प्रतीकात्मक तस्वीर.
Bastar Love Story: छत्तीसगढ़ में बस्तर जिले की जगदलपुर केंद्रीय जेल में शुक्रवार को एक ऐतिहासिक और अनोखा नजारा देखने को मिला. जेल की सलाखों के बीच जहां आमतौर पर सन्नाटा और कड़ाई होती है, वहां विवाह के मंगल गीत और शहनाई की आवाज गूंजी. रेप (धारा 376) के आरोप में जेल में सजा काट रहे कैदी सुरेश सेठिया और शिकायतकर्ता युवती मनमती कश्यप ने जेल परिसर में ही कानून की देखरेख में सात फेरे लेकर एक-दूसरे को अपना जीवनसाथी चुन लिया.
जानकारी के मुताबिक, राजूर गांव के रहने वाले सुरेश सेठिया और मनमती कश्यप एक-दूसरे से गहरा प्यार करते थे. हालांकि, दोनों के अलग-अलग जातियों से होने के कारण युवती के परिजन इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थे. परिजनों के भारी विरोध और सामाजिक दबाव के चलते मामला पुलिस तक पहुंच गया, जिसके बाद पुलिस ने धारा 376 के तहत केस दर्ज कर सुरेश को गिरफ्तार कर जगदलपुर जेल भेज दिया.
कोर्ट पहुंची प्रेमिका, फिर बदला कानून का रुख
सुरेश के जेल जाने के बाद कहानी में एक बड़ा और निर्णायक मोड़ आया. प्रेमी को जेल में देखकर युवती खुद अदालत पहुंची और उसने जज के सामने सच्चाई रखी. युवती ने स्पष्ट कहा कि वो दोनों बालिग हैं, अपनी मर्जी से एक-दूसरे से प्यार करते हैं और शादी करना चाहते हैं. युवती का पक्ष और सहमति सुनने के बाद अदालत ने मानवीय और संवेदनशील रुख अपनाते हुए जेल प्रशासन और पुलिस को जेल परिसर के अंदर ही दोनों का विवाह कराने के सख्त निर्देश जारी किए.
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जेल में सजा मंडप, गवाह बने जेल अधिकारी
अदालत का आदेश मिलते ही जेल प्रशासन ने तुरंत तैयारियां शुरू कर दीं. जगदलपुर केंद्रीय जेल के इतिहास में पहली बार परिसर के भीतर भव्य शादी का मंडप सजाया गया. कानून और जेल अधिकारियों की मौजूदगी में दोनों ने सात फेरे लिए और एक-दूसरे के गले में वरमाला डाली. इस अनोखी शादी पर प्रतिक्रिया देते हुए अधिवक्ता अवधेश झा और दूल्हे सुरेश सेठिया ने कानून की संवेदनशीलता और न्याय प्रणाली के प्रति आभार व्यक्त किया.
