बड़े शहर की चमक के पीछे छिपी महंगाई, नोएडा पहुंचे बंदे ने बताया क्यों मुश्किल है बचत करना

सैलरी को लेकर नोएडा के बंदे ने कही ये बातImage Credit source: Instagram/ liveakhand

छोटे शहर या कस्बे से निकलकर बड़े शहर में नौकरी करने का सपना आज लाखों युवाओं का है. किसी को लगता है कि मेट्रो सिटी पहुंचते ही करियर में बड़ा बदलाव आएगा, अच्छी नौकरी मिलेगी और जिंदगी पहले से बेहतर हो जाएगी. लेकिन शहर की चमक-दमक के पीछे की असली कहानी तब समझ आती है, जब महीने की सैलरी खाते में आती है और खर्चों की लंबी लिस्ट सामने होती है.

किराया, बिजली, खाना, आने-जाने का खर्च, मोबाइल बिल और रोजमर्रा की दूसरी जरूरतें. इन सबको जोड़ने के बाद कई युवाओं के पास महीने के आखिर में बचता ही क्या है? इसी सवाल को लेकर उत्तर प्रदेश के बांदा से नोएडा आए अखंड का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है.

सिर्फ नौकरी नहीं है चुनौती

अखंड ने नोएडा की ऊंची-ऊंची सोसायटियों के बीच खड़े होकर शहर की जिंदगी का एक ऐसा पहलू सामने रखा, जिसे बड़े शहरों में रहने वाले लोग रोज महसूस करते हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई युवा महीने के 25 हजार रुपये कमाता है और उसकी लगभग पूरी सैलरी सिर्फ किराए में चली जाए, तो वह आखिर बचत कैसे करेगा? उनकी बात का सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला हिस्सा यही था कि छोटे शहरों और गांवों में रहने वालों के लिए यह खर्च कुछ अलग तरह का है. वहां बहुत से लोगों के पास अपना घर होता है. यानी हर महीने हजारों रुपये सिर्फ सिर पर छत रखने के लिए खर्च नहीं करने पड़ते. इसके मुकाबले नोएडा जैसे शहर में रहने के लिए लोगों को छोटे से कमरे या फ्लैट की जगह भी अच्छी-खासी रकम चुकानी पड़ती है.

अखंड ने इसी फर्क को अपनी बात का आधार बनाया. उनका कहना था कि गांव-कस्बे की जिंदगी भले ही उतनी चमकदार नजर न आए, लेकिन वहां रहने का खर्च कई मामलों में कम होता है. वहीं बड़े शहरों में कमाई के मौके ज्यादा हैं, लेकिन उसके साथ खर्च भी उसी रफ्तार से बढ़ जाते हैं. वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने अखंड की बात से खुद को जोड़ना शुरू कर दिया. खासकर दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में नौकरी करने वाले युवाओं ने माना कि अच्छी सैलरी मिलने के बावजूद किराया और दूसरे खर्च बचत की राह में बड़ी चुनौती बन जाते हैं.

दरअसल, बड़े शहर की जिंदगी सिर्फ ऊंची इमारतों, चमकती सड़कों और बेहतर नौकरी तक सीमित नहीं है. यहां हर सुविधा की एक कीमत है. कई बार नौकरी की सैलरी बढ़ती है, लेकिन उसके साथ मकान का किराया, ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा के खर्च भी बढ़ जाते हैं.

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अखंड का वीडियो इसी कड़वी सच्चाई की तरफ इशारा करता है. सवाल सिर्फ 25 हजार रुपये कमाने वाले युवक का नहीं है, बल्कि उन तमाम लोगों का है जो बेहतर भविष्य की उम्मीद में अपना घर छोड़कर बड़े शहर आते हैं. उनके लिए असली चुनौती सिर्फ नौकरी पाना नहीं, बल्कि महीने के अंत तक कुछ पैसा बचा पाना भी है.

यहां देखिए वीडियो

आयुष कुमार

आयुष कुमार, टीवी9 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं. अशोक और चाणक्य की धरती बिहार से हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की तालीम हासिल की है. पत्रकारिता में तीन साल से तिल को बिना ताड़ बनाए किसी भी सोशल मुद्दे को 360 डिग्री समझाने की कोशिश करते हैं.

अमर उजाला, फिरकी डॉट इन से अपने पत्रकारीय सफर की शुरुआत की है. पाठकों तक सरल शब्दों में खबरें पहुंचाना उद्देश्य रहा है. लेखन की इस दुनिया में दिलचस्पी इसलिए बढ़ गई, क्योंकि बचपन से ही काफी ज्यादा बातूनी रहे हैं. फिलहाल, टीवी9 में फीचर राइटिंग करते हुए सोशल मीडिया की नब्ज पकड़ने में माहिर हो गए है. अजीबोगरीब खबरों को गजब तरीके से लिखकर आप सबके सामने पेश करते हैं.Read More



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