Bangladesh Violence: बांग्लादेश में हिन्दुओं को मरने के लिए छोड़ दिया? घर के बाहर निकलने से डर रहे लोग | bangladesh-violence-hindus-under-attack-fear-across-country

International

oi-Siddharth Purohit


Bangladesh
Violence:

बांग्लादेश
इस
समय
एक
गहरे
सामाजिक
और
राजनीतिक
संकट
से
गुजर
रहा
है,
जिसकी
सबसे
बड़ी
मार
हिंदू
अल्पसंख्यक
समुदाय
पर
पड़
रही
है।
देश
के
कई
हिस्सों
में
हिंदुओं
के
खिलाफ
डर,
हिंसा
और
असुरक्षा
का
माहौल
लगातार
गहराता
जा
रहा
है।
हालात
ऐसे
हैं
कि
कई
हिंदू
परिवार
अपने
घरों
से
बाहर
निकलने
से
डर
रहे
हैं।
उनके
लिए

सिर्फ
रोज़मर्रा
की
आवाजाही
मुश्किल
हो
गई
है,
बल्कि
दुकानें,
व्यवसाय,
मंदिर
और
सांस्कृतिक
संस्थान
भी
असुरक्षित
महसूस
हो
रहे
हैं।
यह
स्थिति
खास
तौर
पर
पिछले
सप्ताह
और
ज्यादा
गंभीर
हो
गई,
जब
राजनीतिक
हिंसा
और
दंगों
ने
पूरे
देश
को
हिला
कर
रख
दिया।

उस्मान
हादी
की
मौत
और
हिंसा
का
बहाना

अंतरराष्ट्रीय
मीडिया
रिपोर्टों
के
मुताबिक,
युवा
छात्र
नेता
शरीफ
उस्मान
हादी
की
मौत
के
बाद
बांग्लादेश
में
बड़े
पैमाने
पर
हिंसा
भड़क
उठी।
इस
राजनीतिक
उथल-पुथल
के
बीच
सांप्रदायिक
तनाव
भी
चरम
पर
पहुंच
गया।
इसी
दौरान
मयमनसिंह
जिले
में
एक
बेहद
दिल
दहला
देने
वाली
घटना
सामने
आई,
जहां
हिंदू
युवक
दीपू
चंद्र
दास
को
भीड़
ने
ईशनिंदा
के
आरोप
में
पीट-पीटकर
मार
डाला
और
फिर
उसके
शव
को
पेड़
से
बांधकर
आग
लगा
दी।
यह
घटना
सिर्फ
एक
हत्या
नहीं
थी,
बल्कि
इस
बात
का
प्रतीक
बन
गई
कि
जब
कानून-व्यवस्था
चरमराती
है,
तो
सबसे
पहले
अल्पसंख्यक
समुदाय
ही
निशाने
पर
आता
है।

Bangladesh Violence

घर
के
बाहर
नहीं
निकल
पा
रहे
हिन्दू

राजनीतिक
असंतोष
और
सरकार
विरोधी
प्रदर्शनों
के
बीच
फैली
हिंसा
ने
हिंदू
समुदाय
में
गहरा
डर
पैदा
कर
दिया
है।
कई
परिवारों
का
कहना
है
कि
वे
केवल
अपनी
धार्मिक
पहचान
के
कारण
असुरक्षित
महसूस
कर
रहे
हैं।
इसी
डर
के
कारण
लोग
बाजार
जाना,
काम
पर
निकलना
या
सामाजिक
गतिविधियों
में
हिस्सा
लेना
टाल
रहे
हैं।
बच्चों
को
स्कूल
भेजने
तक
में
परिवारों
को
भय
सता
रहा
है।

घर
और
धंधा
बेचकर
पलायन
पर
मजबूर
हिन्दू


Reuters

की
रिपोर्टों
के
अनुसार,
हिंदू
घरों,
दुकानों
और
व्यापारिक
संपत्तियों
पर
हमले
बांग्लादेश
में
कोई
नई
बात
नहीं
हैं।
बीते
कुछ
वर्षों
में
तोड़फोड़,
आगजनी
और
लूट
की
कई
घटनाएं
दर्ज
की
गई
हैं।
इन
हालातों
के
चलते
कई
हिंदू
परिवारों
को
मजबूरी
में
अपनी
संपत्ति
औने-पौने
दामों
पर
बेचनी
पड़ी
या
देश
छोड़कर
भारत
जैसे
सुरक्षित
स्थानों
की
ओर
पलायन
करना
पड़ा।
बांग्लादेश
में
मौजूद
करीब
1.31
करोड़
हिंदुओं
के
लिए
सुरक्षा,
रोज़गार
और
भविष्य
को
लेकर
चिंता
लगातार
बढ़ती
जा
रही
है।

