खुद 3 लाख के कर्ज में, पर भूखों का मसीहा बना दिल्ली का यह डिलीवरी बॉय; वायरल हुई कहानी

फूड डिलीवरी बॉय आकाश सरोजImage Credit source: Instagram/@imaakashsaro

Delhi Delivery Boy Inspiring Story: आज के दौर में जब लोग अपनी तनख्वाह से घर का खर्च और बचत मैनेज करने में ही परेशान रहते हैं, वहीं दिल्ली की सड़कों पर एक ऐसा फरिश्ता घूम रहा है जो खुद तो मुश्किलों से जूझ रहा है, लेकिन दूसरों को भूखा नहीं देख सकता. बात हो रही है 24 साल के आकाश सरोज (Akash Saroj) की. आकाश दिल्ली में एक फूड डिलीवरी बॉय हैं. वे दिनभर में जो कुछ भी कमाते हैं, उसका लगभग आधा हिस्सा उन बेघर और मजबूर लोगों को गर्म खाना खिलाने में खर्च कर देते हैं, जिन्हें वे जानते तक नहीं.

दिल्ली के भलस्वा स्लम इलाके में रहने वाले आकाश की यह कहानी सिर्फ दान की नहीं, बल्कि एक बेटे के अपने पिता को दिए वादे की है. आकाश के पिता एक मजदूर थे, जिनका 2024 में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. पिता के इलाज के लिए आकाश पर करीब 3 लाख रुपए का कर्ज भी चढ़ गया. लेकिन जाने से पहले उनके पिता ने उनसे एक बात कही थी, अमीर बनो या न बनो, लेकिन दूसरों की मदद जरूर करना. पिता के इसी आदर्श को आकाश ने अपनी जिंदगी का मकसद बना लिया.

12 घंटे की नौकरी और खुद के खर्च पर सेवा

हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए आकाश ने बताया कि वे पिछले 6 सालों से डिलीवरी एग्जीक्यूटिव के रूप में काम कर रहे हैं. वे हर रोज करीब 12 घंटे बाइक दौड़ाकर 1200 रुपए यानी महीने में लगभग 36,000 रुपए कमाते हैं. लेकिन इस मामूली कमाई में से वे रोज 500 अलग निकाल लेते हैं. इस पैसे से वे खुद खाना तैयार करते हैं और दिल्ली के पीतमपुरा, रोहिणी, जहांगीरपुरी और जीटीबी नगर जैसे इलाकों में जाकर जरूरतमंदों को बांटते हैं. इस नेक काम के लिए उन्हें किसी संस्था से कोई डोनेशन या स्पॉन्सरशिप नहीं मिलती, पूरा खर्च वे अपनी जेब से उठाते हैं.

सोशल मीडिया पर मशहूर, लेकिन कमाई ‘जीरो’

आकाश अपनी इस फूड ड्राइव के वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं, जहां लोग उनके जज्बे को खूब सलाम कर रहे हैं. कई बार तो डिलीवरी के दौरान कस्टमर्स उन्हें पहचान लेते हैं और उनकी मदद के लिए अलग से पैसे भी देते हैं. हालांकि, सोशल मीडिया पर लाखों दिल जीतने के बाद भी इंस्टाग्राम से उनकी कमाई शून्य है. आकाश का कहना है, सोशल मीडिया से मुझे 0 पैसे मिलते हैं, जो कुछ भी करता हूं अपनी मेहनत की कमाई से करता हूं.

मुश्किलों के बीच नहीं थमी इंसानियत

कड़ाके की सर्दी में बेघरों को कंबल बांटना हो, भूखे जानवरों को खाना देना हो या किसी गरीब रिक्शेवाले का पंचर ठीक करवाना हो, आकाश हर जगह मदद के लिए खड़े रहते हैं. 12 घंटे की थका देने वाली डिलीवरी जॉब और उसके बाद खाना बनाकर बांटना शारीरिक रूप से बेहद थका देने वाला होता है. लेकिन आकाश का मानना है कि सच्ची सफलता समाज को कुछ वापस देने में है और दया का कोई भी काम छोटा नहीं होता. यह भी पढ़ें:Viral: 15 रुपए का ऑर्डर, 500 की टिपमहिला की दरियादिली देख रो पड़ा Blinkit डिलीवरी बॉय! देखें वीडियो

यहां देखिए डिलीवरी बॉय का वीडियो

अभिषेक राय

अभिषेक राय (Abhishek Roy) अभी TV9 भारतवर्ष के डिजिटल विंग में असिस्टेंट न्यूज एडिटर (Assistant News Editor) हैं. पत्रकारिता में उन्हें 14 साल से ज्यादा का अनुभव है और इस फील्ड में उनकी अपनी एक अलग पहचान है. अपने करियर में उन्होंने कई बड़े मीडिया संस्थानों में काम किया है.

शुरुआत में वे भोपाल के ‘पीपुल्स समाचार’ अखबार (Peoples Samachar) से जुड़े. यहां उन्होंने प्रिंट मीडिया का काम सीखा. इसके बाद वे दैनिक भास्कर (Dainik Bhaskar) ग्रुप में लंबे समय तक रहे. खास बात ये कि उन्होंने भास्कर के अखबार और वेबसाइट, दोनों जगह काम किया. इससे उन्हें पुरानी और नई, दोनों तरह की पत्रकारिता का अनुभव मिला. अभिषेक ने अहमदाबाद के ‘जानो दुनिया’ (Jano Duniya) न्यूज चैनल में भी काम किया. यहां उन्होंने टीवी मीडिया में अपनी काबिलियत दिखाई.

अभिषेक को राजनीति और विदेशी मामलों की अच्छी समझ है. वे राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाक्रमों और वैश्विक कूटनीति को बहुत ही बारीकी से समझते हैं. हालांकि, वर्तमान में डिजिटल मीडिया की बदलती मांग को देखते हुए वे अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं. इन दिनों वे ट्रेंडिंग खबरों, वायरल टॉपिक्स और हटके कंटेंट पर काम कर रहे हैं.

अभिषेक के लिए पत्रकारिता महज एक पेशा या सिर्फ पाठकों तक सूचनाएं या खबरें पहुंचाना नहीं है. उनका विजन और उद्देश्य इससे कहीं अधिक व्यापक है. वे मानते हैं कि एक पत्रकार के रूप में उनकी जिम्मेदारी है कि पाठकों को हर बार कुछ नया और अनूठा पढ़ने को मिले. कंटेंट ऐसा हो जो पाठकों की सोच के दायरे को विस्तृत करे और उन्हें एक नया नजरिया दे.

अभिषेक को पत्रकारिता के साथ-साथ ट्रैवलिंग का भी शौक है. भागदौड़ भरी जिंदगी से जब भी फुर्सत मिलती है, वे पहाड़ों की तरफ निकल जाते हैं और सुकून के पल बिताते हैं.

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