मैनेजर से घबराहट क्यों होती हैImage Credit source: Instagram/cubicle_talks_with_avik
ऑफिस में जैसे लैपटॉप पर नोटिफिकेशन आता है कि मैनेजर ऑनलाइन आ गए हैं या मीटिंग में जुड़ चुके हैं, तो कई लोगों की धड़कन अचानक तेज हो जाती है. कुछ लोग तुरंत अपने चैट बॉक्स खोल लेते हैं, तो कुछ सोचने लगते हैं कि कहीं उनसे कोई गलती तो नहीं हो गई. कई बार यह घबराहट इतनी बढ़ जाती है कि काम पर ध्यान देना भी मुश्किल हो जाता है. लेकिन क्या सच में हर बार मैनेजर ही तनाव की वजह होते हैं, या फिर हम अपने दिमाग में ऐसी कहानियां बना लेते हैं जो हकीकत से बिल्कुल अलग होती हैं? इसी से जुड़ा एक वीडियो इन दिनों एक बंदे ने शेयर किया है.
इसी विषय पर कंटेंट क्रिएटर अविक रॉय ने एक दिलचस्प वीडियो शेयर किया है. उनका कहना है कि कई बार हमें परेशान करने वाला इंसान नहीं होता, बल्कि हमारी अपनी सोच होती है. उन्होंने वीडियो के साथ लिखा कि अक्सर सबसे बड़ा दबाव आपका मैनेजर नहीं होता, बल्कि वह कहानी होती है जिसे आपने अपने दिमाग में खुद ही बना लिया होता है. यही सोच हमें बिना वजह तनाव में डाल देती है.
क्या दिखा इस वीडियो में?
वीडियो में अविक अपने अनुभव भी शेयर करते हैं. वो बताते हैं कि पहले उनके साथ भी बिल्कुल यही होता था. जैसे ही ऑनलाइन मीटिंग शुरू होती और मैनेजर उसमें शामिल होते, उनका पूरा मूड बदल जाता. उन्हें लगता कि अब लगातार मैसेज आने वाले हैं, ढेर सारे सवाल पूछे जाएंगे और हर छोटी-बड़ी चीज का जवाब तुरंत देना पड़ेगा. इस सोच की वजह से उनका पूरा ध्यान काम से हटकर सिर्फ इस बात पर चला जाता कि कहीं कोई गलती न हो जाए.
उनके मुताबिक, यह डर धीरे-धीरे इतना बढ़ गया था कि वह हर समय खुद को अलर्ट मोड में रखते थे. कोई नोटिफिकेशन आते ही उन्हें लगता कि शायद मैनेजर ने कुछ पूछ लिया होगा. अगर जवाब देने में थोड़ा भी समय लग जाता, तो उन्हें Guilt होने लगता. बाद में उन्हें एहसास हुआ कि यह दबाव किसी और ने नहीं, बल्कि उन्होंने खुद अपने ऊपर डाल रखा था.
अविक कहते हैं कि इस समस्या से बाहर निकलने के लिए उन्होंने सबसे पहले अपनी सोच बदली. उन्होंने खुद से कहा कि हर मैसेज का जवाब उसी पल देना जरूरी नहीं होता. अगर आप किसी काम में व्यस्त हैं और अच्छी क्वालिटी का काम कर रहे हैं, तो वही आपकी सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए. उन्होंने समझा कि जल्दी-जल्दी जवाब देने से ज्यादा जरूरी है सही और बेहतर काम करना. आखिरकार किसी भी कंपनी में कर्मचारियों की पहचान उनके काम से बनती है, सिर्फ उनकी ऑनलाइन एक्टिविटी से नहीं.
वह बताते हैं कि जब उन्होंने इस बात को स्वीकार किया, तो उनका तनाव काफी कम हो गया. अब वह हर नोटिफिकेशन देखकर घबराने के बजाय पहले अपना काम पूरा करने पर ध्यान देते हैं. इससे उनकी उत्पादकता भी बढ़ी और मानसिक दबाव भी कम हुआ. अविक ने एक और आसान लेकिन असरदार तरीका भी बताया. उनका कहना है कि अगर आप हर बार इस इंतजार में रहते हैं कि मैनेजर कब अपडेट मांगेंगे, तो बेहतर है कि उनसे पहले ही जरूरी जानकारी शेयर कर दी जाए. उदाहरण के लिए, अगर कोई प्रोजेक्ट चल रहा है, तो समय-समय पर छोटा सा अपडेट भेज देना कई गलतफहमियों को खत्म कर सकता है. इससे मैनेजर को भी भरोसा रहता है कि काम सही दिशा में आगे बढ़ रहा है और कर्मचारी पर अतिरिक्त दबाव भी नहीं बनता.
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उनका मानना है कि कई बार हम अपने मन में ऐसी कल्पनाएं कर लेते हैं जिनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं होता. हमें लगता है कि मैनेजर हर समय हमारी गलतियां ढूंढ़ रहे हैं, जबकि अक्सर उनका उद्देश्य सिर्फ यह जानना होता है कि काम किस स्थिति में है. जब हम बिना वजह नकारात्मक बातें सोचने लगते हैं, तो वही बातें धीरे-धीरे हमारे व्यवहार और आत्मविश्वास पर असर डालने लगती हैं.
यहां देखिए वीडियो
