सड़क के गड्ढों की शिकायत अब होगी आसान, AI कुछ सेकंड में तैयार करेगा फोटो, लोकेशन और ठेकेदार का रिकॉर्ड

गड्ढा दिखते ही AI करेगा पहचानImage Credit source: Instagram/gkcs__

सेन ने इस सिस्टम का एक वीडियो इंस्टाग्राम पर ChatGPT India के साथ शेयर किया था. बाद में यह वीडियो X तक पहुंचा और देखते ही देखते लोगों का ध्यान खींचने लगा. वजह थी इसका सीधा और काम का आइडिया, यानी सड़क के गड्ढे को सिर्फ शिकायत का मुद्दा न मानकर डेटा के जरिए ट्रैक करना.

इस सिस्टम में सेन ने अपनी कार में डैशकैम, GPS और एक्सेलेरोमीटर लगाया है. कार सड़क पर चलती रहती है और ये डिवाइस रास्ते से जुड़ी जरूरी जानकारी रिकॉर्ड करते हैं. इसके बाद कैमरे से मिले वीडियो को AI विजन मॉडल की मदद से जांचा जाता है. सिस्टम अलग-अलग आकार के गड्ढों को पहचान सकता है.

क्या है इस AI की खासियत

सेन ने बताया कि उन्होंने Codex की मदद से एक ऐप तैयार किया है, जो जरूरी डेटा रिकॉर्ड करके OpenAI को भेजता है. इसकी खासियत यह भी है कि यह उन गड्ढों को पहचानने की कोशिश कर सकता है, जिन्हें दूर से देखने पर स्पीड ब्रेकर समझ लिया जाता है. हालांकि, गड्ढा पहचान लेना ही पूरी समस्या का हल नहीं है. असली सवाल इसके बाद आता है कि आखिर इस सड़क की मरम्मत कौन करेगा?

यहीं सेन का सिस्टम थोड़ा अलग काम करता है. उन्होंने ऐप को करीब 2,900 सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स के डेटा से जोड़कर ऐसा बनाया कि सड़क के किसी खास हिस्से से जुड़े ठेकेदार की पहचान की जा सके. इसका फायदा खास तौर पर उन सड़कों पर हो सकता है, जो अभी वारंटी पीरियड में हैं. ऐसी स्थिति में सड़क में खराबी आने पर ठेकेदार को कई मामलों में बिना अतिरिक्त सरकारी खर्च के उसकी मरम्मत करनी पड़ सकती है.

सेन के मुताबिक, सिस्टम करीब चार सेकंड में एक रिकॉर्ड तैयार कर सकता है. इसमें गड्ढे की तस्वीर, उसकी सटीक लोकेशन, टेंडर नंबर और संबंधित अधिकारी की जानकारी शामिल होती है. उन्होंने इस सिस्टम को सिर्फ प्रयोग के तौर पर नहीं छोड़ा, बल्कि रोजाना के सफर में इसका टेस्ट भी किया. ऑफिस जाते समय सिस्टम ने उनके रास्ते में 12 गड्ढे पकड़ लिए. अब इन गड्ढों से जुड़ा फोटो और लोकेशन डेटा शिकायत दर्ज कराने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.

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बेंगलुरु से शुरू हुआ यह आइडिया सोशल मीडिया के जरिए देश के दूसरे हिस्सों तक भी पहुंच गया. लोगों ने सेन की तारीफ करते हुए कहा कि सड़क और गड्ढों जैसी आम समस्या के लिए टेक्नोलॉजी का ऐसा इस्तेमाल काफी उपयोगी हो सकता है.

यहां देखिए वीडियो

आयुष कुमार

आयुष कुमार, टीवी9 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं. अशोक और चाणक्य की धरती बिहार से हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की तालीम हासिल की है. पत्रकारिता में तीन साल से तिल को बिना ताड़ बनाए किसी भी सोशल मुद्दे को 360 डिग्री समझाने की कोशिश करते हैं.

अमर उजाला, फिरकी डॉट इन से अपने पत्रकारीय सफर की शुरुआत की है. पाठकों तक सरल शब्दों में खबरें पहुंचाना उद्देश्य रहा है. लेखन की इस दुनिया में दिलचस्पी इसलिए बढ़ गई, क्योंकि बचपन से ही काफी ज्यादा बातूनी रहे हैं. फिलहाल, टीवी9 में फीचर राइटिंग करते हुए सोशल मीडिया की नब्ज पकड़ने में माहिर हो गए है. अजीबोगरीब खबरों को गजब तरीके से लिखकर आप सबके सामने पेश करते हैं.Read More



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