International
oi-Sumit Jha
Gaza
Peace
Plan:
पश्चिम
एशिया
में
वर्षों
से
चल
रहा
खूनी
गाजा
संघर्ष
अब
निर्णायक
मोड़
पर
है।
अमेरिकी
राष्ट्रपति
डोनाल्ड
ट्रंप
ने
एक
महत्वाकांक्षी
20-सूत्रीय
शांति
प्रस्ताव
पेश
कर
युद्ध
को
खत्म
करने
की
पहल
की
है,
जिसे
इजरायली
प्रधानमंत्री
बेंजामिन
नेतन्याहू
का
तुरंत
समर्थन
मिल
गया
है।
इस
ऐतिहासिक
पहल
को
भारत
के
प्रधानमंत्री
नरेंद्र
मोदी
ने
भी
‘स्थायी
शांति
की
राह’
बताते
हुए
तत्काल
समर्थन
दिया
है।
यह
प्लान
युद्धविराम,
बंधकों
की
रिहाई
और
हमास
के
सफाए
पर
केंद्रित
है।
लेकिन
सवाल
यह
है
कि
ट्रंप
का
यह
प्लान
क्या
है,
और
क्या
यह
वाकई
गाजा
में
स्थायी
शांति
ला
पाएगा?
आइए,
इस
रिपोर्ट
में
आसान
भाषा
में
समझते
हैं
कि
इस
व्यापक
शांति
समझौते
से
युद्ध
कैसे
खत्म
होगा
और
पश्चिम
एशिया
का
भविष्य
कैसा
होगा।

तत्काल
युद्धविराम
प्रस्ताव
लागू
होते
ही
इज़राइल
और
हमास
के
बीच
चल
रही
सभी
सैन्य
गतिविधियाँ
तुरंत
रोक
दी
जाएंगी।
इसका
मकसद
हिंसा
की
चेन
को
तोड़ना
और
मानवीय
मदद
के
लिए
रास्ता
खोलना
है।
इस
स्टेप
से
अंतरराष्ट्रीय
समुदाय
को
शांति
प्रक्रिया
आगे
बढ़ाने
का
पहला
मौका
मिलेगा।
बंधकों
की
रिहाई
योजना
के
मुताबिक,
हमास
को
प्रस्ताव
स्वीकार
करने
के
72
घंटे
के
भीतर
सभी
जीवित
बंधकों
को
सुरक्षित
छोड़ना
होगा
और
मृतकों
के
शव
इज़राइल
को
सौंपने
होंगे।
यह
कदम
न
केवल
मानवीय
दृष्टि
से
अहम
है,
बल्कि
भरोसा
बहाल
करने
का
भी
प्रतीक
माना
जा
रहा
है।
कैदियों
की
अदला-बदली
बंधकों
की
रिहाई
के
बदले
में,
इज़राइल
7
अक्टूबर
2023
के
बाद
हिरासत
में
लिए
गए
कैदियों
को
छोड़ने
पर
सहमत
होगा।
इसमें
250
आजीवन
कारावास
भुगत
रहे
कैदी
और
लगभग
1,700
गाज़ावासी
शामिल
होंगे।
यह
कदम
दोनों
पक्षों
के
बीच
विश्वास
बहाली
की
दिशा
में
बड़ा
संकेत
है।
चरणबद्ध
सेना
वापसी
प्रस्ताव
के
अनुसार,
इज़रायली
सेना
पहले
‘पीली
रेखा’
तक
पीछे
हटेगी
और
फिर
धीरे-धीरे
‘लाल
रेखा’
तक
अंतिम
वापसी
करेगी।
यह
प्रक्रिया
गाज़ा
से
सैन्य
दबाव
को
कम
करेगी।
इस
चरणबद्ध
वापसी
से
नागरिक
इलाकों
में
स्थिरता
लौटाने
और
आगे
के
राजनीतिक
समाधान
की
राह
खुल
सकती
है।
स्थायी
बफर
जोन
‘लाल
रेखा’
के
बाद
एक
स्थायी
बफर
जोन
स्थापित
किया
जाएगा।
यहां
न
तो
इज़रायली
सैनिक
प्रवेश
कर
सकेंगे
और
न
ही
फिलिस्तीनी
आम
नागरिक।
इसका
उद्देश्य
दोनों
पक्षों
के
बीच
भविष्य
में
होने
वाली
टकराव
की
संभावनाओं
को
खत्म
करना
है
और
सीमाई
इलाकों
को
स्थायी
रूप
से
सुरक्षित
बनाना
है।
हमास
की
समाप्ति
प्रस्ताव
साफ
कहता
है
कि
गाज़ा
के
शासन
में
हमास
या
किसी
अन्य
चरमपंथी
गुट
की
कोई
भूमिका
नहीं
होगी।
उनका
सैन्य
ढांचा,
हथियार
भंडार
और
आतंकी
नेटवर्क
पूरी
तरह
नष्ट