‘छायानट’
पर
हमला,
यूनुस
की
चुप्पी

हालिया
हिंसा
के
दौरान
हिंदू
धार्मिक
और
सांस्कृतिक
संस्थानों
को
भी
निशाना
बनाया
गया।
बांग्लादेश
का
प्रतिष्ठित
सांस्कृतिक
संगठन
‘छायानट’
(Chhayanaut)
भी
हमलों
और
धमकियों
की
चपेट
में
आया।
ऐसे
संस्थानों
पर
हमले
यह
संकेत
देते
हैं
कि
चरमपंथी
ताकतें
केवल
राजनीतिक
विरोध
तक
सीमित
नहीं
हैं,
बल्कि
वे
सांस्कृतिक
और
धार्मिक
पहचान
को
भी
खत्म
करने
की
कोशिश
कर
रही
हैं।
इससे
हिंदू
समुदाय
में
यह
डर
और
गहरा
गया
है
कि
मंदिरों,
पूजा
स्थलों
और
सामुदायिक
कार्यक्रमों
पर
भी
हमले
हो
सकते
हैं।
दूसरी
ओर,
सरकार
ने
इस
बर्बरता
पर
चुप्पी
साध
ली
है।

दुष्कर्म
और
मारपीट
का
शिकार
हो
रहा
हिन्दू

भारत
सहित
अंतरराष्ट्रीय
मानवाधिकार
संगठनों
ने
भी
इन
घटनाओं
पर
चिंता
जताई
है।
साल
2024
में
भारत
सरकार
ने
संसद
में
बताया
था
कि
बांग्लादेश
में
हिंदुओं
के
खिलाफ
हिंसा
के
2200
से
ज्यादा
मामले
दर्ज
किए
गए
हैं,
जिनमें
मंदिरों
को
नुकसान,
घरों
की
तोड़फोड़,
मारपीट,
दुष्कर्म
और
दूसरी
शारीरिक
हिंसा
शामिल
है।
हालांकि
Voice
of
America
और
कुछ
बांग्लादेशी
अधिकारियों
का
कहना
है
कि
कई
घटनाएं
राजनीतिक
संघर्ष
से
जुड़ी
हैं,
लेकिन
ज़मीनी
सच्चाई
यह
है
कि
इन
हालातों
में
बार-बार
हिंदू
समुदाय
ही
सबसे
ज्यादा
प्रभावित
हुआ
है।
स्थानीय
पुलिस
भी
इन
मामलों
को
रजिस्टर्ड
करने
से
बच
रही
है।

भारत
सरकार
और
UN
का
सुस्त
रवैया

इन
सबके
बीच
भारत
सरकार
की
भूमिका
भी
सवालों
के
घेरे
में
है।
हालिया
हिंसा
के
बावजूद
भारत
की
ओर
से
कोई
सख्त
और
स्पष्ट
कूटनीतिक
दबाव
नजर
नहीं
आया।

तो
संयुक्त
राष्ट्र
जैसे
अंतरराष्ट्रीय
मंचों
पर
इस
मुद्दे
को
मजबूती
से
उठाया
गया
और

ही
बांग्लादेश
सरकार
से
अल्पसंख्यकों
की
सुरक्षा
को
लेकर
कोई
ठोस
समयबद्ध
मांग
रखी
गई।
बांग्लादेशी
हिंदू
संगठनों
का
कहना
है
कि
भारत
केवल
औपचारिक
बयानबाज़ी
तक
सीमित
रह
गया
है,
जिससे
पीड़ित
समुदाय
में
निराशा
बढ़
रही
है।

पीड़ित
समुदाय
में
निराशा
बढ़
रही
है।

इसी
दौरान
ढाका
में
हालात
और
भी
भयावह
हो
गए।
जब
शरीफ
उस्मान
हादी
का
शव
शुक्रवार
शाम
को
बांग्लादेश
पहुंचा
तो
के
बाद
राजधानी
में
भड़की
हिंसा
ने
शहर
को
अराजकता
की
आग
में
झोंक
दिया।
चरमपंथी
भीड़
ने
कई
इलाकों
में
आगजनी
और
तोड़फोड़
की।
इसके
एक
दिन
पहले
‘डेली
स्टार’
और
‘प्रथम
आलो’
जैसे
बड़े
अखबारों
के
दफ्तर
जला
दिए
गए।
धनमंडी
32
स्थित
शेख
मुजीबुर
रहमान
के
ध्वस्त
घर
को
भी
फिर
से
आग
के
हवाले
किया
गया।
कई
रिहायशी
इलाकों
में
लोग
रात
भर
लाइट
बंद
कर
घरों
में
छिपे
रहे।
जब
राजधानी
ही
जल
रही
हो,
तो
देश
के
अन्य
हिस्सों
में
रह
रहे
हिंदुओं
के
लिए
सुरक्षा
की
उम्मीद
करना
और
भी
मुश्किल
हो
जाता
है।

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English summary

Bangladesh Violence: Hindu Minority Living in Fear Amid Riots and Political Unrest

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