इसके आगे सोना भी है सस्ता Image Credit source: Social Media
सोने की कीमतें लगातार चर्चा में हैं. 10 ग्राम सोना जब करीब डेढ़ लाख रुपये के आसपास पहुंचा, तो मिडिल क्लास के लिए इसे खरीदना सपना जैसा हो गया. ज्यादातर लोगों के दिमाग में यही रहता है कि सोना दुनिया की सबसे महंगी धातु है, लेकिन सच्चाई इसके उलट है. सोना महंगा जरूर है, पर सबसे महंगा नहीं. दुनिया में एक ऐसी धातु मौजूद है, जिसकी कीमत के सामने सोना भी काफी सस्ता लगने लगता है. हम बात कर रहे हैं कैलिफोर्नियम के बारे में.
कैलिफोर्नियम को दुनिया की सबसे महंगी धातु माना जाता है. इसकी कीमत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सिर्फ एक ग्राम कैलिफोर्नियम की कीमत करीब 200 किलो सोने के बराबर हो सकती है. यही वजह है कि कैलिफोर्नियम को अब तक का सबसे महंगा मेटल कहा जाता है. बता दें कि सोने और चांदी जैसी धातुओं को खदानों से निकाला जाता है, लेकिन कैलिफोर्नियम के साथ ऐसा नहीं है. यह धरती पर प्राकृतिक रूप से नहीं पाया जाता. कैलिफोर्नियम एक सिंथेटिक और रेडियोएक्टिव रासायनिक तत्व है, जिसे वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं में खास तकनीकों से बनाया जाता है. इसका रासायनिक प्रतीक Cf है. यह तत्व केवल इंसानी वैज्ञानिक प्रगति की वजह से अस्तित्व में है.
कब हुई इसकी खोज
कैलिफोर्नियम की खोज साल 1950 में अमेरिका के कैलिफोर्निया में हुई थी. वैज्ञानिकों ने एक प्रयोग के दौरान इसे पहली बार तैयार किया. चूंकि यह प्रकृति में कहीं नहीं मिलता, इसलिए जितना भी कैलिफोर्नियम आज मौजूद है, वह पूरी तरह से मानव निर्मित है. इसकी हर उपयोगी मात्रा को नियंत्रित और सुरक्षित हालात में तैयार किया जाता है.
इस धातु के बेहद महंगे होने की सबसे बड़ी वजह इसे बनाने की कठिन प्रक्रिया है. कैलिफोर्नियम का निर्माण परमाणु रिएक्टरों के अंदर किया जाता है. इसमें दूसरे भारी तत्वों को लंबे समय तक न्यूट्रॉन रेडिएशन के संपर्क में रखा जाता है. यह प्रक्रिया न केवल बहुत धीमी होती है, बल्कि इसमें भारी खर्च और अत्याधुनिक तकनीक की जरूरत पड़ती है. थोड़ी सी गलती भी पूरे प्रयोग को बेकार कर सकती है.
आखिर कितनी है इसकी कीमत
दुनिया में केवल कुछ ही देश और रिसर्च फैसिलिटीज हैं, जहां कैलिफोर्नियम बनाने की क्षमता मौजूद है. वहां भी इसका उत्पादन बेहद सीमित मात्रा में होता है. इसे ग्राम में नहीं, बल्कि माइक्रोग्राम में मापा जाता है. इतनी कम सप्लाई होने की वजह से इसकी कीमत आसमान छूती है और आम लोगों की पहुंच से यह पूरी तरह बाहर रहता है.
मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कीमतों के मुताबिक, एक ग्राम कैलिफोर्नियम की कीमत 27 मिलियन डॉलर से भी ज्यादा बताई जाती है. भारतीय मुद्रा में यह रकम 2,44,96,27,650 इतनी होती है. यही वजह है कि इसे अब तक बनाए गए सबसे महंगे पदार्थों में गिना जाता है. इसकी असली कीमत इसकी वैज्ञानिक खूबियों में छिपी है. कैलिफोर्नियम का सबसे अहम उपयोग न्यूक्लियर सेक्टर में होता है. इसे न्यूट्रॉन सोर्स के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जिससे न्यूक्लियर रिएक्टर को स्टार्ट करने और खास तरह के वैज्ञानिक रिसर्च को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है.
यह भी पढ़ें: स्काई डाइविंग के दौरान बुरी तरह फंसा बंदा, प्लेन में अटका पैराशूट
इसके अलावा मेडिकल फील्ड में भी कैलिफोर्नियम की भूमिका काफी अहम है. कैलिफोर्नियम का एक खास आइसोटोप, कैलिफोर्नियम-251, न्यूट्रॉन आधारित कैंसर थेरेपी में इस्तेमाल होता है. इस तकनीक में न्यूट्रॉन रेडिएशन के जरिए कैंसर सेल्स को टारगेट किया जाता है. यह इलाज आम नहीं है, लेकिन कुछ खास और जटिल मामलों में इसे कारगर माना जाता है.
