International
oi-Siddharth Purohit
China:
चीन
के
राष्ट्रपति
शी
जिनपिंग
आने
वाले
सालों
में
कई
गंभीर
चुनौतियों
का
सामना
करने
वाले
हैं।
23
अक्टूबर
को
हुई
कम्युनिस्ट
पार्टी
की
बैठक
में
उन्होंने
कहा
कि
आने
वाले
पांच
साल
चीन
के
विकास
और
सुरक्षा
दोनों
के
लिए
“बहुत
कठिन”
होंगे,
क्योंकि
“अनिश्चितताओं
और
ऐसी
कई
वजहें
सामने
आई
हैं
जिनकी
कभी
उम्मीद
नहीं
जताई
जा
रही
था।
अमेरिका
से
अस्थायी
शांति,
लेकिन
स्थायी
तनाव
बरकरार
द
इकोनमिस्ट
में
छपी
रिपोर्ट
के
मुताबिक,
शी
जिनपिंग
और
अमेरिकी
राष्ट्रपति
डोनाल्ड
ट्रंप
की
दक्षिण
कोरिया
में
हुई
बैठक
से
दोनों
देशों
के
बीच
चल
रहे
व्यापार
विवाद
में
कुछ
समय
के
लिए
शांति
आई।
हालांकि,
शी
की
सबसे
बड़ी
चिंता
अमेरिका-
अभी
भी
बनी
हुई
है।
उनके
मुताबिक,
ट्रंप
की
नीतियों
की
अस्थिरता
का
समाधान
एक
वैकल्पिक
वैश्विक
व्यवस्था
है,
जो
बाकी
देशों
को
चीन
के
करीब
लाए।

बेल्ट
एंड
रोड
इनिशिएटिव
(BRI)
का
बढ़ता
महत्व
इसी
रणनीति
का
एक
प्रमुख
हिस्सा
है
चीन
बेल्ट
एंड
रोड
इनिशिएटिव
(BRI)
योजना।
2013
में
शुरू
की
गई
यह
योजना
बंदरगाहों,
रेलमार्गों
और
ऊर्जा
संयंत्रों
जैसे
बुनियादी
ढांचे
के
निर्माण
के
जरिए
130
से
अधिक
देशों
में
आर्थिक
विकास
को
बढ़ावा
देने
के
लिए
बनाई
गई
थी।
BRI
पर
उठे
सवाल
और
बदलाव
की
दिशा
शुरुआती
सालों
में
BRI
पर
यह
आरोप
लगे
कि
यह
गरीब
देशों
को
कर्ज
के
जाल
में
फंसा
रही
है
और
पर्यावरण
को
नुकसान
पहुंचा
रही
है।
इसके
बाद
चीन
ने
गरीब
देशों
को
लोन
देना
कम
किया
और
परियोजनाओं
का
दोबारा
एस्टीमेट
बनाकर
शुरू
किया।
यहां
तक
कि
कोविड
महामारी
के
दौरान
BRI
की
गति
धीमी
हुई,
लेकिन
2023
के
बाद
इसमें
तेज़ी
आई
और
यह
रिकॉर्ड
स्तर
पर
पहुंच
गई।
ग्लोबल
साउथ
के
साथ
व्यापार
में
चीन
का
विस्तार
BRI
के
ज़रिए
चीन
ने
अमेरिका
पर
अपनी
निर्भरता
कम
करते
हुए
ग्लोबल
साउथ
–
यानी
एशिया,
अफ्रीका
और
लैटिन
अमेरिका
–
के
साथ
व्यापार
बढ़ाया।
2018
में
जहां
चीन
के
निर्यात
का
20%
हिस्सा
अमेरिका
जाता
था,
वहीं
अब
यह
घटकर
12%
से
भी
कम
रह