किए
जाएंगे।
यह
कदम
गाज़ा
को
स्थायी
रूप
से
‘आतंक-मुक्त
क्षेत्र’
बनाने
और
दीर्घकालिक
शांति
स्थापित
करने
की
दिशा
में
है।
हथियार
सरेंडर
पर
माफी
जो
हमास
सदस्य
हिंसा
छोड़कर
शांति
का
रास्ता
अपनाना
चाहते
हैं,
उन्हें
योजना
के
तहत
मौका
दिया
जाएगा।
हथियार
सरेंडर
करने
वालों
को
आम
माफी
दी
जाएगी।
इसके
अलावा,
जो
लोग
गाज़ा
छोड़ना
चाहेंगे,
उन्हें
सुरक्षित
मार्ग
दिया
जाएगा
ताकि
वे
बिना
खतरे
के
क्षेत्र
से
बाहर
जा
सकें।
अंतर्राष्ट्रीय
तकनीकी
प्रशासन
गाज़ा
के
शासन
को
संभालने
के
लिए
एक
अंतरराष्ट्रीय
तकनीकी
समिति
गठित
होगी।
यह
समिति
अस्थायी
रूप
से
प्रशासनिक
ढांचे
का
संचालन
करेगी।
इसमें
विशेषज्ञ
और
गैर-राजनीतिक
तकनीकी
सदस्य
शामिल
होंगे,
जिनका
मकसद
स्थानीय
शासन
को
पारदर्शी,
प्रभावी
और
तटस्थ
ढंग
से
चलाना
होगा।
‘बोर्ड
ऑफ
पीस’
पर्यवेक्षण
इस
अंतरराष्ट्रीय
प्रशासन
की
निगरानी
एक
विशेष
निकाय,
‘बोर्ड
ऑफ
पीस’
करेगा।
इसकी
अध्यक्षता
डोनाल्ड
ट्रम्प
करेंगे
और
इसमें
कुछ
प्रमुख
वैश्विक
नेता
शामिल
हो
सकते
हैं।
यह
बोर्ड
गाज़ा
में
राजनीतिक
संक्रमण,
सुरक्षा
प्रबंधन
और
पुनर्निर्माण
परियोजनाओं
की
निगरानी
करेगा,
ताकि
योजना
प्रभावी
ढंग
से
लागू
हो।
गाज़ा
का
पुनर्निर्माण
प्रस्ताव
में
गाज़ा
के
व्यापक
पुनर्निर्माण
का
वादा
किया
गया
है।
इसमें
बुनियादी
ढांचे
की
मरम्मत,
अस्पतालों
और
स्कूलों
का
पुनर्निर्माण,
जल-विद्युत
आपूर्ति
सुधार
और
आर्थिक
विकास
कार्यक्रम
शामिल
होंगे।
उद्देश्य
यह
है
कि
गाज़ा
के
लोग
लंबे
संघर्ष
के
बाद
स्थिर
और
सुरक्षित
जीवन
जी
सकें।
पीएम
मोदी
ने
ट्रंप
की
गाजा
शांति
योजना
का
स्वागत
किया
प्रधानमंत्री
नरेंद्र
मोदी
ने
अमेरिकी
राष्ट्रपति
डोनाल्ड
ट्रंप
द्वारा
पेश
की
गई
गाजा
संघर्ष
समाप्ति
की
व्यापक
योजना
का
खुले
तौर
पर
स्वागत
किया
है।
पीएम
मोदी
ने
अपने
आधिकारिक
सोशल
मीडिया
हैंडल
पर
लिखा,
‘हम
अमेरिकी
राष्ट्रपति
डोनाल्ड
ट्रंप
की
गाजा
संघर्ष
को
समाप्त
करने
की
व्यापक
योजना
की
घोषणा
का
स्वागत
करते
हैं।
यह
योजना
फिलीस्तीनी
और
इजरायली
लोगों
के
साथ-साथ
पूरे
पश्चिम
एशिया
क्षेत्र
के
लिए
लंबे
समय
तक
स्थायी
शांति,
सुरक्षा
और
विकास
की
एक
व्यवहार्य
राह
प्रदान
करती
है।
हमें
उम्मीद
है
कि
सभी
संबंधित
पक्ष
राष्ट्रपति
ट्रंप
की
इस
पहल
के
पीछे
एकजुट
होकर
संघर्ष
को
समाप्त
करने
और
शांति
स्थापित
करने
के
प्रयास
का
समर्थन
करेंगे।’
इस
बयान
के
माध्यम
से
पीएम
मोदी
ने
स्पष्ट
किया
कि
भारत
इस
ऐतिहासिक
पहल
का
समर्थन
करता
है
और
क्षेत्र
में
स्थायी
शांति
के
लिए
अंतरराष्ट्रीय
प्रयासों
में
सहयोग
के
पक्ष
में
है।
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मामले
पर
आखिर
क्यों
झुके
Netanyahu?
