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OMG! गूगल की मोटी सैलरी छोड़ पंजाब लौटा बंदा, अब कर रहा है सैलरी से ज्यादा कमाई

गूगल की नौकरी छोड़ खेती कर रहा है बंदा Image Credit source: Instagram/ gillorganics

आजकल सोशल मीडिया पर एक शख्स की कहानी छाई हुई है मंतज सिंह सिद्धू. किस्सा ऐसा है कि सुनकर यकीन नहीं होता. डबलिन में गूगल की करीब 83 लाख रुपये सालाना वाली नौकरी थी, ऐसी नौकरी जिसके लिए लोग रात-दिन एक कर देते हैं. पर मंतज ने वो सब छोड़ दिया और वापस पंजाब आकर ऑर्गेनिक खेती में जुट गए. लोग इसे प्रेरणा की तरह देख रहे हैं कि अगर इरादा पक्का हो और खुद पर यकीन हो, तो इंसान कहीं भी अपनी राह बना सकता है.

मूल रूप से पटियाला के रहने वाले मंतज ने पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ से MBA किया. इसके बाद टेक्नोलॉजी और मार्केटिंग का शौक उन्हें आयरलैंड ले गया. गूगल में उन्होंने करीब 5 साल काम किया शुरुआत हैदराबाद से हुई, फिर डबलिन टीम में शिफ्ट हो गए.

2022 में गूगल को कहा अलविदा

जहां वो यूके की बड़ी विज्ञापन एजेंसियों के लिए बिजनेस स्ट्रैटेजी बनाते थे, लेकिन जैसे-जैसे करियर आगे बढ़ता गया, मन में एक अजीब-सा सवाल उठने लगा आखिर वो जा कहां रहे हैं? उन्हें महसूस हुआ कि जो लोग उनसे ऊंचे पद पर थे, बेशक उनका पैकेज बड़ा था, लेकिन रूटीन और काम का बोझ लगभग वैसा ही था जैसा उनका खुद का. यही एहसास उनके अंदर बदलाव की वजह बना, और 2022 में उन्होंने गूगल को अलविदा कह दिया.

पंजाब लौटकर मंतज ने अपने चचेरे भाई डॉ. बलजीत सिंह गिल के साथ मिलकर Gill Organics नाम का वेंचर शुरू किया. दोनों भाइयों को इसकी प्रेरणा अपने दादा सरदार बलदेव सिंह सिद्धू से मिली, जो ऑर्गेनिक जीवनशैली में गहरा यकीन रखते थे और 94 साल की उम्र तक पूरी तरह स्वस्थ रहे. बलजीत ने पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला से पीएचडी की है और पटियाला के फतेहपुर गांव के गिल फार्महाउस में पले-बढ़े हैं. यही फार्म आज इस पूरे बिजनेस की जड़ है.

यहां सब्जियां खरीदने का तरीका थोड़ा हटकर है. शहरी परिवारों को खेत का एक हिस्सा एक तय समय के लिए दिया जाता है, जहां उनके लिए मौसमी सब्जियां उगाई जाती हैं. चाहें तो परिवार खुद फार्म जाकर सब्जियां तोड़ सकते हैं, या फिर घर बैठे डिलीवरी मंगा सकते हैं.

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टीम का मानना है कि उनका मकसद सिर्फ ऑर्गेनिक सामान बेचना नहीं, बल्कि इस शब्द के गलत इस्तेमाल के दौर में लोगों का भरोसा फिर से जीतना है. गार्जियन की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रोजेक्ट शुरुआत में सिर्फ 35 परिवारों तक सीमित था, लेकिन अब वेटिंग लिस्ट इतनी लंबी हो गई है कि वेबसाइट के मुताबिक अगली बुकिंग सितंबर 2026 में ही खुलेगी.

यहां देखिए वीडियो

आयुष कुमार

आयुष कुमार

आयुष कुमार, टीवी9 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं. अशोक और चाणक्य की धरती बिहार से हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की तालीम हासिल की है. पत्रकारिता में तीन साल से तिल को बिना ताड़ बनाए किसी भी सोशल मुद्दे को 360 डिग्री समझाने की कोशिश करते हैं.

अमर उजाला, फिरकी डॉट इन से अपने पत्रकारीय सफर की शुरुआत की है. पाठकों तक सरल शब्दों में खबरें पहुंचाना उद्देश्य रहा है. लेखन की इस दुनिया में दिलचस्पी इसलिए बढ़ गई, क्योंकि बचपन से ही काफी ज्यादा बातूनी रहे हैं. फिलहाल, टीवी9 में फीचर राइटिंग करते हुए सोशल मीडिया की नब्ज पकड़ने में माहिर हो गए है. अजीबोगरीब खबरों को गजब तरीके से लिखकर आप सबके सामने पेश करते हैं.Read More



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