viral

मुंबई की चमक-दमक छोड़ पहाड़ों में चुनी सुकून भरी जिंदगी, बताया हिमालय में घर बनाने के लिए कितने लाख रुपये चाहिए

उत्तराखंड में रहने वाले कपल ने बताया बजटImage Credit source: Instagram/ rg_in_the_hills

मुंबई जैसे बड़े शहर में रहना कई लोगों का सपना होता है. अच्छी नौकरी, बड़ी-बड़ी इमारतें और हर तरह की सुविधाएं यहां लोगों को अपनी ओर खींचती हैं. लेकिन शहर की तेज रफ्तार जिंदगी के साथ ट्रैफिक, भीड़ और काम का दबाव भी मिलता है. ऐसे में कुछ लोग सुकून की तलाश में शहर छोड़कर पहाड़ों का रुख कर रहे हैं. मुंबई में रहने वाले राघव और गरिमा ने भी कुछ ऐसा ही फैसला लिया. दोनों अब उत्तराखंड के नैनीताल जिले के कोटाबाग में रहते हैं और वहां होमस्टे चलाते हैं. हाल ही में राघव ने बताया कि पहाड़ों में अपना घर बनाने के लिए कितना बजट रखना चाहिए.

राघव पहले मुंबई में पायलट की नौकरी करते थे. हालांकि, कुछ समय बाद उन्होंने अपनी पत्नी गरिमा के साथ शहर की भागदौड़ से दूर रहने का फैसला किया. दोनों चाहते थे कि उनकी जिंदगी में प्रकृति के लिए ज्यादा जगह हो और वे हर दिन हरियाली, खुली हवा और शांत माहौल के बीच समय बिता सकें. इसी सोच के साथ उन्होंने उत्तराखंड के कोटाबाग को अपना नया ठिकाना बनाया.

ईंट, पत्थर या मिट्टी, कौन-सा घर बनवाना बेहतर?

अब यह कपल वहां तीन होमस्टे चलाता है, जो उनकी कमाई का जरिया हैं. इसके अलावा दोनों सोशल मीडिया पर अपनी जिंदगी से जुड़े वीडियो भी शेयर करते हैं. इन वीडियो में वे पहाड़ों में रहने के अनुभव, रोजमर्रा के खर्च और घर बनाने से जुड़ी जानकारी देते हैं. राघव ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट @rg_in_the_hills पर शेयर किए गए एक वीडियो में पहाड़ों में घर बनाने की लागत के बारे में बताया. उनके मुताबिक, घर बनवाने के लिए प्रति स्क्वायर फीट करीब 2,500 से 3,000 रुपये तक का बजट रखना चाहिए.

इस हिसाब से 1,000 स्क्वायर फीट का घर बनाने में लगभग 25 से 30 लाख रुपये खर्च हो सकते हैं. हालांकि, यह रकम घर के निर्माण का एक अनुमान है. इसमें जमीन खरीदने की कीमत और दूसरे अतिरिक्त खर्च शामिल हों, यह जरूरी नहीं है. घर कहां बनाया जा रहा है, निर्माण में कौन-सी सामग्री इस्तेमाल होगी और पहाड़ी रास्तों से सामान पहुंचाने में कितना खर्च आएगा, इन सभी बातों का कुल बजट पर असर पड़ सकता है. इसलिए घर बनाने की योजना से पहले पूरी लागत का हिसाब लगाना जरूरी है.

राघव के मुताबिक, पहाड़ों में घर बनाने के कई तरीके हैं. लोग ईंट और पत्थर से पारंपरिक मकान बनवा सकते हैं. इसके अलावा प्रीफैब्रिकेटेड घर भी एक विकल्प हैं, जिनके कुछ हिस्से पहले से तैयार करके साइट पर जोड़े जाते हैं. वहीं, मिट्टी, चूना और पुआल जैसी प्राकृतिक चीजों से भी घर बनाया जा सकता है. राघव और गरिमा की दिलचस्पी ऐसे ही घरों में है. राघव ने बताया कि वह मिट्टी का घर बनाने की तकनीक सीखने के लिए 14 दिनों की वर्कशॉप में शामिल होने की योजना बना रहे हैं. आगे चलकर दोनों अपना मिट्टी का कॉटेज भी बनाना चाहते हैं.

यह भी पढ़ें: कमरा कहें या कोठरी? 500 रुपये में शख्स ने बनाया अपना आशियाना, वायरल वीडियो देख लोगों को आई 12वीं फेल की याद

पहाड़ों में घर बनाना सिर्फ बजट तय करने तक सीमित नहीं है. वहां की जमीन, मौसम, सड़क और जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता को समझना भी जरूरी है. निर्माण के दौरान भूकंप सुरक्षा और स्थानीय परिस्थितियों का ध्यान रखना चाहिए. इसके अलावा बाजार, अस्पताल और दूसरी सुविधाएं कितनी दूर हैं, यह भी पहले जांच लेना चाहिए. राघव और गरिमा की कहानी उन लोगों के लिए दिलचस्प है, जो शहर की भागदौड़ छोड़कर प्रकृति के करीब बसना चाहते हैं. हालांकि, ऐसा फैसला लेने से पहले घर बनाने की लागत के साथ-साथ वहां रहने के खर्च और रोजमर्रा की जरूरतों का हिसाब लगाना भी जरूरी है.

यहां देखिए वीडियो

आयुष कुमार

आयुष कुमार

आयुष कुमार, टीवी9 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं. अशोक और चाणक्य की धरती बिहार से हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की तालीम हासिल की है. पत्रकारिता में तीन साल से तिल को बिना ताड़ बनाए किसी भी सोशल मुद्दे को 360 डिग्री समझाने की कोशिश करते हैं. अमर उजाला, फिरकी डॉट इन से अपने पत्रकारीय सफर की शुरुआत की है. पाठकों तक सरल शब्दों में खबरें पहुंचाना उद्देश्य रहा है. लेखन की इस दुनिया में दिलचस्पी इसलिए बढ़ गई, क्योंकि बचपन से ही काफी ज्यादा बातूनी रहे हैं. फिलहाल, टीवी9 में फीचर राइटिंग करते हुए सोशल मीडिया की नब्ज पकड़ने में माहिर हो गए है. अजीबोगरीब खबरों को गजब तरीके से लिखकर आप सबके सामने पेश करते हैं.

Read More



What's your reaction?

Leave A Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Posts