International
oi-Siddharth Purohit
Pakistan
News:
इस्लामाबाद
में
प्रस्तावित
27वें
संवैधानिक
संशोधन
को
लेकर
तीखी
बहस
छिड़
गई
है।
आलोचकों
का
कहना
है
कि
यह
संशोधन
देश
के
सैन्य
शासन
को
और
मजबूत
करेगा,
जबकि
नागरिक
सरकार
की
भूमिका
कमजोर
हो
जाएगी।
इस
बहस
के
केंद्र
में
सेना
प्रमुख
असीम
मुनीर
हैं,
जिन्हें
पहले
से
ही
देश
का
वास्तविक
शासक
माना
जाता
है।
प्रधानमंत्री
के
बराबर
असीम
मुनीर
प्रधानमंत्री
शहबाज
शरीफ
के
साथ
वैश्विक
मंचों
पर
भी
असीम
मुनीर
को
बराबर
का
दर्जा
मिल
रहा
है।
अमेरिकी
राष्ट्रपति
डोनाल्ड
ट्रम्प
के
साथ
कई
मुलाकातों
में
भी
मुनीर
प्रधानमंत्री
के
साथ
उपस्थित
रहे।
पाकिस्तान
मुस्लिम
लीग-नवाज
(PML-N)
के
एक
प्रतिनिधिमंडल
ने,
जिसका
नेतृत्व
प्रधानमंत्री
शहबाज
शरीफ
कर
रहे
हैं,
इस
संशोधन
के
लिए
पाकिस्तान
पीपल्स
पार्टी
(PPP)
से
समर्थन
मांगा
है।

क्या
है
अनुच्छेद
243
में
बदलाव?
इस
प्रस्तावित
संशोधन
का
मुख्य
उद्देश्य
अनुच्छेद
243
में
बदलाव
करना
है।
इसके
तहत
वर्तमान
सेना
प्रमुख
असीम
मुनीर
के
कार्यकाल
को
बढ़ाया
जाएगा
और
उन्हें
‘फील्ड
मार्शल’
के
पद
पर
औपचारिक
मान्यता
दी
जाएगी।
यह
पद
उन्हें
मई
2025
में
भारत
के
“ऑपरेशन
सिंदूर”
के
जवाब
में
पाकिस्तान
की
सफलता
के
बाद
दिया
गया
था।
मुनीर
का
कार्यकाल
28
नवंबर
को
समाप्त
हो
रहा
है।
लेकिन
उसके
पहले
मुनीर
ने
अपना
टेन्योर
बढ़वा
लिया
है।
पाक
के
दूसरे
फील्ड
मार्शल
बने
थे
मुनीर
असीम
मुनीर
को
पाकिस्तान
का
वास्तविक
शासक
माना
जाता
है
और
वे
फील्ड
मार्शल
का
पद
पाने
वाले
देश
के
दूसरे
अधिकारी
हैं।
उनसे
पहले
अयूब
खान
ने
1959
में
सैन्य
तख्तापलट
के
बाद
खुद
को
यह
पद
दिया
था।
उन्होंने
खुद
को
मुख्य
मार्शल
लॉ
प्रशासक
और
फिर
पाकिस्तान
का
राष्ट्रपति
घोषित
किया
था।
कुछ
समय
पहले
मुनीर
के
राष्ट्रपति
बनने
की
चर्चा
भी
उठी
थी,
लेकिन
बाद
में
यह
मुद्दा
शांत
हो
गया।
आलोचकों
का
आरोप:
न्यायपालिका
पर
खतरा
आलोचकों
का
कहना
है
कि
यह
संशोधन
प्रांतों
के
लिए
मुश्किल
से
मिले
अधिकारों
को
कमजोर
करेगा,
नियंत्रण
को
केंद्र
में
केंद्रीकृत
करेगा
और
न्यायपालिका
की
स्वतंत्रता
को
घटाएगा।
पाकिस्तान
1947
में
भारत
से
अलग
होने
के
बाद
से
ही
सैन्य
तख्तापलट
और
भ्रष्टाचार
जैसी
समस्याओं
से
जूझ
रहा
है।
संवैधानिक
होगा
फील्ड
मार्शल
का
पद!
