International
oi-Sumit Jha
Ghazala
Hashmi
Virginia
Lieutenant
Governor:
अमेरिकी
चुनावों
में
इस
बार
भारतीय
मूल
के
उम्मीदवारों
ने
एक
अभूतपूर्व
छाप
छोड़ी
है,
जिसने
न
केवल
इतिहास
रचा
है
बल्कि
वैश्विक
मंच
पर
भारतीय
डायस्पोरा
की
बढ़ती
राजनीतिक
शक्ति
को
भी
रेखांकित
किया
है।
एक
ओर,
न्यूयॉर्क
शहर
में
जोहरान
ममदानी
ने
मेयर
पद
पर
जीत
हासिल
कर
सबको
चौंका
दिया,
वहीं
दूसरी
ओर,
भारत
में
जन्मीं
गजाला
हाशमी
ने
वर्जीनिया
में
लेफ्टिनेंट
गवर्नर
का
चुनाव
जीतकर
देश
और
समुदाय
का
गौरव
बढ़ाया
है।
61
वर्षीय
डेमोक्रेट
हाशमी
अब
वर्जीनिया
की
पहली
मुस्लिम
और
पहली
दक्षिण
एशियाई
लेफ्टिनेंट
गवर्नर
बन
गई
हैं।
यह
जीत
उनकी
अटूट
प्रतिबद्धता,
समावेशी
राजनीति
और
दशकों
के
सार्वजनिक
सेवा
के
प्रति
समर्पण
का
प्रमाण
है।
यह
केवल
हाशमी
या
ममदानी
की
व्यक्तिगत
जीत
नहीं,
बल्कि
अमेरिका
में
बढ़ती
विविधता,
प्रवासियों
की
आवाज़
और
भारतीय-अमेरिकियों
की
राजनीतिक
शक्ति
का
एक
सशक्त
प्रतीक
है।
हाशमी
का
यह
ऐतिहासिक
उदय
उन
लाखों
प्रवासियों
के
लिए
एक
प्रेरणा
है
जो
अमेरिका
में
अपने
सपनों
को
साकार
करने
के
लिए
संघर्ष
कर
रहे
हैं,
और
यह
दर्शाता
है
कि
अब
वे
सिर्फ
दर्शक
नहीं,
बल्कि
नीति-निर्धारक
भी
बन
रहे
हैं।

वर्जीनिया
की
पहली
मुस्लिम
और
दक्षिण
एशियाई
लेफ्टिनेंट
गवर्नर
गजाला
हाशमी
ने
वर्जीनिया
में
लेफ्टिनेंट
गवर्नर
का
चुनाव
जीतकर
इतिहास
रच
दिया
है।
उन्होंने
रिपब्लिकन
प्रतिद्वंद्वी
जॉन
रीड
को
हराकर
यह
पद
हासिल
किया
है,
जहां
उन्हें
54.2%
(14,65,634)
वोट
मिले।
इस
जीत
के
साथ,
हाशमी
न
केवल
राज्य
की
पहली
मुस्लिम,
बल्कि
पहली
दक्षिण
एशियाई
लेफ्टिनेंट
गवर्नर
भी
बन
गई
हैं।
यह
उनके
लिए
एक
व्यक्तिगत
उपलब्धि
है,
लेकिन
इससे
भी
बढ़कर,
यह
वर्जीनिया
और
पूरे
अमेरिका
में
विविधता
और
समावेशी
प्रतिनिधित्व
की
दिशा
में
एक
महत्वपूर्ण
कदम
है।
हाशमी
की
यह
जीत
भारतीय-अमेरिकी
समुदाय
की
बढ़ती
राजनीतिक
शक्ति
और
चुनावी
परिदृश्य
में
उनकी
बढ़ती
स्वीकार्यता
को
दर्शाती
है।
ये
भी
पढ़ें:
Nobel
Peace
Prize
न
मिलने
पर
पहली
बार
बोले
Trump,
कही
ऐसी
बात
कि
हंसते-हंसते
माथा
पकड़
लेंगे!
