वीरेंद्र बसोया ने कैसे खड़ा किया ड्रग्स का इंटरनेशनल कारोबार? दिल्ली के पिलंजी गांव में है आलीशान बंगला, Ncr Hindi News

इंटरनेशनल ड्रग्स सिंडिकेट के सरगना वीरेंद्र बसोया दिल्ली के पिलंजी गांव का रहने वाला है। उसका यहां आलीशान बंगला है, लेकिन ग्रामीण कैमरे के सामने खुलकर उसका नाम लेने और पता बताने तक से बचते नजर आए।

आशीष सिंह, नई दिल्ली

बारिश के बीच शुक्रवार को पिलंजी गांव की चौपालों पर बुजुर्गों में धीमी आवाज में वीरेंद्र बसोया को भारत लाए जाने की चर्चा तो थी, लेकिन कोई भी कैमरे के सामने उसका नाम लेने को तैयार नहीं था। एक दुकानदार ने कहा कि वह गांव का जरूर है, लेकिन ऐसे लोगों को नहीं जानता। ग्रामीण उसके घर का पता बताने से भी बचते नजर आए।

गांव में आलीशान बंगला

गली में हुक्का पी रहीं एक बुजुर्ग महिला ने सहमते हुए बताया, वीरेंद्र का परिवार यहीं रहता है। पिता की मौत हो चुकी है, मां किसी से बात नहीं करती। हमने दोनों भाइयों को यहीं खेलते देखा है। एक बेटे की शादी हो चुकी है, दूसरा कहां है पता नहीं। इनका पूरा परिवार जेल जाएगा। हम सीधे लोग हैं, ज्यादा बोलेंगे तो हमें भी जेल हो सकती है। सरोजिनी नगर के पीछे पिलंजी की एक संकरी गली में वीरेंद्र का घर गांव के बाकी मकानों से बिल्कुल अलग और भव्य दिखता है। हर मंजिल पर एसी, दरवाजों पर इलेक्ट्रॉनिक लॉक और चारों तरफ सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। पड़ोस की एक महिला ने बताया कि परिवार के साथ कुछ किरायेदार भी यहां रहते हैं। एक स्थानीय युवक ने बताया कि पहले वीरेंद्र का परिवार गांव के हर कार्यक्रम में शामिल होता था, लेकिन कुछ साल पहले अचानक उनकी जीवनशैली बहुत खर्चीली और रईस हो गई।

पाकिस्तान कनेक्शन और फर्जी कंपनियों का जाल

मादक पदार्थों की सप्लाई के लिए फार्मा सलूशन सर्विसेज, आरएम बायोकेम और लाइफ सेवर फार्मा जैसी कथित फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल किया गया। जांच में इन कंपनियों के ई-मेल खातों की लोकेशन पाकिस्तान और मलेशिया से ट्रेस हुई है।

ऐसे होती थी स्मगलिंग

सूत्रों के अनुसार, कोकीन दक्षिण अमेरिका से दुबई के रास्ते भारत लाई जाती थी। गुजरात के अंकलेश्वर में फार्मा व केमिकल कंपनियों की आड़ में इसे प्रोसेस कर मेडिकल कंसाइनमेंट के नाम पर आगे भेजा जाता था। इसके बाद दिल्ली-एनसीआर समेत अन्य शहरों में केमिकल कंसाइनमेंट, कार्डबोर्ड बॉक्स, कपड़ों और नमकीन के पैकेटों में छिपाकर डिलीवरी दी जाती थी।

दोस्त संग मिलकर खड़ा किया कोकीन का धंधा

यूएई से डिपोर्ट हुआ वीरेंद्र सिंह बसोया कभी सरोजिनी नगर के पास पिलंजी गांव में मकान के किराये से परिवार का गुजारा करता था। जल्द अमीर बनने की चाह में वह दुबई से विदेशी सिगरेट लाकर दिल्ली में बेचने वाले गिरोह से जुड़ा और तस्करी में उतर गया। राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने सिगरेट तस्करी के दो मामलों में उसे गिरफ्तार किया था। जमानत पर छूटने के बाद अदालत द्वारा भगोड़ा घोषित बसोया ब्रिटेन भाग गया। वहां उसकी मुलाकात मूल रूप से पटना निवासी ब्रिटिश नागरिक संदीप से हुई और दोनों ने मिलकर ड्रग्स का अंतरराष्ट्रीय धंधा शुरू किया। इस सिंडिकेट का जाल कितना बड़ा था, इसका खुलासा तब हुआ जब फरवरी 2024 में पुणे में 500 ग्राम जब्ती के बाद मुंबई एनसीबी ने आगे चलकर पुणे से 867 किलो और दिल्ली से 970 किलो मादक पदार्थ पकड़ा। इसी मामले में बसोया को गिरफ्तार किया गया है।

अक्टूबर 2024 में स्पेशल सेल द्वारा पकड़ी गई करीब 1300 किलो कोकीन मामले में भी वीरेंद्र का नाम सामने आया है और स्पेशल सेल भी जल्द उसे रिमांड पर लेगी। एजेंसी का आरोप है कि वीरेंद्र का बेटा ऋषभ नेटवर्क के लॉजिस्टिक्स और ड्रग्स की आवाजाही में सक्रिय भूमिका निभा रहा था।

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