गया
है।
इसके
उलट,
दक्षिण-पूर्व
एशिया
और
लैटिन
अमेरिका
को
निर्यात
में
15%
की
बढ़ोतरी
दर्ज
की
गई,
जबकि
अफ्रीका
को
निर्यात
में
57%
की
बढ़ोतरी
हुई।
चीन
का
नया
व्यापार
समीकरण
S&P
Global
के
मुताबिक,
2024
में
चीन
के
कुल
निर्यात
का
44%
हिस्सा
ग्लोबल
साउथ
देशों
को
गया,
जबकि
2015
में
यह
केवल
35%
था।
अब
यह
ग्रुप
चीन
के
कुल
व्यापार
के
आधे
से
अधिक
का
हिस्सा
है,
जबकि
अमेरिका
की
हिस्सेदारी
सिर्फ
36%
रह
गई
है।
चीन
के
इन्वेस्टमेंट
और
प्रोजेक्ट्स
2023
में,
यानी
चीन
की
“ज़ीरो-कोविड
नीति”
खत्म
होने
के
बाद
पहले
पूरे
साल
में,
BRI
निवेश
और
अनुबंधों
का
कुल
मूल्य
92.4
अरब
डॉलर
रहा।
यह
महामारी
के
बाद
के
स्तर
(2022
में
74.5
अरब
डॉलर)
से
काफी
अधिक
था।
2024
में
यह
30%
और
बढ़ा,
जिससे
BRI
का
कुल
निवेश
122
अरब
डॉलर
तक
पहुंच
गया।
2025
की
पहली
छमाही
में
ही
यह
रिकॉर्ड
टूट
गया,
जब
123
अरब
डॉलर
से
अधिक
की
नई
परियोजनाएं
दर्ज
की
गईं।
छोटे
टारगेट
आसानी
से
हो
रहे
हिट
2021
में
शी
जिनपिंग
ने
घोषणा
की
कि
अब
BRI
का
फोकस
“छोटा
लेकिन
सुंदर”
परियोजनाओं
पर
होगा-
यानी
अब
बड़े
बुनियादी
ढांचे
के
बजाय
स्वास्थ्य,
हरित
ऊर्जा,
और
दूरसंचार
क्षेत्रों
पर
अधिक
निवेश
होगा।
कोयले
से
चलने
वाले
बिजली
प्लांट्स
में
अब
कोई
नया
निवेश
नहीं
किया
जाएगा।
फिर
भी
‘मेगा
डील’
जारी
हालांकि,
कुछ
हालिया
सौदे
अब
भी
बहुत
बड़े
हैं।
2025
की
पहली
छमाही
में
अफ्रीका
के
लिए
39
अरब
डॉलर
के
BRI
फंड
में
से
लगभग
आधा
हिस्सा
सिर्फ
एक
अनुबंध
से
आया
–
नाइजीरिया
में
तेल
और
गैस
सुविधाओं
के
निर्माण
के
लिए
20
अरब
डॉलर
का
सौदा।
इसी
तरह,
कजाखस्तान
में
लगभग
20
अरब
डॉलर
के
निर्माण
कॉन्ट्रेक्ट
किए
गए,
जिनमें
तांबा
और
एल्यूमीनियम
उत्पादन
शामिल
है।
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भी
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Plan:
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मोदी
की
हत्या
की
साजिश
नाकाम?
ढाका
में
मारा
गया
अमेरिकी
एजेंट!
रूस
ने
क्या
मदद
की?
