वीकडे में दोस्तों से मिलना, दोपहर में सोना और शॉपिंग… नौकरी के बाद ये सब क्यों बन गया ‘लग्जरी’? महिला ने बताया कैसे जॉब बदल देती है सबकुछ

नौकरी के बाद बदल जाती है जिंदगी Image Credit source: Instagram/4am.contemplation

नौकरी शुरू करने के बाद जिंदगी में कई चीजें बदल जाती हैं. सुबह जल्दी उठने से लेकर ऑफिस की भागदौड़ और दिनभर काम करने तक, पूरा रूटीन ही अलग हो जाता है. कई बार तो ऐसी चीजें, जिन्हें हम पहले अपनी जिंदगी का सामान्य हिस्सा समझते थे, नौकरी लगने के बाद किसी लग्जरी से कम नहीं लगतीं. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक वीडियो इसी बदलाव की मजेदार और काफी रिलेटेबल तस्वीर पेश कर रहा है.

इंस्टाग्राम पर कुलजोत कौर ने एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने बताया कि फुल टाइम जॉब शुरू करने के बाद उनकी रोजमर्रा की जिंदगी कितनी बदल गई. उन्होंने उन छोटी-छोटी चीजों का जिक्र किया, जो नौकरी से पहले आसानी से हो जाती थीं, लेकिन अब उनके लिए समय निकालना भी मुश्किल हो गया है. उनके मुताबिक, कभी जो काम बिल्कुल नॉर्मल लगते थे, आज वही किसी खास सुविधा की तरह महसूस होते हैं.

नौकरी के बाद बदली जिंदगी

वीडियो की शुरुआत में कुलजोत कहती हैं कि आज उन चीजों की बात करते हैं, जो बेरोजगार रहने के दौरान जिंदगी का बेसिक हिस्सा थीं, लेकिन नौकरी शुरू होने के बाद वही चीजें लग्जरी बन गई हैं. सबसे पहले उन्होंने दोपहर की नींद का जिक्र किया. उनका कहना है कि पहले दोपहर में आराम से झपकी लेना कोई बड़ी बात नहीं थी, लेकिन अब यह उनकी जिंदगी से लगभग गायब हो चुका है. उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि अब दोपहर की नींद शायद उनकी किस्मत में ही नहीं है. कभी उन्होंने सोचा भी नहीं था कि एक साधारण सी झपकी के लिए भी इतना तरसना पड़ेगा.

इसके बाद उन्होंने दोस्तों से मिलने-जुलने और शॉपिंग की बात की. नौकरी से पहले वह हफ्ते के दिनों में भी दोस्तों से मिल लिया करती थीं. लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि वीकेंड पर भी दोस्तों से मिलना मुश्किल हो जाता है. यही हाल शॉपिंग का है. पहले जब मन हुआ, वीकडे में ही बाजार निकल जाती थीं, जबकि अब पूरे हफ्ते की थकान के बाद वीकेंड पर बिस्तर से उठने का भी मन नहीं करता. शाम का समय भी उनके लिए पहले जैसा नहीं रहा. कुलजोत के मुताबिक, शाम 5 बजे के बाद पहले उनकी अपनी जिंदगी होती थी. अब उसी समय तक काम की थकान इतनी ज्यादा हो जाती है कि बस आराम करने का मन करता है.

फिल्म देखने का तरीका भी बदल गया है. पहले वह पूरी फिल्म एक ही बार में खत्म कर लेती थीं. अब एक फिल्म देखने में कई दिन लग जाते हैं. कभी थोड़ा हिस्सा आज देख लिया तो बाकी अगले दिन. उन्होंने मजाक में कहा कि फिल्में अब उनके लिए वेब सीरीज बन गई हैं, क्योंकि अगले दिन फिर ऑफिस जाना होता है. कुलजोत ने यह भी बताया कि नौकरी के बाद उनके शौक पीछे छूट गए हैं. पहले हॉबी के लिए अलग से समय निकालने की जरूरत नहीं पड़ती थी, क्योंकि समय ही काफी था. अब शौक पूरे करने के लिए वक्त निकालना ही सबसे बड़ी चुनौती बन गया है.

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उन्होंने वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा कि Let’s talk about the golden era. वीडियो देखने के बाद कई लोगों ने कमेंट सेक्शन में अपनी जिंदगी से मिलती-जुलती बातें शेयर कीं. किसी ने इसे बेहद रिलेटेबल बताया तो किसी ने कहा कि नौकरी के बाद दोपहर की नींद सच में लग्जरी बन जाती है. एक यूजर ने इसे एडल्ट लाइफ की सटीक तस्वीर बताया, जबकि कई लोगों ने फिल्म को टुकड़ों में देखने वाली बात से भी खुद को जोड़ लिया.

यहां देखिए वीडियो

आयुष कुमार

आयुष कुमार, टीवी9 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं. अशोक और चाणक्य की धरती बिहार से हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की तालीम हासिल की है. पत्रकारिता में तीन साल से तिल को बिना ताड़ बनाए किसी भी सोशल मुद्दे को 360 डिग्री समझाने की कोशिश करते हैं. अमर उजाला, फिरकी डॉट इन से अपने पत्रकारीय सफर की शुरुआत की है. पाठकों तक सरल शब्दों में खबरें पहुंचाना उद्देश्य रहा है. लेखन की इस दुनिया में दिलचस्पी इसलिए बढ़ गई, क्योंकि बचपन से ही काफी ज्यादा बातूनी रहे हैं. फिलहाल, टीवी9 में फीचर राइटिंग करते हुए सोशल मीडिया की नब्ज पकड़ने में माहिर हो गए है. अजीबोगरीब खबरों को गजब तरीके से लिखकर आप सबके सामने पेश करते हैं.

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