ट्रंप
नहीं
इन
5
घरेलू
मजबूरियां
ने
तोड़ी
जिद
फिलिस्तीन-हमास
की
क्या
प्रतिक्रिया
है?
1.
फिलिस्तीनी
अथॉरिटी
(PA)
का
रुख:
स्वागत
- पश्चिमी
तट
(West
Bank)
में
शासन
करने
वाली
फिलिस्तीनी
अथॉरिटी
(PA)
ने
इस
प्रस्ताव
का
स्वागत
किया
है।
- सकारात्मक
दृष्टिकोण:
PA
ने
गाजा
में
युद्ध
समाप्त
करने
के
‘ईमानदार
और
अथक
प्रयासों’
का
स्वागत
किया
है
और
शांति
का
मार्ग
खोजने
की
दिशा
में
विश्वास
जताया
है।
- आगे
की
मांग:
PA
ने
यह
भी
मांग
की
है
कि
इस
योजना
में
ऐसे
तंत्र
स्थापित
किए
जाएं
जो
फिलिस्तीनी
लोगों
की
रक्षा
करें,
युद्धविराम
का
सम्मान
सुनिश्चित
करें,
भूमि
के
अतिक्रमण
को
रोकें
और
अंतर्राष्ट्रीय
कानून
का
उल्लंघन
करने
वाले
एकतरफा
कृत्यों
पर
रोक
लगाएं।
2.
हमास
(Hamas)
का
रुख:
प्रस्ताव
की
समीक्षा
गाजा
पट्टी
में
सक्रिय
गुट
हमास
ने
इस
प्रस्ताव
पर
अभी
तक
कोई
आधिकारिक
प्रतिक्रिया
नहीं
दी
है।
- समीक्षा
जारी:
हमास
के
प्रतिनिधियों
ने
प्रस्ताव
प्राप्त
होने
की
पुष्टि
की
है
(जो
मिस्र
और
कतर
जैसे
मध्यस्थों
के
माध्यम
से
प्रस्तुत
किया
गया
है)
और
कहा
है
कि
वे
इस
पर
“सद्भावपूर्वक”
और
“गंभीरता
से
विचार”
कर
रहे
हैं।
- विरोध
की
आशंका:
हालाँकि,
प्रस्ताव
की
मुख्य
शर्तें
हमास
के
लिए
बेहद
कठिन
हैं।
इसमें
हमास
का
पूर्ण
निरस्त्रीकरण,
गाजा
के
शासन
में
उसकी
कोई
भूमिका
नहीं
होना,
और
उसके
सैन्य
ढांचे
(सुरंगों
सहित)
को
नष्ट
करना
शामिल
है।
अतीत
में
हमास
ने
निशस्त्रीकरण
की
मांग
को
स्पष्ट
रूप
से
खारिज
किया
है।
- इस्लामिक
जिहाद
(PIJ)
की
प्रतिक्रिया:
हमास
के
साथ
लड़ने
वाले
फिलिस्तीनी
इस्लामिक
जिहाद
(PIJ)
समूह
ने
इस
योजना
को
“क्षेत्र
को
उड़ाने
की
एक
रेसिपी”
करार
दिया
है,
जो
इजरायल
द्वारा
युद्ध
के
माध्यम
से
हासिल
न
किए
जा
सकने
वाले
लक्ष्यों
को
अमेरिका
के
जरिए
थोपने
का
प्रयास
है।
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प्लान
पर
पीएम
मोदी
का
मिला
साथ,
जानिए
भारतीय
प्रधानमंत्री
ने
दुनिया
से
क्या
अपील
की?

























