वर्क फ्रॉम फ्लैट कर रहे शख्स ने सुनाई दिल की बात, कहा- लैपटॉप खोलो, काम करो और सो जाओ

वर्क फ्रॉम होम वायरल वी़डियो Image Credit source: Instagram/virendra.uncut

वर्क फ्रॉम होम आज लाखों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है. कई लोगों को अब घर से काम करने की ऐसी आदत हो गई है कि उन्हें दोबारा रोज ऑफिस बुलाना किसी चुनौती से कम नहीं लगता. कंपनियां तरह-तरह के नियम और तरीके अपना रही हैं, लेकिन कर्मचारियों को ऑफिस की कुर्सी तक वापस लाना आसान नहीं है. हालांकि, एक शख्स की परेशानी इससे थोड़ी अलग है. उसे वर्क फ्रॉम होम से शिकायत नहीं है, बल्कि शिकायत इस बात से है कि उसका घर आखिर घर जैसा महसूस ही नहीं होता.

वीरेंद्र नाम के एक शख्स ने इसी एहसास को एक वीडियो के जरिए शेयर किया है. उनका वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों को काफी भावुक कर रहा है. वीडियो में वीरेंद्र बताते हैं कि उनके लिए वर्क फ्रॉम होम का मतलब असल में वर्क फ्रॉम फ्लैट बनकर रह गया है. वीडियो में वह कहते हैं कि सुबह उठो, लैपटॉप खोलो और काम में लग जाओ. काम करते-करते दिन निकल जाता है और आखिर में उसी कमरे में सोना होता है. अगले दिन फिर यही सिलसिला शुरू हो जाता है. उनके मुताबिक, जब रोज का पूरा रूटीन एक ही कमरे और एक ही जगह के आसपास घूमता रहे तो उसे घर कहना थोड़ा मुश्किल लगता है.

लैपटॉप और मॉनिटर तक सिमट गई जिंदगी

वीरेंद्र की बात में असली दर्द तब नजर आता है, जब वह बताते हैं कि उनके लिए घर सिर्फ चार दीवारों या एक फ्लैट का नाम नहीं है. घर वह जगह है जहां सुबह उठते ही मां की आवाज सुनाई दे. जहां पापा अचानक पूछ लें कि खाना खाया या नहीं. जहां परिवार के लोगों की मौजूदगी से आपको महसूस हो कि आप सच में घर पर हैं. उनका कहना है कि काम खत्म करने के बाद अगर भी घर जैसा एहसास न हो तो फिर वह जगह सिर्फ एक ऑफिस जैसी लगने लगती है. उनका कमरा भी कुछ ऐसा ही है. वहां लैपटॉप और मॉनिटर लगा है, काम होता है और फिर वहीं आराम भी करना पड़ता है. फर्क बस इतना है कि ऑफिस और कमरे में मॉनिटर का साइज अलग है.

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इसीलिए वीरेंद्र कहते हैं कि उन्हें सिर्फ वर्क फ्रॉम होम नहीं चाहिए, बल्कि ऐसा घर चाहिए जहां परिवार भी साथ हो. उनकी बात सुनकर सोशल मीडिया यूजर्स भी खुद को इससे जोड़ते नजर आए. कई लोगों ने माना कि घर की असली पहचान परिवार से ही होती है.

यहां देखिए वीडियो

आयुष कुमार

आयुष कुमार, टीवी9 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं. अशोक और चाणक्य की धरती बिहार से हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की तालीम हासिल की है. पत्रकारिता में तीन साल से तिल को बिना ताड़ बनाए किसी भी सोशल मुद्दे को 360 डिग्री समझाने की कोशिश करते हैं.

अमर उजाला, फिरकी डॉट इन से अपने पत्रकारीय सफर की शुरुआत की है. पाठकों तक सरल शब्दों में खबरें पहुंचाना उद्देश्य रहा है. लेखन की इस दुनिया में दिलचस्पी इसलिए बढ़ गई, क्योंकि बचपन से ही काफी ज्यादा बातूनी रहे हैं. फिलहाल, टीवी9 में फीचर राइटिंग करते हुए सोशल मीडिया की नब्ज पकड़ने में माहिर हो गए है. अजीबोगरीब खबरों को गजब तरीके से लिखकर आप सबके सामने पेश करते हैं.Read More



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