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oi-Sumit Jha
Hanuman Statue Texas Controversy: अमेरिका के टेक्सास में स्थापित 90 फीट ऊंची भगवान हनुमान की भव्य प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ इन दिनों अमेरिका में एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक विवाद का केंद्र बन गई है। रिपब्लिकन नेता और ‘MAGA’ एक्टिविस्ट कार्लोस टुरसियोस द्वारा इस मूर्ति को “तीसरी दुनिया के एलियंस का अतिक्रमण” बताए जाने के बाद से हेट स्पीच और धार्मिक असहिष्णुता पर नई बहस छिड़ गई है।
यह विवाद ऐसे समय में आया है जब ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान अमेरिका में भारतीय प्रवासियों और उनके धार्मिक प्रतीकों के प्रति कट्टरता के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। सोशल मीडिया पर इसे ‘हिंदूफोबिया’ और ‘नस्लवाद’ का हिस्सा माना जा रहा है, जिसने वहां रहने वाले अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Carlos Turcios Hanuman post: क्या है पूरा विवाद?
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिका में ट्रंप के ‘MAGA’ (Make America Great Again) मिशन से जुड़े रिपब्लिकन नेता कार्लोस टुरसियोस ने टेक्सास के शुगर लैंड स्थित भगवान हनुमान की 90 फीट ऊंची मूर्ति का एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया। उन्होंने इस मूर्ति को “तीसरी दुनिया के एलियंस” द्वारा किया गया “अतिक्रमण” करार दिया।
टुरसियोस ने अपने पोस्ट में लिखा कि “यह पाकिस्तान का इस्लामाबाद या भारत की नई दिल्ली नहीं है, बल्कि टेक्सास है।” उन्होंने आपत्ति जताई कि अमेरिका में तीसरी सबसे बड़ी मूर्ति एक हिंदू देवता की क्यों है? इससे पहले एक अन्य रिपब्लिकन नेता अलेक्जेंडर डंकन ने भी इसे “झूठे भगवान की प्रतिमा” बताते हुए कहा था कि अमेरिका केवल एक ईसाई राष्ट्र है। इन बयानों को अमेरिका में बढ़ते जेनोफोबिया (विदेशियों के प्रति नफरत) और धार्मिक कट्टरता के रूप में देखा जा रहा है।
🚨SUGAR LAND, TEXAS🚨This is not Islamabad, Pakistan, or New Delhi, India. This is Sugar Land, Texas. Third World Aliens are slowly taking over Texas and America. Why is the third-largest statue in the US this??!
Stop the INVASION!
Follow:@Carlos__Turcios pic.twitter.com/hzNIunlyQ4
— Carlos Turcios (@Carlos__Turcios) February 16, 2026 “>
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Statue of Union Sugar Land: क्या है ‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ और इसका महत्व?
टेक्सास के शुगर लैंड स्थित श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर में स्थापित यह हनुमान जी की 90 फीट ऊंची प्रतिमा है। इसे ‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ (एकता की प्रतिमा) नाम दिया गया है। 2024 में अनावरण की गई यह मूर्ति अमेरिका की तीसरी सबसे ऊंची प्रतिमा है, जो स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी और पेगासस के बाद आती है। पंचलोहा (पांच धातुओं) से बनी यह प्रतिमा अभय मुद्रा में है, जो शांति और सुरक्षा का संदेश देती है।
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किसने और क्यों बनवाई यह भव्य प्रतिमा?
इस विशाल परियोजना की कल्पना प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु श्री चिन्नाजीयर स्वामीजी ने की थी। इसे बनाने का मुख्य उद्देश्य अमेरिका में रह रहे हिंदू समुदाय के लिए एक आध्यात्मिक केंद्र स्थापित करना और भारतीय संस्कृति व कला का प्रदर्शन करना था। मंदिर प्रशासन के अनुसार, यह मूर्ति शक्ति, भक्ति और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक है, जो केवल हिंदुओं के लिए ही नहीं, बल्कि शांति चाहने वाले हर व्यक्ति के लिए है।
Texas Hindu Temple controversy: निशाने पर क्यों है हिंदू प्रतीक और समुदाय?
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में बढ़ता दक्षिणपंथी राष्ट्रवाद और ‘श्वेत वर्चस्ववाद’ (White Supremacy) इसका मुख्य कारण है। ट्रंप के कार्यकाल में H-1B वीजा नीतियों और नौकरियों के मुद्दे को लेकर भारतीयों के खिलाफ नफरत बढ़ी है। कट्टरपंथी नेताओं को लगता है कि हिंदू धर्म के इतने बड़े प्रतीक उनकी पारंपरिक संस्कृति के लिए खतरा हैं। इसी “ग्रेट रिप्लेसमेंट थ्योरी” के चलते धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है।
अमेरिका में पहले भी हुए हैं ऐसे हमले?
यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका में हिंदू मंदिरों को निशाना बनाया गया है। कैलिफोर्निया, न्यूयॉर्क और न्यू जर्सी में कई बार स्वामीनारायण मंदिर (BAPS) और अन्य मंदिरों में तोड़फोड़ या नस्लभेदी नारे लिखे जाने की घटनाएं हुई हैं। हाल के वर्षों में ‘हिंदूफोबिया’ के मामलों में 91% की वृद्धि देखी गई है। अक्सर इन हमलों के पीछे धार्मिक कट्टरता या भारत के साथ बढ़ते ट्रेड डील के तनाव को कारण माना जाता है।
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हिंदू समुदाय के लिए बढ़ी चुनौती
भारतीय-अमेरिकी समुदाय ने इन बयानों की कड़ी निंदा की है। सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि वे टैक्स देने वाले नागरिक हैं और उन्हें अपनी आस्था का पालन करने का संवैधानिक अधिकार है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में हेट क्राइम की चुनौतियां बढ़ सकती हैं, जिससे निपटने के लिए प्रवासी समुदाय अब राजनीतिक लामबंदी और कानूनी सुरक्षा की मांग कर रहा है।

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