हरित
ऊर्जा
में
चीन
का
निवेश
बढ़ा
BRI
के
तहत
निजी
और
गैर-राज्य
कंपनियों
की
भागीदारी
भी
बढ़ी
है।
2024
में
सौर,
पवन
और
अपशिष्ट-ईंधन
परियोजनाओं
में
11.8
अरब
डॉलर
का
निवेश
हुआ,
जो
पिछले
साल
से
24%
अधिक
था।
इससे
2024
BRI
का
“सबसे
हरित
वर्ष”
कहलाया।
2025
की
पहली
छमाही
में
भी
इन
क्षेत्रों
में
9.7
अरब
डॉलर
का
नया
निवेश
किया
गया।
BRI:
आर्थिक
ही
नहीं,
राजनीतिक
हथियार
भी
BRI
सिर्फ
व्यापार
या
निवेश
का
माध्यम
नहीं
है,
बल्कि
चीन
के
लिए
भू-राजनीतिक
प्रभाव
बढ़ाने
का
उपकरण
भी
है।
2013
से
अब
तक
चीन
ने
150
देशों
में
1.3
ट्रिलियन
डॉलर
से
अधिक
का
निवेश
किया
है।
चीन
को
उम्मीद
है
कि
यह
आर्थिक
सहयोग
संयुक्त
राष्ट्र
जैसे
वैश्विक
मंचों
पर
उसके
पक्ष
में
माहौल
बनाएगा।
ताइवान
पर
चीन
को
मिल
रहा
समर्थन
लगभग
70
देशों
ने
चीन
द्वारा
प्रस्तुत
उस
नीति
का
समर्थन
किया
है
जिसमें
कहा
गया
है
कि
ताइवान
के
साथ
एकीकरण
के
लिए
“सभी
प्रयास”
किए
जाने
चाहिए
–
जिसमें
सैन्य
विकल्प
भी
शामिल
है।
इनमें
से
अधिकांश
देश
BRI
से
जुड़े
हुए
हैं।
BRI
के
सामने
बढ़ते
खतरे
और
आलोचना
हालांकि,
चीन
के
लिए
जोखिम
भी
कम
नहीं
हैं।
कई
विकासशील
देश
अब
चीन
के
साथ
बढ़ते
व्यापार
घाटे
और
सस्ते
चीनी
सामानों
की
बाढ़
से
चिंतित
हैं।
अफ्रीका
और
दक्षिण-पूर्व
एशिया
में
अंतर्राष्ट्रीय
व्यापार
को
कम
और
बंद
करने
की
आवाज़ें
उठने
लगी
हैं।
लोन
का
बोझ
और
आर्थिक
दबाव
सिडनी
स्थित
Lowy
Institute
की
मई
2025
की
रिपोर्ट
की
मानें
तो,
चीन
अब
लोन
देकर
विकासशील
देशों
के
बजट
पर
वित्तीय
बोझ
बनाता
जा
रहा
है।
2010
के
दशक
की
BRI
परियोजनाओं
से
जुड़े
लोन
चुकाने
अब
नए
लोन
से
कहीं
अधिक
हो
गए
हैं।
इससे
कई
देशों
में
शिक्षा,
स्वास्थ्य
और
जलवायु
कार्यक्रमों
पर
खर्च
कम
होने
का
खतरा
बढ़
गया
है।
फिर
भी
चीन
को
भरोसा
अपने
मॉडल
पर
चीन
मानता
है
कि
तकनीकी
विशेषज्ञता
और
निर्माण
क्षमता
के
कारण
कई
गरीब
देशों
के
पास
उसके
साथ
काम
करने
के
अलावा
कोई
बेहतर
विकल्प
नहीं
है।
बीजिंग
को
उम्मीद
है
कि
इसी
रास्ते
वह
“एक
नई
वैश्विक
व्यवस्था”
का
निर्माता
बन
सकता
है।
अवसर
या
चुनौतियां?
चीनी
कम्युनिस्ट
पार्टी
की
हाल
ही
में
जारी
हुई
मैग्जीन
के
मुताबिक
के
अनुसार,
BRI
“वैश्विक
शासन
का
एक
नया
पैटर्न
बनाने
में
मदद
करेगा।
ट्रंप
की
नीतियों
और
वैश्विक
तनावों
के
बीच,
शी
जिनपिंग
को
अब
भी
अपने
लिए
अवसर
दिखाई
दे
रहे
हैं-
आर्थिक,
कूटनीतिक
और
राजनीतिक
रूप
से।
बावजूद
इसके
चीन
के
सामने
भी
नई
आर्थिक
और
वैश्विक
चुनौतियां
तैयार
हो
रही
हैं।
इस
खबर
पर
आपकी
क्या
राय
है,
हमें
कमेंट
में
बताएं।

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