामने
आने
वाली
गंभीर
चुनौतियों
को
उजागर
करता
है।

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