शिक्षिका
और
सामाजिक
न्याय
की
पैरोकार
गजाला
हाशमी
को
उनके
राजनीतिक
करियर
से
पहले
एक
अनुभवी
शिक्षिका
के
रूप
में
जाना
जाता
है।
उन्होंने
यूनिवर्सिटी
ऑफ
रिचमंड
और
रेनॉल्ड्स
कम्युनिटी
कॉलेज
में
लगभग
30
साल
तक
प्रोफेसर
के
रूप
में
काम
किया,
जहाँ
उन्होंने
सेंटर
फॉर
एक्सीलेंस
इन
टीचिंग
एंड
लर्निंग
की
संस्थापक
निदेशक
के
रूप
में
भी
कार्य
किया।
उनकी
आधिकारिक
प्रोफाइल
के
अनुसार,
हाशमी
समावेशी
मूल्यों
और
सामाजिक
न्याय
की
प्रबल
पैरोकार
हैं।
उनके
एजेंडे
में
सार्वजनिक
शिक्षा
में
सुधार,
मतदान
अधिकारों
की
रक्षा,
प्रजनन
स्वतंत्रता,
बंदूक
हिंसा
की
रोकथाम,
पर्यावरण
संरक्षण,
किफायती
आवास
और
स्वास्थ्य
सेवाओं
तक
पहुंच
जैसे
महत्वपूर्ण
मुद्दे
शामिल
हैं।
ये
भी
पढ़ें:
‘Giorgia
Meloni
बड़ी
हसीन,
कहीं
खतरे
में
ना
पड़
जाऊं’,
Donald
Trump
ने
इटली
की
PM
पर
क्या-क्या
कहा?
भारत
से
अमेरिका
तक
का
सफर:
चुनौतियों
से
सफलता
की
कहानी
गजाला
हाशमी
का
सफर
भारत
से
अमेरिका
तक
का
है,
जो
प्रेरणा
और
दृढ़ता
की
कहानी
बयां
करता
है।
वह
मात्र
4
साल
की
उम्र
में
अपनी
मां
और
बड़े
भाई
के
साथ
भारत
से
अमेरिका
आईं
और
जॉर्जिया
में
अपने
पिता
से
मिलीं।
हाईस्कूल
में
उन्होंने
वैलेडिक्टोरियन
बनकर
कई
स्कॉलरशिप
हासिल
कीं,
जो
उनकी
अकादमिक
उत्कृष्टता
का
प्रमाण
है।
उन्होंने
जॉर्जिया
सदर्न
यूनिवर्सिटी
से
बीए
(ऑनर्स)
और
अटलांटा
की
एमोरी
यूनिवर्सिटी
से
अमेरिकी
साहित्य
में
पीएचडी
की
डिग्री
प्राप्त
की।
यह
पृष्ठभूमि
उनके
संघर्ष,
कड़ी
मेहनत
और
शिक्षा
के
प्रति
उनके
जुनून
को
दर्शाती
है,
जिसने
उन्हें
आज
इस
मुकाम
तक
पहुंचाया
है।
इंडियन
अमेरिकन
इम्पैक्ट
फंड
का
समर्थन
गजाला
हाशमी
की
ऐतिहासिक
जीत
पर
इंडियन
अमेरिकन
इम्पैक्ट
फंड
ने
बधाई
दी
है,
जिसने
उनकी
मुहिम
में
$1,75,000
का
निवेश
किया
था।
फंड
के
कार्यकारी
निदेशक
चिंतन
पटेल
ने
उनकी
जीत
को
समुदाय,
राष्ट्रमंडल
और
लोकतंत्र
के
लिए
एक
मील
का
पत्थर
बताया।
यह
समर्थन
दर्शाता
है
कि
कैसे
भारतीय-अमेरिकी
समुदाय
अपने
प्रतिनिधियों
को
मजबूत
करने
के
लिए
एकजुट
हो
रहा
है।
हाशमी
की
जीत
से
वर्जीनिया
की
राजनीति
में
महत्वपूर्ण
बदलाव
आने
की
उम्मीद
है,
क्योंकि
वह
सार्वजनिक
शिक्षा,
स्वास्थ्य
सेवा
और
सामाजिक
न्याय
जैसे
मुद्दों
पर
अपने
मजबूत
विचारों
के
साथ
राज्य
का
नेतृत्व
करेंगी।
उनका
कार्यकाल
समावेशी
और
प्रगतिशील
नीतियों
के
लिए
एक
नया
अध्याय
लिखेगा।
ये
भी
पढ़ें:
Harish
Rawat
ने
अमेरिकी
राष्ट्रपति
Donald
Trump
को
लेकर
कही
बड़ी
बात,
2027
को
लेकर
भी
बड़ा
संकेत,
जानिए
क्या

























