अमेजन-वॉलमार्ट ने ठुकराया, 81 साल के बुजुर्ग को मिला डिलीवरी बॉय का काम, कहानी जान पिघल जाएगा आपका दिल

81 की उम्र में डिलीवरी बॉय बने बुजुर्गImage Credit source: Social Media

टेक्सास के81 साल के डॉन जॉनसन की कहानी सुनोगे तो आँखें नम हो जाएंगी. जिस उम्र में लोग अपने घर में आराम करते हैं, नाती-पोतों के साथ वक्त बिताते हैं, उस उम्र में डॉन रोज 14-14 घंटे सड़कों पर भाग रहे थे, लोगों के भारी-भरकम सूटकेस उनके घर तक पहुंचा रहे थे. शौक के लिए नहीं, अपनी पत्नी को जिंदा रखने के लिए.

दरअसल पिछले तीन साल से डॉन एक प्राइवेट कंपनी के लिए खोया हुआ लगेज लोगों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं. इसकी शुरुआत तब हुई जब उनकी पत्नी जोसेफिन को कैंसर का पता चला, वो भी बहुत खतरनाक वाला. 57 साल से एक-दूसरे का साथ निभा रहे इस जोड़े के लिए ये खबर किसी भूकंप से कम नहीं थी. इलाज शुरू हुआ तो खर्चे आसमान छूने लगे. दवाइयां, हॉस्पिटल के बिल, सब कुछ इतना महंगा कि संभालना मुश्किल हो गया. हालात ऐसे हुए कि दोनों को अपनी बेटी के साथ शिफ्ट होना पड़ा ताकि थोड़ी मदद मिल सके, पर खर्चे फिर भी कम नहीं हुए.

81 साल के अंकल की हालत देख पिघला दिल

पैसों की तंगी देख कर डॉन ने काम ढूंढना शुरू किया. अमेजन में गए, वॉलमार्ट में गए, कई और जगहों पर भी किस्मत आजमाई, पर 81 साल के बुजुर्ग को नौकरी देने को कोई तैयार नहीं था. आखिर में यही एक काम मिला जो उन्हें मिल सका. डॉन ने खुद कहा था कि यही एकलौता काम है जो मुझे कोई देने को तैयार हुआ. इसी काम के सिलसिले में वो एरिन हॉवेल के घर पहुंचे. एरिन डलास-फोर्ट वर्थ इलाके में रहती हैं. फ्लाइट में उनका बैग खो गया था और डॉन वही बैग लौटाने आए थे. एरिन के घर के बाहर काफी ऊंची सीढ़ियां हैं. एरिन घर पर नहीं थीं, पर उनके दरवाजे पर लगा कैमरा सब रिकॉर्ड कर रहा था.

वीडियो में साफ दिख रहा था एक बूढ़े आदमी का भारी बैग को छाती से लगाए, एक-एक सीढ़ी बहुत मुश्किल से चढ़ना. सांस फूल रही है, कदम लड़खड़ा रहे हैं, शरीर में बिल्कुल जान नहीं बची है, फिर भी वो रुके नहीं. बाद में एरिन ने उस वीडियो को देखा तो उनका दिल बैठ गया. उन्होंने गोफंडमी पर लिखा कि कैमरे में मैंने देखा कि 81 साल के एक अंकल कितनी तकलीफ से मेरा भारी बैग सीढ़ियों से ऊपर ला रहे हैं. वो बुरी तरह थक चुके थे, हर कदम में मेहनत दिख रही थी.

एरिन ने डॉन से बात की तो पूरी सच्चाई सामने आई. डॉन ने बताया कि कैसे महंगाई और बढ़ते खर्चों ने उनकी कमर तोड़ दी है. उन्होंने बताया कि अब तो राशन से लेकर हर चीज इतनी महंगी हो गई है कि बस किसी तरह गुजारा चल रहा था. ये नौकरी ऊपर से जितनी आसान लगती है, अंदर से उतनी ही तोड़ देने वाली है. रोज सैकड़ों मील गाड़ी चलाना, हर दिन कई किलो के बैग उठाना-उतारना. इस चक्कर में उनकी गाड़ी दो लाख मील से ज्यादा चल चुकी है और अब तो गाड़ी भी जवाब देने लगी है.

एरिन को लगा कि जिस उम्र में डॉन को अपनी बीमार पत्नी के पास बैठ कर उसका हाथ थामना चाहिए, उस उम्र में वो सड़कों पर भटक रहा है ताकि उसकी दवा का पैसा जुटा सके. बस इसी सोच ने उन्हें एक कदम उठाने पर मजबूर कर दिया. उन्होंने 2 सितंबर को डॉन और जोसेफिन के लिए गोफंडमी पर एक फंडरेजर शुरू किया. उन्होंने लिखा कि डॉन को ये भारी बोझ अकेले नहीं उठाना चाहिए. ना पैसों का, ना इस थका देने वाले काम का. इस मुहिम से जो भी पैसा आएगा, सीधा उन्हें जाएगा ताकि वो इस मुश्किल से निकल सकें और फिर जो हुआ, वो किसी चमत्कार से कम नहीं था. लोगों ने खुल कर मदद की. देखते ही देखते इस मुहिम में 2 लाख 44 हजार डॉलर से ज्यादा, यानी करीब 2.87 करोड़ रुपये जमा हो गए. टारगेट 3 लाख डॉलर का रखा गया है और अब वो बहुत दूर नहीं है.

इस प्यार और मदद ने डॉन को एक नई उम्मीद दी है. अब उन्हें लग रहा है कि शायद वो जल्द ही इस भारी काम से छुट्टी ले पाएंगे और अपनी पत्नी के साथ वक्त बिता पाएंगे. डॉन ने कहा कि मुझे लगता है अब मैं काम छोड़ पाऊंगा, ये मेरे लिए बहुत बड़ी बात है.

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हम अभी पूरी तरह से इस परेशानी से बाहर नहीं निकले हैं, पर बहुत जल्द निकल जाएंगे. जोसेफिन के लिए भी ये सिर्फ पैसों की मदद नहीं है, ये हिम्मत है. अनजान लोगों के मैसेज, उनकी दुआओं ने उन्हें अंदर से मजबूत किया है. जोसेफिन ने कहा कि अब मुझे लगता है कि मैं इसका सामना कर सकती हूं. यही सबसे बड़ा बदलाव है. लोग हमारे लिए प्रार्थना कर रहे हैं, ये सोच कर ही दिल में एक अजीब सी खुशी और सुकून आता है.

यहां देखिए वीडियो

आयुष कुमार

आयुष कुमार, टीवी9 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं. अशोक और चाणक्य की धरती बिहार से हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की तालीम हासिल की है. पत्रकारिता में तीन साल से तिल को बिना ताड़ बनाए किसी भी सोशल मुद्दे को 360 डिग्री समझाने की कोशिश करते हैं. अमर उजाला, फिरकी डॉट इन से अपने पत्रकारीय सफर की शुरुआत की है. पाठकों तक सरल शब्दों में खबरें पहुंचाना उद्देश्य रहा है. लेखन की इस दुनिया में दिलचस्पी इसलिए बढ़ गई, क्योंकि बचपन से ही काफी ज्यादा बातूनी रहे हैं. फिलहाल, टीवी9 में फीचर राइटिंग करते हुए सोशल मीडिया की नब्ज पकड़ने में माहिर हो गए है. अजीबोगरीब खबरों को गजब तरीके से लिखकर आप सबके सामने पेश करते हैं.

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