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भारत को मिलने वाली है UNSC की वीटो पावर वाली स्थायी सीट, इस देश ने कर दिया समर्थन | india unsc permanent membership france support un security council reform debate g4 ign process

International

oi-Sumit Jha


India
UNSC
Permanent
Membership:

80
साल
बाद
संयुक्त
राष्ट्र
संघ
(UN)
के
ढांचे
में
बड़े
फेरबदल
की
सुगबुगाहट
तेज
हो
गई
है,
और
इस
बार
भारत
के
लिए
स्थायी
सदस्यता
की
राह
आसान
दिख
रही
है।
बुधवार
को
UNSC
में
‘रिफॉर्म’
पर
शुरू
हुई
बहस
से
मजबूत
संकेत
मिल
रहे
हैं
कि
अगर
सहमति
बनती
है,
तो
भारत
को
वीटो
पावर
के
साथ
यूएन
की
स्थायी
सदस्यता
मिल
सकती
है।

दूसरे
विश्व
युद्ध
के
बाद
1945
में
गठित
यूएन
का
लक्ष्य
दुनिया
में
शांति
कायम
करना
था।
वर्तमान
में
5
स्थायी
और
10
अस्थायी
सदस्य
हैं।
इस
बार
फ्रांस
ने
खुलकर
भारत
की
स्थायी
सदस्यता
का
समर्थन
किया
है,
जो
ब्रिटेन
और
रूस
के
बाद
एक
महत्वपूर्ण
कदम
है।

India UNSC Permanent Membership

(AI
Image)

फ्रांस
का
सशक्त
समर्थन:
भारत
के
लिए
गेम
चेंजर

यूनाइटेड
नेशन
सुरक्षा
परिषद
(UNSC)
में
सुधारों
पर
चल
रही
बहस
के
बीच,
भारत
की
स्थायी
सदस्यता
की
दावेदारी
को
फ्रांस
का
मजबूत
समर्थन
मिला
है।
ब्रिटेन
और
रूस
लंबे
समय
से
भारत
का
समर्थन
कर
रहे
थे,
लेकिन
अब
फ्रांस
ने
भी
खुलकर
वीटो
पावर
के
साथ
भारत
को
स्थायी
सदस्यता
देने
की
वकालत
की
है।
फ्रांस
के
दूत
ने
यूएनएससी
रिफॉर्म
की
बैठक
में
अपने
संबोधन
में
कहा
कि
अंतर्राष्ट्रीय
मंच
पर
भारत
की
बढ़ती
जिम्मेदारियों
और
दुनिया
की
सबसे
बड़ी
आबादी
वाले
देश
के
रूप
में
उसकी
स्थिति
को
देखते
हुए
यह
आवश्यक
है।
यह
समर्थन
भारत
के
लिए
एक
गेम
चेंजर
साबित
हो
सकता
है,
क्योंकि
यह
भारत
की
दावेदारी
को
और
मजबूत
करता
है।


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चीन
का
अप्रत्यक्ष
समर्थन
और
जापान
पर
विरोध

UNSC
सुधारों
पर
चीन
का
रुख
हमेशा
से
भारत
के
लिए
एक
चुनौती
रहा
है,
लेकिन
इस
बार
चीन
ने
भारत
का
सीधा
विरोध
नहीं
किया
है।
चीन
की
स्थायी
दूत
ने
बैठक
में
सिर्फ
जी-4
के
जापान
का
विरोध
किया।
चीन
का
तर्क
है
कि
जापान
जिस
तरह
से
ताइवान
के
मुद्दे
पर
मुखर
है,
वह
यूएन
की
स्थायी
सदस्यता
मांगने
का
अधिकार
नहीं
रखता।
चीन
ने
जापान
पर
शांति
भंग
करने
का
आरोप
लगाते
हुए
कहा
कि
अगर
जापान
को
सदस्यता
देने
की
कोशिश
हुई
तो
वे
इसका
खुलकर
विरोध
करेंगे।
चीन
का
जापान
पर
केंद्रित
विरोध
भारत
के
लिए
एक
सकारात्मक
संकेत
माना
जा
रहा
है,
क्योंकि
यह
भारत
की
राह
में
सीधे
बाधा
नहीं
डाल
रहा
है।


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रक्षा
मंत्री
ने
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क्यों
कहा?

आईजीएन
प्रक्रिया
का
17
साल
बाद
पुनरुद्धार

संयुक्त
राष्ट्र
में
जान
फूंकने
और
सुधारों
को
आगे
बढ़ाने
के
लिए
अंतर-सरकारी
वार्ता
(IGN)
की
प्रक्रिया
को
फिर
से
शुरू
किया
गया
है,
जो
17
साल
बाद
हो
रहा
है।
इटली
और
पाकिस्तान
जैसे
देशों
के
विरोध
के
कारण
यह
प्रक्रिया
पहले
आगे
नहीं
बढ़
पाई
थी।
अब
यूएन
ने
इस
प्रक्रिया
को
फिर
से
शुरू
करने
का
फैसला
किया
है
और
कुवैत
के
प्रतिनिधि
को
इसका
नेतृत्व
सौंपा
गया
है।
इस
प्रक्रिया
का
मुख्य
लक्ष्य
उन
चार
देशों
की
दावेदारी
की
जांच
करना
है
जो
स्थायी
सदस्यता
के
लिए
सक्षम
माने
जाते
हैं
(जी-4
देशों
सहित)।
यदि
यह
प्रक्रिया
अपने
अंतिम
मुकाम
तक
पहुँचती
है,
तो
भारत
के
लिए
वीटो
पावर
के
साथ
स्थायी
सदस्यता
प्राप्त
करने
की
राह
काफी
आसान
हो
सकती
है।


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मौका?

यूएन
की
स्थायी
सदस्यता
कैसे
मिलती
है?

यूएन
की
स्थायी
सदस्यता
प्राप्त
करने
के
लिए
उसके
चार्टर
में
संशोधन
करना
होता
है,
जिसके
लिए
अनुच्छेद
108
और
अनुच्छेद
109
का
उपयोग
किया
जाता
है।
किसी
भी
देश
को
स्थायी
सदस्यता
पाने
के
लिए
दो
प्रमुख
मोर्चों
पर
समर्थन
प्राप्त
करना
होता
है।
पहला,
अनुच्छेद
109
के
तहत
उसे
वर्तमान
के
सभी
पांच
स्थायी
सदस्यों
(चीन,
अमेरिका,
रूस,
ब्रिटेन
और
फ्रांस)
का
समर्थन
प्राप्त
होना
चाहिए।
यदि
इनमें
से
कोई
भी
देश
वीटो
नहीं
करता
है,
तो
संबंधित
देश
योग्य
माना
जाता
है।
दूसरा,
अनुच्छेद
108
के
तहत
स्थायी
सदस्यता
का
प्रस्ताव
यूएन
जनरल
असेंबली
में
रखा
जाता
है,
जहाँ
193
सदस्य
देशों
में
से
दो-तिहाई
(यानी
145
देशों)
का
समर्थन
अनिवार्य
है।

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