कटनी की सिटी एसपी नेहा पच्चीसिया और एक एसएचओ के खिलाफ जमीन सौदे से जुड़े एक मामले में नामजद एफआईआर दर्ज की गई है। इस एफआईआर में कुल 3 लोगों के नाम हैं। इसके बाद मुख्यमंत्री CSP नेहा को सस्पेंड करने के आदेश जारी किए हैं।
मध्य प्रदेश के कटनी की नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) नेहा पच्चीसिया की मुश्किलें कम होने का नाम नही ले रही हैं। जमीन सौदे में की गई जांच के बाद गुरुवार को उन पर धोखाधड़ी, पद के दुरुपयोग और आपराधिक सांठगांठ के आरोप में एफआईआर दर्ज हुई है। बताया जा रहा है कि कन्हवारा की जमीन के कथित सौदे में CSP नेहा पच्चीसिया और तत्कालीन कुठला थाना प्रभारी राजेंद्र मिश्रा की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। वहीं, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए CSP को सस्पेंड करने के निर्देश दिए हैं।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। यह कार्यवाही भोपाल सतर्कता शाखा की शिकायत पर जबलपुर जोन के निर्देशानुसार कुठला थाने में की गई है। हालांकि, इस मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायालय में साक्ष्यों के आधार पर होगी।
यह मामला कटनी जिले के कुठला थाना क्षेत्र की खसरा नंबर 2618/1 की जमीन सौदे से जुड़ा है। शासकीय गाइडलाइन के मुताबिक, जमीन की कीमत 82 लाख 86 हजार रुपए से अधिक थी। आरोप है कि पुलिसिया दबाव बनाकर इसकी रजिस्ट्री सिर्फ 18.20 लाख रुपये में कराई गई। इसमें 15 लाख रुपए चेक और 3.20 लाख रुपए नकद दर्शाए गए।
बता दें CSP नेहा पर ट्रांसफर से अवैध वसूली के आरोप लगने के बाद कटनी एसपी ने उनसे 3 थानों का प्रभार ले लिया था। नेहा पच्चीसिया पर की गई शिकायत में आरोप है कि पुलिस कार्रवाई और दबाव का इस्तेमाल कर रमेश लोधी से जमीन की रजिस्ट्री कराई गई तथा बाद में नामांतरण भी कराया गया। जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 82.86 लाख की गाइडलाइन कीमत वाली जमीन की 18.20 लाख में रजिस्ट्री की गई और जमीन खरीदार को 15 लाख की राशि क्षितिज राज बारापत्रे के खातों से उपलब्ध कराई गई।
संदिग्ध सांठगांठ और फर्जीवाड़ा
पुलिस ने इसे संदिग्ध सांठगांठ और फर्जीवाड़े से जोड़ते हुए संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। जांच के बाद CSP नेहा पच्चीसिया, क्षितिज राज बारापत्रे और मारूफ अहमद हनफी के खिलाफ BNS की धारा 61, 198, 199(ब), 308(7) और 318(4) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। वहीं तत्कालीन थाना प्रभारी राजेंद्र मिश्रा की भूमिका को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
जांच में क्या पता चला
जबलपुर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनु बेनीवाल की जांच में सामने आया कि कागजों में खरीदार बने मारूफ अहमद हनफी के बैंक खाते में पर्याप्त राशि नहीं थी। 15 अप्रैल 2026 को रजिस्ट्री के दिन उसके खाते में ‘शाइन पार्टनर्स’ से 10 लाख और क्षितिज राज बारापात्रे के खाते से 5 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए थे। जांच में दोनों खातों में एक ही पैन कार्ड नंबर दर्ज होने की बात भी सामने आई।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर पोस्ट कर कहा गया, ”कटनी में सामने आए गंभीर प्रकरण को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव को संबंधित CSP के विरुद्ध तत्काल निलंबन की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री जी ने स्पष्ट किया है कि कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही, दबाव या पद के दुरुपयोग को स्वीकार नहीं किया जाएगा। निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
कौन हैं नेहा पच्चीसिया, कड़ी मेहनत से पाया मुकाम
सीएसपी नेहा पच्चीसिया मूल रूप से मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के पचोर तहसील की निवासी हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एविएशन और कॉर्पोरेट सेक्टर से की थी। 12वीं के बाद उन्होंने एविएशन में डिप्लोमा किया और एयर इंडिया में एयर होस्टेस के रूप में सेवाएं दीं। इसके बाद उन्होंने कई प्रमुख मल्टीनेशनल कंपनियों में भी काम किया। जनसेवा की भावना के चलते उन्होंने राज्य प्रशासनिक सेवा का रुख किया। 2012 से 2015 तक की कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने MPPSC-2012 परीक्षा (अंतिम परिणाम 2016) में पूरे प्रदेश में 20वीं रैंक हासिल की। पुलिस विभाग में आने से पहले उन्होंने कुछ समय महिला एवं बाल विकास विभाग में भी सेवाएं दी थीं।
डीएसपी के रूप में चयन के बाद उनकी पहली मैदानी पोस्टिंग गुना में सीएसपी के तौर पर हुई। गुना में पदस्थ रहने के दौरान उन्होंने महिला सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ‘महिला मोबाइल पुलिस स्टेशन’ की शुरुआत की, जिसे काफी सराहना मिली। इसके बाद वे भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय (PHQ) और खंडवा जिले में भी पदस्थ रहीं। मई 2025 में पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी ट्रांसफर लिस्ट के तहत उन्हें कटनी का नया नगर पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया था। अब नेहा पर हाल में ही में लगे अवैध वसूली और विभागीय लापरवाही के गंभीर आरोपों ने उनके पुलिस करियर पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
रिपोर्ट – विजेन्द्र यादव

