इस
संशोधन
के
जरिए
फील्ड
मार्शल
के
पद
को
संवैधानिक
मान्यता
मिल
जाएगी।
अभी
तक
पाकिस्तान
के
संविधान
या
सैन्य
कानूनों
में
इस
पद
की
कोई
कानूनी
स्थिति
नहीं
है।
पाकिस्तानी
मीडिया
रिपोर्टों
के
अनुसार,
यह
संशोधन
फील्ड
मार्शल
की
शक्तियों
और
कार्यकाल
को
औपचारिक
रूप
से
मान्यता
मिलेगी,
जिससे
जनरल
मुनीर
का
दबदबा
पाकिस्तान
में
और
मजबूत
होगा।
साथ
ही
सरकार
में
भी
उनका
दखल
बढ़ेगा।
सरकारी
पुष्टि:
चर्चा
जारी
है
पाकिस्तान
के
कानून
और
न्याय
राज्य
मंत्री
बैरिस्टर
अकील
मलिक
ने
इसकी
पुष्टि
की
है।
उन्होंने
कहा,
“27वें
संशोधन
पर
चर्चा
चल
रही
है,
लेकिन
औपचारिक
काम
अभी
शुरू
नहीं
हुआ
है।”
उन्होंने
यह
भी
स्पष्ट
किया
कि
अनुच्छेद
243
में
संशोधन
का
उद्देश्य
फील्ड
मार्शल
के
पद
को
संवैधानिक
मान्यता
देना
है।
मुनीर
को
हाल
में
प्रधानमंत्री
के
साथ
वैश्विक
मंचों
पर
बराबर
का
दर्जा
मिल
रहा
है।
अमेरिकी
राष्ट्रपति
डोनाल्ड
ट्रम्प
ने
तो
उन्हें
“My
favorite
Field
Marshal”
तक
कहा
था।
न्यायिक
ढांचे
में
भी
बदलाव
की
योजना
सैन्य
मामलों
से
आगे
बढ़ते
हुए,
प्रस्तावित
27वें
संशोधन
में
ऐसे
कई
बदलाव
शामिल
हैं
जो
पाकिस्तान
की
कानूनी
और
न्यायिक
प्रणाली
को
नया
रूप
देंगे।
इसमें
एक
संवैधानिक
न्यायालय
(Constitutional
Court)
का
गठन
शामिल
है,
जो
सर्वोच्च
न्यायालय
से
अलग
होगा
और
कानूनों
व
मौलिक
अधिकारों
की
व्याख्या
करेगा।
सरकार
का
दावा
है
कि
इससे
अदालतों
पर
बोझ
कम
होगा
और
न्याय
तेजी
से
मिलेगा।
न्यायिक
स्वतंत्रता
पर
खतरा
वरिष्ठ
वकील
हसन
अब्दुल्ला
नियाज़ी
ने
पाकिस्तानी
मीडिया
से
कहा
कि
एक
समानांतर
न्यायिक
प्रणाली
बनाना
न्यायिक
स्वतंत्रता
के
लिए
खतरनाक
होगा।
उन्होंने
कहा,
“यह
प्रणाली
राजनीतिक
दबाव
के
प्रति
पूरी
तरह
संवेदनशील
होगी।
यह
कार्यकारिणी
के
सदस्यों
को
न्यायाधीश
की
भूमिका
निभाने
की
अनुमति
देगी,
प्रांतीय
स्वायत्तता
को
कमजोर
करेगी
और
सेना
की
भूमिका
बढ़ाएगी।”
इसके
अलावा,
संशोधन
में
सरकार
को
न्यायाधीशों
को
स्थानांतरित
करने
की
शक्ति
देने
का
भी
प्रावधान
है,
जिससे
न्यायपालिका
कार्यपालिका
के
अधीन
आ
सकती
है।
18वें
संशोधन
को
कमजोर
करने
की
कोशिश
यह
प्रस्ताव
2010
के
18वें
संशोधन
की
शक्तियों
को
भी
रद्द
करने
का
प्रयास
माना
जा
रहा
है।
उस
ऐतिहासिक
संशोधन
ने
संघीय
सरकार
से
शिक्षा
और
स्वास्थ्य
जैसे
क्षेत्रों
की
शक्तियां
प्रांतों
को
सौंप
दी
थीं।
साथ
ही,
इसने
राष्ट्रपति
की
शक्तियों
को
एक
संवैधानिक
प्रमुख
तक
सीमित
कर
दिया
था।
अब
नए
प्रस्तावों
में
शिक्षा
और
जनसंख्या
नियोजन
जैसे
विषयों
को
फिर
से
केंद्रीय
सरकार
के
अधीन
लाने
की
बात
कही
गई
है।
सरकार
का
दावा:
लोकतंत्र
को
खतरा
नहीं
शरीफ
सरकार
का
कहना
है
कि
कोई
भी
संशोधन
सर्वसम्मति
के
बाद
ही
पेश
किया
जाएगा
और
इससे
लोकतंत्र
को
कोई
खतरा
नहीं
होगा।
हालांकि,
संवैधानिक
विशेषज्ञ
बैरिस्टर
अली
ताहिर
ने
चेतावनी
दी
कि
“मौजूदा
संवैधानिक
ढांचे
का
जो
कुछ
भी
बचा
है,
उसे
अब
पूरी
तरह
ध्वस्त
करने
की
तैयारी
की
जा
रही
है।”
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