बिरयानी से लेकर UPI तक, भारत ने जीता जिम्बाब्वे के छात्र का दिल, बोला- डिग्री लेने आया था, यादें लेकर जाऊंगा

भारत का मुरीद हुआ जिम्बाब्वे का छात्रImage Credit source: Instagram/ kalumba_mwale

भारत में पढ़ाई करने आए एक अफ्रीकी छात्र का अनुभव इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है. जिम्बाब्वे के रहने वाले कालुम्बा म्वाले ने भारत में बिताए अपने समय को याद करते हुए कहा कि यहां पढ़ने का फैसला उनके लिए एक तरह से गलती था. हालांकि, उनकी पूरी पोस्ट पढ़ने पर साफ हो जाता है कि उन्होंने यह बात मजाक और प्यार भरे अंदाज में कही थी. असल में भारत आने का फैसला उनकी जिंदगी के सबसे अच्छे फैसलों में से एक बन गया.

कालुम्बा ने इंस्टाग्राम पर भारत में पढ़ाई और यहां रहने के अपने अनुभव साझा किए. उन्होंने बताया कि शुरुआत में उनका मकसद सिर्फ डिग्री हासिल करना था, लेकिन धीरे-धीरे भारत उनके लिए सिर्फ पढ़ाई करने की जगह नहीं रहा. यहां की जिंदगी, लोगों और संस्कृति से उनका ऐसा जुड़ाव हुआ कि अब वह इस देश को छोड़ना नहीं चाहते. उन्होंने लिखा कि भारत आने का मकसद डिग्री लेना था, लेकिन यहां आकर उन्हें लगा कि यह देश उनके लिए इससे कहीं ज्यादा मायने रखता है. तीन साल भारत में रहने के बाद उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि उन्होंने देश को अभी ठीक से जाना भी नहीं है.

3 साल में इस देश से जुड़ गया दिल

भारत में रहने के दौरान जिन चीजों ने उन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित किया, उनमें यहां का खाना और रोजमर्रा की जिंदगी भी शामिल है. कालुम्बा ने बताया कि भारत में बाहर खाना काफी किफायती है. यहां रहने के बाद अब जब वह अपने देश में खाने की कीमत देखते हैं तो उन्हें वह पहले से काफी ज्यादा लगती है. UPI भी उन्हें बेहद पसंद आया. उन्होंने बताया कि भारत में फोन से चाय, खाना, ट्रांसपोर्ट और दूसरी कई चीजों का पेमेंट करना इतना आसान है कि इसकी आदत पड़ जाती है. उनके मुताबिक, UPI ने रोजमर्रा के लेन-देन को इतना सुविधाजनक बना दिया कि अब वह इसके बिना जिंदगी की कल्पना करना मुश्किल समझते हैं.

भारतीय खाना भी कालुम्बा की पसंदीदा चीजों में शामिल हो गया. उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि उन्हें भारतीय खाने की लत लग गई है. बिरयानी, बटर चिकन, डोसा और मोमोज जैसे व्यंजन उनके फेवरेट बन चुके हैं. इसके अलावा भारत घूमने का मौका भी उन्हें खूब मिला. उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों की यात्रा की और नई जगहों को करीब से देखा. फिर भी उनका कहना है कि तीन साल यहां रहने के बाद भी ऐसा लगता है जैसे उन्होंने भारत का बहुत छोटा हिस्सा ही देखा है. उनके मुताबिक, देश इतना बड़ा और विविध है कि इसे पूरी तरह जानने में शायद काफी समय लगेगा.

भारत में पढ़ाई के दौरान उन्हें अलग-अलग राज्यों और संस्कृतियों के लोगों से मिलने का मौका मिला. उन्होंने कहा कि यहां रहते हुए उन्होंने न सिर्फ भारत की अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों को समझा, बल्कि दुनिया के कई हिस्सों से आए लोगों से भी दोस्ती की. सबसे खास बात यह रही कि भारत ने उनके लिए घर का मतलब ही बदल दिया. जिम्बाब्वे से एक छात्र के तौर पर भारत आए कालुम्बा को धीरे-धीरे इस देश से भावनात्मक जुड़ाव महसूस होने लगा.

बाद में उन्होंने साफ किया कि पढ़ाई के लिए भारत आने को गलती बताना सिर्फ उनका मजाकिया अंदाज था. असल में यह फैसला उनकी जिंदगी में आई सबसे अच्छी चीजों में से एक है. वह डिग्री लेने भारत आए थे, लेकिन यहां से अनुभव, दोस्ती और ढेर सारी यादें लेकर लौटे.

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उनकी पोस्ट पर लोगों ने भी खूब प्रतिक्रिया दी. कई यूजर्स ने कहा कि कालुम्बा अब भारत के लिए किसी बाहरी व्यक्ति से ज्यादा अपने लगते हैं. एक यूजर ने लिखा कि विदेश में जन्मे किसी व्यक्ति को भारत से इतना प्यार करते देखना बेहद अच्छा लगता है. दूसरे ने कहा कि भारत अब उनके लिए दूसरे घर जैसा हो गया है. एक अन्य यूजर ने उन्हें भारतीय खाना बनाना सीखने और उससे जुड़े वीडियो बनाने की सलाह दी.

यहां देखिए वीडियो

आयुष कुमार

आयुष कुमार, टीवी9 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं. अशोक और चाणक्य की धरती बिहार से हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की तालीम हासिल की है. पत्रकारिता में तीन साल से तिल को बिना ताड़ बनाए किसी भी सोशल मुद्दे को 360 डिग्री समझाने की कोशिश करते हैं. अमर उजाला, फिरकी डॉट इन से अपने पत्रकारीय सफर की शुरुआत की है. पाठकों तक सरल शब्दों में खबरें पहुंचाना उद्देश्य रहा है. लेखन की इस दुनिया में दिलचस्पी इसलिए बढ़ गई, क्योंकि बचपन से ही काफी ज्यादा बातूनी रहे हैं. फिलहाल, टीवी9 में फीचर राइटिंग करते हुए सोशल मीडिया की नब्ज पकड़ने में माहिर हो गए है. अजीबोगरीब खबरों को गजब तरीके से लिखकर आप सबके सामने पेश करते हैं.

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