Vande Bharat Sleeper की पहले ही दिन ऐसी दुर्दशा देख भड़के लोग, बोले- ट्रेन हाई-टेक, हरकतें ‘लो-क्लास’

वंदे भारत की स्लीपर की ऐसी हुई हालत

वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस का उद्घाटन भारतीय रेलवे के लिए एक बड़ी कामयाबी मानी जा रही है. ये ट्रेन आधुनिक तकनीक, बेहतर सुविधा और तेज यात्रा का प्रतीक बनकर सामने आई थी, लेकिन अपने पहले ही सफर में ये ऐतिहासिक पहल एक अलग ही वजह से चर्चा में आ गई. सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने लोगों का ध्यान उस समस्या की ओर खींचा, जो वर्षों से सार्वजनिक स्थानों से जुड़ी रही है जो साफ दर्शाता है कि आज भी लोगों में डिसीपिलिन की कमी है.

शनिवार को हावड़ा से गुवाहाटी के लिए रवाना की गई वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस के पहले ही दिन एक यात्री द्वारा रिकॉर्ड किया गया वीडियो इंटरनेट पर तेजी से फैल गया. ये वीडियो मालदा के पास का बताया जा रहा है, जिसमें ट्रेन के एक कोच के अंदर प्लास्टिक के पैकेट, डिस्पोजेबल चम्मच, खाने के अवशेष और अन्य कचरा फर्श पर बिखरा हुआ दिखाई देता है. ये सब उस ट्रेन में दिखा, जिसे कुछ ही घंटे पहले बड़े समारोह के साथ रवाना किया गया था.

लोगों ने उठाए पैसेंजर की सोच पर सवाल

वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर करते हुए लिखा गया कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के उद्घाटन के कुछ ही घंटों में लोग कचरा फैलाने लगे. जरा सिविक सेंस समझ देखिए. कुछ ही समय में ये वीडियो हजारों लोगों तक पहुंच गया और प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई. कई यूजर्स ने नाराज़गी जताई और सवाल उठाया कि अगर यात्री ही सार्वजनिक संपत्ति का सम्मान नहीं करेंगे तो अत्याधुनिक सुविधाएं भी कैसे टिक पाएंगी.

ऑनलाइन बहस तेज होने के बाद भारतीय रेलवे ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी. एक वरिष्ठ रेलवे अधिकारी ने कहा कि रेलवे देश की सार्वजनिक संपत्ति है और इसकी साफ-सफाई बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है. अधिकारी ने ये भी बताया कि वंदे भारत ट्रेनों में विशेष ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग स्टाफ तैनात रहता है, जो जरूरत पड़ने पर तुरंत सफाई का काम करता है. फिर भी, यात्रियों का सहयोग सबसे जरूरी है. इस घटना ने एक बार फिर सिविक सेंस की अहमियत पर बहस छेड़ दी है. एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा कि जब तक लोगों में सार्वजनिक जगहों पर जिम्मेदारी की भावना नहीं आएगी, तब तक चाहे ट्रेन हो, एयरपोर्ट हो या सड़कें — सब कुछ खराब होता रहेगा. सिविक सेंस आम समझ ही है और इसे बचपन से सिखाया जाना चाहिए, वरना ये समस्या पीढ़ी दर पीढ़ी चलती रहेगी.

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गौरतलब है कि वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस को लंबी दूरी की रात की यात्रा के लिए एक बड़ी सुविधा के रूप में पेश किया गया है. ये वंदे भारत श्रृंखला की पहली स्लीपर ट्रेन है, जो हावड़ा और कामाख्या (गुवाहाटी) के बीच चलेगी. ये ट्रेन लगभग 958 किलोमीटर की दूरी तय करती है और पारंपरिक ट्रेनों की तुलना में तेज़, शांत और अधिक आरामदायक मानी जा रही है.

यहां देखिए वीडियो



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