शख्स को लगी 52 करोड़ की लॉटरी Image Credit source: Getty Images
कहते हैं कि जिंदगी में कब कौन-सा पल इंसान की तकदीर बदल दे, इसका अंदाजा किसी को नहीं होता. कुछ ऐसा ही हुआ बहरीन में रहने वाले भारतीय मूल के कृष्णकुमार श्यामला रविंद्रन के साथ. वर्षों से लॉटरी खरीदते आ रहे कृष्णकुमार को इस बार जो टिकट करोड़पति बना गई, उसके लिए उन्होंने कोई पैसा भी खर्च नहीं किया था. एक प्रमोशनल ऑफर के तहत मिली मुफ्त टिकट ने उन्हें करीब 52 करोड़ रुपये का मालिक बना दिया.
43 वर्षीय कृष्णकुमार पिछले 23 वर्षों से बहरीन में रह रहे हैं. होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे बेहतर अवसरों की तलाश में विदेश गए थे. शुरुआती दिनों में उन्होंने नौकरी की, लेकिन बाद में अपना खुद का रेस्तरां बिजनेस शुरू कर लिया. हालांकि, कारोबार की राह हमेशा आसान नहीं रही. कई बार उन्हें आर्थिक चुनौतियों और मुश्किल परिस्थितियों का सामना भी करना पड़ा.
कितने का मिला इनाम?
इन्हीं संघर्षों के बीच उन्होंने भविष्य में कुछ बड़ा हासिल करने की उम्मीद से अबू धाबी बिग टिकट लॉटरी में हिस्सा लेना शुरू किया. पिछले सात सालों में वो हर महीने टिकट खरीद रहे थे. कोरोना महामारी के दौरान भी उन्होंने यह सिलसिला नहीं रोका. महामारी के बाद उनके बिजनेस की स्थिति बेहतर हुई, लेकिन लॉटरी खरीदने की आदत बनी रही.
किस्मत ने आखिरकार इस साल उनका साथ दिया. 4 जून को निकले अबू धाबी बिग टिकट ड्रॉ में उनका टिकट विजेता घोषित हुआ और उन्हें 2 करोड़ दिरहम का जैकपॉट मिला, जिसकी भारतीय करेंसी में कीमत लगभग 52 करोड़ रुपये है. दिलचस्प बात यह है कि यह टिकट उन्हें एक विशेष प्रमोशनल योजना के तहत मुफ्त में मिली थी.
उस समय कृष्णकुमार अपने परिवार के साथ छुट्टियां मनाने के लिए केरल आए हुए थे. 25 मई को भारत पहुंचने के बाद उन्होंने अपना बहरीन वाला मोबाइल नंबर एक्टिव नहीं रखा था क्योंकि वह रोमिंग पर नहीं था. जब लॉटरी आयोजकों ने उन्हें जीत की सूचना देने के लिए फोन किया, तो उनसे संपर्क नहीं हो सका. बाद में आयोजकों ने व्हाट्सऐप के जरिए उनके भारतीय नंबर पर मैसेज भेजा. तभी उन्हें इस बड़ी जीत की जानकारी मिली.
क्या करेंगे इन पैसों का?
शुरुआत में उन्हें इस खबर पर विश्वास ही नहीं हुआ. इतनी बड़ी रकम जीतना उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा था. परिवार के सभी सदस्य बेहद खुश हैं. खासकर उनकी पत्नी और बहन, जिन्होंने टिकट नंबर चुनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. कृष्णकुमार का कहना है कि आज भी उन्हें यह सब किसी चमत्कार से कम नहीं लगता.
इस जीत की सबसे खास बात यह है कि इस बार उन्होंने टिकट किसी दोस्त या समूह के साथ शेयर नहीं किया था. आमतौर पर वे कई बार दोस्तों के साथ मिलकर टिकट खरीदते थे, लेकिन इस बार टिकट केवल उनके नाम पर थी. इसलिए पूरी पुरस्कार राशि उन्हीं को मिलेगी.
इतनी बड़ा इनाम मिलने के बावजूद कृष्णकुमार की पहली चिंता खुद की नहीं है. उनका ध्यान अपने एक करीबी दोस्त और बिजनेस पार्टनर की ओर है, जो पिछले तीन महीनों से कोमा में हैं. सीढ़ियों से गिरने के कारण उनके सिर में गंभीर चोट लगी थी और तब से उनकी हालत नाजुक बनी हुई है. कृष्णकुमार का कहना है कि वह सबसे पहले अपने दोस्त को बेहतर मेडिकल सुविधा प्रोवाइड कराना चाहते हैं. यदि संभव हुआ तो उन्हें इलाज के लिए भारत भी लाया जाएगा. उनका दोस्त मूल रूप से कर्नाटक के कोडागु जिले का रहने वाला है.
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जहां तक बाकी इनामी राशि के उपयोग का सवाल है, कृष्णकुमार ने अभी कोई आखरी फैसला नहीं लिया है. उनका कहना है कि वे परिवार के साथ बैठकर सोच-समझकर फ्यूचर की प्लानिंग बनाएंगे. फिलहाल उनकी प्राइयोरीटी अपने परिवार और दोस्त की भलाई सुनिश्चित करना है.


























