वर्क फ्रॉम होम की चमक फीकी!Image Credit source: Instagram/pc_corporategirl
पुणे की एक लड़की की इंस्टाग्राम पोस्ट इन दिनों खूब चर्चा में है, जिसमें उसने बताया कि सिर्फ दो हफ्ते फुल वर्क फ्रॉम होम करने के बाद उसे अपने हाइब्रिड रूटीन की असली कीमत समझ आई. जहां ज्यादातर लोग परमानेंट वर्क फ्रॉम होम को सपनों की जॉब मानते हैं, वहीं इस लड़की का एक्सपीरियंस कुछ अलग ही कहानी बयां करता है.
मोहिनी चव्हाण नाम की इस लड़की ने अपने इंस्टाग्राम वीडियो में बताया कि उसकी कंपनी में आमतौर पर हाइब्रिड मॉडल चलता है, लेकिन साल में दो हफ्ते ऐसे मिलते हैं जब पूरी तरह घर से काम करने की छूट होती है. वीडियो में वो कहती है, “यार, मुझे समझ ही नहीं आता कि लोग परमानेंट वर्क फ्रॉम होम कैसे कर लेते हैं. सैल्यूट है उनको! हमारे ऑफिस में साल भर में दो हफ्ते ऐसे मिलते हैं जब पूरा वर्क फ्रॉम होम करने की परमिशन होती है. बाकी टाइम तो हाइब्रिड ही रहता है, लेकिन इन दो हफ्तों में बिल्कुल घर से ही काम – मतलब परमानेंट नहीं, बस टेम्परेरी वर्क फ्रॉम होम.”
लड़की को सिखाया हाइब्रिड का महत्व
मोहिनी ने आगे बताया कि जो लोग अपने घर से दूर रहकर नौकरी करते हैं, वो इन दो हफ्तों का फायदा उठाकर अपने होमटाउन चले जाते हैं, हालांकि काम का बोझ वैसा ही बना रहता है. “तो जो लोग अपने होमटाउन से दूर रहते हैं, वो वापस अपने घर चले जाते हैं. लेकिन काम तो वही रहता है, चाहे ऑफिस से करो या घर से. इन दो हफ्तों में मुझे जो फील हुआ वो ये कि मेरा दिमाग बिल्कुल थक गया है. ऐसा लग रहा है जैसे मैं घर से बाहर निकली ही नहीं. बस यहीं दो हफ्ते से बैठी हूं.”
उसने ये भी कहा कि वीकेंड पर भी कुछ खास बदलाव नहीं आया. “वीकेंड पर भी मैं सिर्फ एक दिन बाहर गई. बाकी हर दिन वही रूटीन – ऑफिस का काम तो हो ही रहा है, खाना-पीना, वही सारी चीजें बार-बार रिपीट हो रही हैं.” मोहिनी के लिए हाइब्रिड मॉडल ही सबसे बेहतर बैलेंस देता है कि घर से काम करने और बाहर निकलने के बीच का.
“वैसे तो हाइब्रिड सिस्टम ही सबसे बेस्ट है जो नॉर्मली चलता है – मतलब ये दो हफ्ते बाद फिर से शुरू हो जाएगा. हफ्ते में दो दिन ऑफिस जाओ, कुछ नया खाओ, दोस्तों से मिलो, कुछ नया सीखो, बातें करो, चीजें शेयर करो… तो अच्छा फील होता है. थोड़ा घूमना-फिरना भी हो जाता है. तो जो लोग परमानेंट वर्क फ्रॉम होम करते हैं, उनको सैल्यूट है. पता नहीं वो कैसे मैनेज करते हैं. सैल्यूट.”
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वीडियो के ऊपर लिखा टेक्स्ट भी दिलचस्प था – “सैल्यूट टू परमानेंट वर्क फ्रॉम होम एम्प्लॉइज़.” इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है कि आखिर वर्क फ्रॉम होम सच में उतना आसान है या नहीं जितना दिखता है, और क्यों ऑफिस जाकर लोगों से मिलना-जुलना भी मेंटल हेल्थ के लिए उतना ही जरूरी है जितना काम खुद.
यहां देखिए वीडियो



















