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‘सुबह 9 बजे कोर्ट आओ’…Gen Z इंटर्न का जवाब सुनकर चकराया वकील का माथा! वायरल पोस्ट पर छिड़ी बहस

Gen Z इंटर्न ने सुबह 9 बजे कोर्ट आने से किया इनकार (सांकेतिक तस्वीर)Image Credit source: Unsplash

आजकल की जनरेशन यानी Gen Z के काम करने का अंदाज पुराने ढर्रे से काफी अलग है. वर्क लाइफ बैलेंस को लेकर इस जनरेशन की बेबाकी कभी तारीफ पाती है, तो कभी विवाद की वजह बन जाती है. कथित तौर पर ऐसा ही एक मामला दिल्ली से सामने आया है, जहां एक वकील ने जब अपने Gen Z इंटर्न को सुबह 9 बजे कोर्ट पहुंचने को कहा, तो इंटर्न ने जो जवाब दिया, उसने पूरे सोशल मीडिया को दो खेमों में बांट दिया.

जिम टाइम vs कोर्ट टाइम का अजब मामला

दिल्ली के एक वकील ने X (पहले ट्विटर) पर एक वाकया साझा किया. वकील ने अपने इंटर्न को कुछ जरूरी काम निपटाने के लिए सुबह 9 बजे अदालत पहुंचने का निर्देश दिया था. लेकिन इंटर्न ने साफ कह दिया कि यह समय उसके जिम जाने का है, इसलिए वह सुबह 9 बजे नहीं आ सकता. हालांकि, इंटर्न ने यह भी कहा कि वह सिर्फ एक बार अपवाद के रूप में आने को तैयार है.

‘मैं उसका सीनियर हूं या पर्सनल असिस्टेंट?’

वकील ने इस बातचीत से तंग आकर पोस्ट में लिखा, इस मोड़ पर मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं उसका सीनियर हूं, जूनियर हूं या उनका पर्सनल असिस्टेंट. इस रवैये को सामान्य नहीं माना जा सकता. वकील की यह पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गई और इस पर लीगल फ्रेटरनिटी के साथ-साथ आम नौकरीपेशा लोगों की प्रतिक्रियाएं आने लगीं.

वर्क लाइफ बैलेंस या गैर जिम्मेदाराना रवैया?

इस घटना ने कार्यस्थल की प्राथमिकताओं पर एक नई बहस छेड़ दी है. कई अनुभवी वकीलों और यूजर्स का कहना था कि वकालत जैसे पेशे में समय की पाबंदी और काम के प्रति समर्पण सबसे पहली शर्त है. जिम के लिए कोर्ट के काम को टालना पेशेवर रवैये के खिलाफ है.

दूसरी तरफ कुछ लोगों का मानना था कि इंटर्नशिप के नाम पर युवाओं से जरूरत से ज्यादा काम की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए. अगर काम के घंटे तय हैं और अतिरिक्त समय का भुगतान नहीं मिल रहा, तो निजी जीवन की सीमाएं तय करना गलत नहीं है.

वकील की सफाई और लोगों की प्रतिक्रियाएं

मामला बढ़ता देख वकील ने बाद में स्पष्ट किया कि उनके ऑफिस में इंटर्न को बाकायदा स्टाइपेंड दिया जाता है और सुबह 9 बजे कोर्ट बुलाना दैनिक काम और ब्रीफिंग का हिस्सा था. सोशल मीडिया पर यूजर्स की राय अभी भी बंटी हुई है. एक यूजर ने लिखा, इंटर्नशिप के दौरान काम को प्राथमिकता देना जरूरी होता है. दूसरे यूजर ने पलटवार करते हुए लिखा, क्या आप जल्दी बुलाने का एक्स्ट्रा पैसा दे रहे हैं? पर्सनल असिस्टेंट वाली सोच ही इस पेशे की असली समस्या है. यह भी पढ़ें:सत्ता सम्मेलन: असली Gen Z कौन हैं? बाबा रामदेव ने टीवी9 के मंच पर बताई परिभाषा

Disclaimer: यह खबर वायरल सोशल मीडिया पोस्ट और नेटिजन्स की प्रतिक्रियाओं पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इस पोस्ट में किए गए किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है.

अभिषेक राय

अभिषेक राय

अभिषेक राय (Abhishek Roy) अभी TV9 भारतवर्ष के डिजिटल विंग में असिस्टेंट न्यूज एडिटर (Assistant News Editor) हैं. पत्रकारिता में उन्हें 14 साल से ज्यादा का अनुभव है और इस फील्ड में उनकी अपनी एक अलग पहचान है. अपने करियर में उन्होंने कई बड़े मीडिया संस्थानों में काम किया है.

शुरुआत में वे भोपाल के ‘पीपुल्स समाचार’ अखबार (Peoples Samachar) से जुड़े. यहां उन्होंने प्रिंट मीडिया का काम सीखा. इसके बाद वे दैनिक भास्कर (Dainik Bhaskar) ग्रुप में लंबे समय तक रहे. खास बात ये कि उन्होंने भास्कर के अखबार और वेबसाइट, दोनों जगह काम किया. इससे उन्हें पुरानी और नई, दोनों तरह की पत्रकारिता का अनुभव मिला. अभिषेक ने अहमदाबाद के ‘जानो दुनिया’ (Jano Duniya) न्यूज चैनल में भी काम किया. यहां उन्होंने टीवी मीडिया में अपनी काबिलियत दिखाई.

अभिषेक को राजनीति और विदेशी मामलों की अच्छी समझ है. वे राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाक्रमों और वैश्विक कूटनीति को बहुत ही बारीकी से समझते हैं. हालांकि, वर्तमान में डिजिटल मीडिया की बदलती मांग को देखते हुए वे अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं. इन दिनों वे ट्रेंडिंग खबरों, वायरल टॉपिक्स और हटके कंटेंट पर काम कर रहे हैं.

अभिषेक के लिए पत्रकारिता महज एक पेशा या सिर्फ पाठकों तक सूचनाएं या खबरें पहुंचाना नहीं है. उनका विजन और उद्देश्य इससे कहीं अधिक व्यापक है. वे मानते हैं कि एक पत्रकार के रूप में उनकी जिम्मेदारी है कि पाठकों को हर बार कुछ नया और अनूठा पढ़ने को मिले. कंटेंट ऐसा हो जो पाठकों की सोच के दायरे को विस्तृत करे और उन्हें एक नया नजरिया दे.

अभिषेक को पत्रकारिता के साथ-साथ ट्रैवलिंग का भी शौक है. भागदौड़ भरी जिंदगी से जब भी फुर्सत मिलती है, वे पहाड़ों की तरफ निकल जाते हैं और सुकून के पल बिताते हैं.

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